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Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Shabd Samman 2022: Highest Honor Akashdeep Shekhar Joshi in Hindi and Pratibha Rai in Odia

अमर उजाला शब्द सम्मान 2022: ‘आकाशदीप’ हिंदी में शेखर जोशी और उड़िया में प्रतिभा राय को सर्वोच्च सम्मान

Sun, 29 Jan 2023 11:14 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 29 Jan 2023 11:14 AM IST
सार

श्रेष्ठ कृति सम्मान पूनम वासम (कविता), सुधीर चन्द्र (कथेतर), चन्दन पाण्डेय (कथा), आशुतोष गर्ग (भाषाबंधु) और श्रेष्ठ पहली कृति के लिए अणुशक्ति सिंह को दिए जाएंगे।

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Amar Ujala Shabd Samman 2022: Highest Honor Akashdeep Shekhar Joshi in Hindi and Pratibha Rai in Odia
अमर उजाला शब्द सम्मान 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शब्दों की महान परंपरा के सतत सम्मान और श्रेष्ठतम सृजन को रेखांकित करते हुए इस बार शब्द सम्मान का सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ हिंदी में शेखर जोशी और उड़िया में प्रतिभा राय को दिया जा रहा है। साथ ही श्रेष्ठ कृति सम्मान पूनम वासम (कविता), सुधीर चन्द्र (कथेतर), चन्दन पाण्डेय (कथा), आशुतोष गर्ग (भाषाबंधु) और श्रेष्ठ पहली कृति के लिए अणुशक्ति सिंह को दिए जाएंगे। यह अलंकरण समारोह 30 जनवरी, 2023 को दिल्ली में मशहूर सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान के मुख्य आतिथ्य में हो रहा है।

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  • श्रेष्ठ कृति सम्मान

छाप (कविता)

लेखक- पूनम वासम
(किताब- मछलियां गाएंगी
एक दिन पंडुमगीत)

मैं जब-जब भटकती हूं...
मुझे यह जरूरत महसूस होती है कि मैं अपनी भाषा के माध्यम से अपने देखे हुए का परिचय बाकी दुनिया को करवाऊं। मेरे पास अतीत को भोगने से थकी हुई देह है, जो वर्तमान देह के भीतर भटक रही है, इसे भविष्य का रास्ता नहीं मिल रहा है। जहां से रास्ता नहीं मिलता, मेरी लड़ाई वहीं से शुरू हो जाती है। मुझे जानना है कि विकास की यह विकराल दौड़ जहां पर रुकेगी, वहां इस संसार के सबसे कमजोर और हारे हुए मनुष्य के लिए क्या है? नए की आराधना के नाम पर पुराने को कब तक खोना पड़ेगा?

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निर्णायक वक्तव्य
आदिवासियों की शब्दावली का हिंदी में कोई कोश नहीं है। फिर भी पूनम वासम ने उस जीवन की अनोखी उक्तियों से हिंदी की ‘घिसी-पिटी’ आधुनिकता से मुक्ति दिलाई है।
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- लीलाधर जगूड़ी, विख्यात कवि

  • श्रेष्ठ कृति सम्मान

छाप (कथेतर)

लेखक- सुधीर चन्द्र
(किताब- भूपेन खख्खर- एक
अंतरंग संस्मरण)

अनेक रूप देखे हैं भूपेन के
भूपेन को बहुत नजदीक से जानने का मेरा दावा सच है। 23 साल की निरंतर गहराती दोस्ती रही उसके साथ। पर इस किताब को लिखने के दौरान समझ में आया कि उसका एक ऐसा पक्ष भी है, जिसको उसके जीते-जी मैं ढंग से न समझ पाया। अक्सर उसी की जुबानी, उसका लिखा सुनने को मिलता था। और फिर पूरी एक किताब भूपेन पर? एक दुस्साहस तो है ही। अनेक रूप देखे हैं मैंने भूपेन के। उन सब के बेबाक विवरण हैं किताब में। इस किताब को लिखने के दौरान ही जाना कि भूपेन में एक विलक्षण लेखक भी है।

निर्णायक वक्तव्य
यह मौलिक और विशिष्ट है। इसमें अज्ञात तथ्य और अल्पज्ञात सूचनाएं हैं। संस्मरणों के साथ लिखी जीवनियों में आत्मविज्ञापन के खतरे होते हैं, मगर यह उनसे मुक्त है।
- विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, मशहूर आलोचक

  • श्रेष्ठ कृति सम्मान

छाप (कथा)


लेखक- चन्दन पाण्डेय
(किताब- वैधानिक गल्प)

जीवन का नाट्य रूपांतरण
जीवन और साहित्य नितांत अलग सूत्रों से संचालित होते हैं, मैं उस समाज के बारे में लिखना चाहता था, जिसमें भीड़-हत्याएं किसी हथियार की तरह आजमाई जा रही थीं। वैधानिक गल्प में जब बतौर शिल्प, मैं उपन्यास के भीतर का जीवन और उसके बरक्स उस जीवन के नाट्य रूपांतरण की बायनरी रच रहा था, तब लगा था कि जीवन को उसका रूपांतरण परास्त कर पाएगा, लेकिन फिर वह जो तीसरा जीवन, जिसे हम उपन्यास के बाहर जी रहे हैं, रोड़ा बन गया। काश, वह सत्य जीवन से छन कर आया होता।  

निर्णायक वक्तव्य
इसे पढ़ते हुए उपन्यास ‘ओल्डमैन एंड द सी’ (हेमिंग्वे) और ‘द फॉल’ (कामू) याद आए बिना नहीं रहते। दोनों ही मानवीय नियति को दर्शाने वाली महान कृतियां हैं।
- पंकज बिष्ट, विख्यात कथाकार

  • श्रेष्ठ कृति सम्मान

छाप (पहली किताब)

लेखक- अणुशक्ति सिंह
किताब- शर्मिष्ठा

वास्तविक स्त्री की परिकल्पना
शर्मिष्ठा उन कुछ मिथकीय स्त्री पात्रों में से हैं, जिनकी भूमिका महती रहते हुए भी उन्हें उचित स्थान नहीं मिला था। शर्मिष्ठा की कहानी में मुझे वे सारे अवयव नजर आए, जिनसे मेरे पाठक जुड़ सकते थे। मेरे लिए शर्मिष्ठा की कहानी उन सभी स्त्रियोचित संघर्ष का बिंब है, जिनसे आजकल की स्त्रियां भी दो-चार हो रही हैं। मैंने शर्मिष्ठा को इसलिए भी चुना कि सामाजिक ढांचे में परिवर्तन लाने के लिए बेहद आवश्यक है कि उन किस्सों का रूप बदला जाए, जो पुराने मापकों को स्थापित करते आए हैं।  

निर्णायक वक्तव्य
यह आज की स्वतंत्रचेता स्त्री का ऐलान है, जिसकी मुहर समय माथे पर होनी चाहिए। इसी की गूंज पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक इलाकों में बनी रहेगी।
- मैत्रेयी पुष्पा, मशहूर कथाकार
 

  • श्रेष्ठ अनुवाद

भाषाबंधु

लेखक- आशुतोष गर्ग
किताब- द लास्ट गर्ल

मन और आत्मा पर आघात
‘द लास्ट गर्ल’ की लेखिका नादिया मुराद को खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस ने अगवा किया और अकल्पनीय मानसिक और शारीरिक यातनाएं दीं । इस पुस्तक में अनेक दृश्य और नादिया को दी गई यातनाओं के विवरण इतने भयानक हैं कि उन्हें पढ़कर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं।  ‘द लास्ट गर्ल’ का अनुवाद बेहद मुश्किल काम था, क्योंकि ‘उत्पीड़न’ और ‘यातना’ जैसे शब्दों का तो अनुवाद किया जा सकता है, किंतु मन और आत्मा पर हुए आघात का अनुवाद करना लगभग असंभव है।

निर्णायक वक्तव्य
लगा ही नहीं कि मैं इस आत्मकथा को अनुवाद के जरिये पढ़ रहा हूं। दर्द और तकलीफ की शब्द-शब्द में बहती अविरल नदी को हिंदी पाठकों तक पहुंचाने की ईमानदार कोशिश।
- सूरज प्रकाश, मशहूर अनुवादक

  • अलंकरण प्रतीक चिह्न

अनुकृति : गंगा

एक संस्कृति है गंगा, जो सदियों से हमारे मन में और हमारी धरती पर बह रही है। गंगा इतिहास की नदी है। गंगा हमारे वर्तमान की धारा है और गंगा में हमारे लिए भविष्य की लहरें हैं।
यह जीवनदायिनी है, जहां-जहां गुजरती है जीवन हरा होता चला जाता है। इसी गंगा को हमने शब्द सम्मान अलंकरण के प्रतीक चिह्न के रूप में चुना।
राष्ट्रीय संग्रहालय में संग्रहीत सेनवंशकालीन गंगा की यह प्रतिमा बारहवीं सदी की है, जो महानद क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिली थी।
विश्व प्रसिद्ध शिल्पी रामसुतार ने शब्द सम्मान के लिए इसकी अनुकृति तैयार की है, जिन्होंने हमारे देश की संसद सहित दर्जनों देशों में महात्मा गांधी की मूर्तियां बनाई हैं। और, हाल में विश्व की सबसे ऊंची 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' तैयार की है।

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