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Amar Ujala Samvad: रक्षा मंत्री ने सुनाई रामभरोसे की रोचक कहानी, देश के विकास को लेकर कही ये बड़ी बात
Mon, 19 Jun 2023 06:15 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 19 Jun 2023 06:15 PM IST
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Rajnath Singh
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Amar Ujala
विस्तार
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को 'अमर उजाला संवाद' कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने 'भारत का स्वर्णिम भविष्य' विषय पर अपनी बात रखी। करीब 45 मिनट तक रक्षामंत्री ने आजादी से लेकर अब तक के देश की यात्रा के बारे में बताया। एक बेहद ही रोचक कहानी बताई। जिसके किरदार का नाम 'रामभरोसे' था।रक्षामंत्री ने कहा कि अब देश को रामभरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। अब देश की प्रगति हमें पुरुषार्थ से खुद करनी होगी। 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने मॉर्गन स्टेनली का जिक्र करते हुए कहा कि मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2027 तक भारत शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होगा। आइए जानते हैं रक्षा मंत्री ने क्या-क्या कहा?
पूरी दुनिया की नजर हमारे ऊपर, 21वीं सदी हमारी होगी
रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज हमारा देश दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है। सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है। ऐसे में भारत के स्वर्णिम भविष्य का अर्थ दुनिया का स्वर्णिम भविष्य है। दुनिया के बड़े प्लेटफॉर्म से कई वक्ताओं और बुद्धिजीवियों और राष्ट्राध्यक्षों ने यहां तक कह दिया है कि यदि 19वीं सदी इंग्लैंड की थी, 20वीं सदी यूनाइटेड स्टेट अमेरिका की थी तो 21वीं सदी हमारे और आपके भारत की है।'
उन्होंने कहा, 'ये बयान दबाव डालकर नहीं दिलवाए गए हैं। ये लोगों ने खुद दिया है। दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखने वाले लोगों ने खुद ही भारत को देखा, जाना और समझा। इसमें उन्होंने पाया कि भारत का भविष्य स्वर्णिम है। भारत पर आज लोगों का जो विश्वास है, वह इसलिए बना है क्योंकि भारत ने अपनी आजादी के बाद से अब तक जो प्रोग्रेस की है, उसे दुनिया विलक्षण उदाहरण के रूप में देखती है। आजादी के समय से लेकर आज तक भारत की जो विकास यात्रा रही है, वो किस प्रकार से गतिमान रही है।'
रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज हमारा देश दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है। सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है। ऐसे में भारत के स्वर्णिम भविष्य का अर्थ दुनिया का स्वर्णिम भविष्य है। दुनिया के बड़े प्लेटफॉर्म से कई वक्ताओं और बुद्धिजीवियों और राष्ट्राध्यक्षों ने यहां तक कह दिया है कि यदि 19वीं सदी इंग्लैंड की थी, 20वीं सदी यूनाइटेड स्टेट अमेरिका की थी तो 21वीं सदी हमारे और आपके भारत की है।'
उन्होंने कहा, 'ये बयान दबाव डालकर नहीं दिलवाए गए हैं। ये लोगों ने खुद दिया है। दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखने वाले लोगों ने खुद ही भारत को देखा, जाना और समझा। इसमें उन्होंने पाया कि भारत का भविष्य स्वर्णिम है। भारत पर आज लोगों का जो विश्वास है, वह इसलिए बना है क्योंकि भारत ने अपनी आजादी के बाद से अब तक जो प्रोग्रेस की है, उसे दुनिया विलक्षण उदाहरण के रूप में देखती है। आजादी के समय से लेकर आज तक भारत की जो विकास यात्रा रही है, वो किस प्रकार से गतिमान रही है।'
फिर रामभरोसे की कहानी से देश की यात्रा के बारे में बताया
रक्षामंत्री ने अपने भाषण की शुरूआत में ही रामभरोसे नाम का जिक्र किया। बोले, ये मेरे मित्र का नाम है जो कुछ समय पहले ही मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि रामभरोसे का पूरा जीवन देश के विकास यात्रा की कहानी है। रामभरोसे का जन्म देश की आजादी के समय हुआ था। तब देश में सड़कें नहीं थीं। एक जगह से दूसरे जगह आने-जाने में दिक्कत होती थी। अस्पताल नहीं थे, इसके चलते लोग बिना इलाज के ही मर जाते थे। रामभरोसे की मां ने भी इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। रामभरोसे की मां चूल्हे पर खाना बनाती थी और धुएं के चलते उन्हें लंग्स कैंसर हो गया था। रामभरोसे के साथ उनकी मां ने उनकी बहन को भी जन्म दिया था। उस दौरान महिलाओं की स्थिति देश में बहुत बुरी होती थी। लड़की का जन्म अभिशाप माना जाता था। इसलिए रामभरोसे की बहन का नाम पत्ती रखा गया।
रक्षामंत्री ने अपने भाषण की शुरूआत में ही रामभरोसे नाम का जिक्र किया। बोले, ये मेरे मित्र का नाम है जो कुछ समय पहले ही मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि रामभरोसे का पूरा जीवन देश के विकास यात्रा की कहानी है। रामभरोसे का जन्म देश की आजादी के समय हुआ था। तब देश में सड़कें नहीं थीं। एक जगह से दूसरे जगह आने-जाने में दिक्कत होती थी। अस्पताल नहीं थे, इसके चलते लोग बिना इलाज के ही मर जाते थे। रामभरोसे की मां ने भी इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। रामभरोसे की मां चूल्हे पर खाना बनाती थी और धुएं के चलते उन्हें लंग्स कैंसर हो गया था। रामभरोसे के साथ उनकी मां ने उनकी बहन को भी जन्म दिया था। उस दौरान महिलाओं की स्थिति देश में बहुत बुरी होती थी। लड़की का जन्म अभिशाप माना जाता था। इसलिए रामभरोसे की बहन का नाम पत्ती रखा गया।
स्कूल-कॉलेज नहीं थे, इलाज के लिए अस्पताल भी नहीं था
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रामभरोसे की कहानी के जरिए देश की विकास गाथा की पूरी कहानी बताई। कहा कि रामभरोसे के गांव के आस-पास कोई स्कूल नहीं था। दूर जाकर रामभरोसे ने कुछ पढ़ाई तो कर ली, लेकिन उनकी बहन नहीं कर पाई। उस दौरान किसानों की हालत खराब हुआ करती थी। खेती करने के लिए गांव के महाजन से कर्ज लेना पड़ता था। उस कर्ज को भरने में लोगों की पूरी जिंदगी चली जाती थी। यही रामभरोसे के पिता के साथ भी हुआ। उनका निधन हो गया। इस बीच, उनकी बहन चूल्हा-चौका ही करती थी। वह जंगल में नित्यकर्म करने गईं और वहां उसे किसी किड़े ने काट लिया। समय पर इलाज नहीं मिला और उनकी बहन की भी मौत हो गई।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रामभरोसे की कहानी के जरिए देश की विकास गाथा की पूरी कहानी बताई। कहा कि रामभरोसे के गांव के आस-पास कोई स्कूल नहीं था। दूर जाकर रामभरोसे ने कुछ पढ़ाई तो कर ली, लेकिन उनकी बहन नहीं कर पाई। उस दौरान किसानों की हालत खराब हुआ करती थी। खेती करने के लिए गांव के महाजन से कर्ज लेना पड़ता था। उस कर्ज को भरने में लोगों की पूरी जिंदगी चली जाती थी। यही रामभरोसे के पिता के साथ भी हुआ। उनका निधन हो गया। इस बीच, उनकी बहन चूल्हा-चौका ही करती थी। वह जंगल में नित्यकर्म करने गईं और वहां उसे किसी किड़े ने काट लिया। समय पर इलाज नहीं मिला और उनकी बहन की भी मौत हो गई।
Rajnath Singh
- फोटो :
Amar Ujala
किसानों का हौसला बढ़ा, पाकिस्तान को मिली पटखनी
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल का भी जिक्र किया। बोले, आजादी के बाद से उनके मित्र रामभरोसे ने बड़ी मुसीबतें झेल ली थी। उस बीच, एक बड़ी घटना घटी। तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश की जनता से हर सप्ताह एक दिन उपवास का प्रण किया। लाखों लोगों के उपवास ने देश के किसानों, जवानों का हौसला बढ़ाया। 1965 का युद्ध जीतते हुए जय जवान, जय किसान का नारा दिया।
रामभरोसे जी के मन में यह विश्वास जागा कि देश के विकास में उनका भी योगदान है। हरित क्रांति के बाद देश अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गया। उनके परिवार की आमदनी बढ़ी। उनका विवाह हुआ, पुत्र कमल पैदा हुआ। देश भी अपने विकास की गति को बढ़ा रहा था। इसी बीच, रामभरोसे जी के जीवन में खुशी का क्षण आया। जहां देखिए, वहां सेना की चर्चा हो रही थी। 1971 में हमारी सेना ने पाकिस्तान को एक बार फिर पटखनी दी।
ऐसी पटखनी दी कि पाकिस्तान हमेशा के लिए टूट गया। चंद्रशेखर आजाद जी ने गोली अपने ही सीने में दागी। अश्फाक उल्लाह को जब फांसी हुई तो मजिस्ट्रेट ने पूछा कि आखिरी मुराद क्या है। उन्होंने कहा कि फांसी का तख्त पर शादी करने जा रहा हूं। यही वह भावना है, जिसने भारत को आजादी दिलाई।
रामभरोसे जी ने ऐसा भी कुछ देखा, जिसके चलते देश को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया। तब रामभरोसे जी को लोकतंत्र की परिभाषा नहीं पता था, लेकिन इतना जानते थे कि हम सरकार को शासन करने के लिए, सेवा करने के लिए चुनते हैं। तब उन्होंने गतिविधियों के खिलाफ बोलना शुरू किया। तब उन्हें अनुभव हो रहा था- तीर पर कैसे रुकूं मैं, आज लहरों से निमंत्रण।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल का भी जिक्र किया। बोले, आजादी के बाद से उनके मित्र रामभरोसे ने बड़ी मुसीबतें झेल ली थी। उस बीच, एक बड़ी घटना घटी। तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश की जनता से हर सप्ताह एक दिन उपवास का प्रण किया। लाखों लोगों के उपवास ने देश के किसानों, जवानों का हौसला बढ़ाया। 1965 का युद्ध जीतते हुए जय जवान, जय किसान का नारा दिया।
रामभरोसे जी के मन में यह विश्वास जागा कि देश के विकास में उनका भी योगदान है। हरित क्रांति के बाद देश अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गया। उनके परिवार की आमदनी बढ़ी। उनका विवाह हुआ, पुत्र कमल पैदा हुआ। देश भी अपने विकास की गति को बढ़ा रहा था। इसी बीच, रामभरोसे जी के जीवन में खुशी का क्षण आया। जहां देखिए, वहां सेना की चर्चा हो रही थी। 1971 में हमारी सेना ने पाकिस्तान को एक बार फिर पटखनी दी।
ऐसी पटखनी दी कि पाकिस्तान हमेशा के लिए टूट गया। चंद्रशेखर आजाद जी ने गोली अपने ही सीने में दागी। अश्फाक उल्लाह को जब फांसी हुई तो मजिस्ट्रेट ने पूछा कि आखिरी मुराद क्या है। उन्होंने कहा कि फांसी का तख्त पर शादी करने जा रहा हूं। यही वह भावना है, जिसने भारत को आजादी दिलाई।
रामभरोसे जी ने ऐसा भी कुछ देखा, जिसके चलते देश को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया। तब रामभरोसे जी को लोकतंत्र की परिभाषा नहीं पता था, लेकिन इतना जानते थे कि हम सरकार को शासन करने के लिए, सेवा करने के लिए चुनते हैं। तब उन्होंने गतिविधियों के खिलाफ बोलना शुरू किया। तब उन्हें अनुभव हो रहा था- तीर पर कैसे रुकूं मैं, आज लहरों से निमंत्रण।
अटल जी की सरकार से बढ़ गई थी उम्मीदें
उन्होंने आगे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बारे में भी बताया। कहा कि रामभरोसे जी ने कई प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल देखा। जब देश 21वीं सदी में प्रवेश करने वाला था, तब उन्होंने बाजार में कई प्रोडक्ट्स देखा। जिसे वह कभी नहीं जानते थे। उन्होंने उस दौरान ये भी देखा कि अगर भारत ग्लोबलाइजेशन, प्राइवटाइजेशन को समझने लगे।
इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने देखा कि देश स्वर्णिम चतुर्भुज राज्य मार्ग के माध्यम से उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देश जुड़ रहा है। उस वक्त उस मंत्रालय का काम मैं ही देख रहा था। कनेक्टिविटी के अभाव में रामभरोसे जी के पिता उनके जन्म के समय गांव नहीं पहुंच पाए थे। आज पूरा का पूरा गांव अपनी जरूरत के हिसाब से शहर पहुंच रहा है।
1998 में रामभरोसे जी के जीवन में एक और अच्छा पल आया, जब उन्हें पता लगा कि भारत भी परमाणु शक्ति से संपन्न देश बन गया है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के मजबूत नेतृत्व में देश की सरकार देखी। 21वीं सदी में कदम रखते ही उन्होंने भारत को देखा, उनका विश्वास दृण हो गया कि आने वाले दिनों में भारत काफी तरक्की करेगा।
उन्होंने आगे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बारे में भी बताया। कहा कि रामभरोसे जी ने कई प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल देखा। जब देश 21वीं सदी में प्रवेश करने वाला था, तब उन्होंने बाजार में कई प्रोडक्ट्स देखा। जिसे वह कभी नहीं जानते थे। उन्होंने उस दौरान ये भी देखा कि अगर भारत ग्लोबलाइजेशन, प्राइवटाइजेशन को समझने लगे।
इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने देखा कि देश स्वर्णिम चतुर्भुज राज्य मार्ग के माध्यम से उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देश जुड़ रहा है। उस वक्त उस मंत्रालय का काम मैं ही देख रहा था। कनेक्टिविटी के अभाव में रामभरोसे जी के पिता उनके जन्म के समय गांव नहीं पहुंच पाए थे। आज पूरा का पूरा गांव अपनी जरूरत के हिसाब से शहर पहुंच रहा है।
1998 में रामभरोसे जी के जीवन में एक और अच्छा पल आया, जब उन्हें पता लगा कि भारत भी परमाणु शक्ति से संपन्न देश बन गया है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के मजबूत नेतृत्व में देश की सरकार देखी। 21वीं सदी में कदम रखते ही उन्होंने भारत को देखा, उनका विश्वास दृण हो गया कि आने वाले दिनों में भारत काफी तरक्की करेगा।
फिर भ्रष्टाचार का काला अध्याय भी पूरे देश ने देखा
रक्षा मंत्री ने बताया कि 2004 आते-आते देश में सरकार बदल गई। इस बीच रामभरोसे का बेटा कमल भी बड़ा हो गया। कमल रोजी-रोटी के लिए दिल्ली आ गया। इस बीच, रामभरोसे ने अमेरिका के साथ सिविलियन न्यूक्लियर डील करते हुए भी देखा। साथ ही उन्हें ये भी एहसास होने लगा कि जिस सरकार को उन्होंने चुना, वो किस तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है। तब उन्होंने इसके खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी तमाम आंदोलनों में शिरकत की।
2014 से बदल गया देश का नजरिया
उन्होंने बताया कि रामभरोने ने अपने जीवन में काफी कुछ देखा। देश के हर पहलु से वह वाकिफ हैं। हालांकि, 2014 में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी चाहत हर किसी को थी। तब देश में ऐसी सरकार आई, जैसी खुद रामभरोसे और देश की करोड़ो जनता चाहती थी। सौभाग्य से उस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मैं ही निभा रहा था। तब देश को एक आशा कि किरण दिखाई दी। उसी वक्त रामभरोसे के बेटे कमल के घर आशा और किरण का जन्म हुआ। कुछ समय बाद इनके भाई अजय का भी जन्म हुआ।
आशा और किरण दस साल के होने को हैं। उन्हें देखकर रामभरोसे जी को सुकून होता है। वह यह देख पा रहे हैं कि कैसे जनधन योजना के माध्यम से उन्हें और उनके परिवार को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है। जो कर्ज पहले उन्हें महाजन से लेना पड़ता था, वही कर्ज अब उन्हें बैंक से मिलता है और मामूली ब्याज पर। उनकी मां और बहन इलाज के अभाव में मर गई थी, लेकिन आज ब्लॉक लेवल पर सीएचसी-पीएचसी बन चुके हैं। उनकी मां को चूल्हे पर खाना बनाने के चलते लंग्स कैंसर हुआ था, लेकिन आज प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत देश की करोड़ों मां को गैस-चूल्हा दिया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि 2004 आते-आते देश में सरकार बदल गई। इस बीच रामभरोसे का बेटा कमल भी बड़ा हो गया। कमल रोजी-रोटी के लिए दिल्ली आ गया। इस बीच, रामभरोसे ने अमेरिका के साथ सिविलियन न्यूक्लियर डील करते हुए भी देखा। साथ ही उन्हें ये भी एहसास होने लगा कि जिस सरकार को उन्होंने चुना, वो किस तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है। तब उन्होंने इसके खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी तमाम आंदोलनों में शिरकत की।
2014 से बदल गया देश का नजरिया
उन्होंने बताया कि रामभरोने ने अपने जीवन में काफी कुछ देखा। देश के हर पहलु से वह वाकिफ हैं। हालांकि, 2014 में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी चाहत हर किसी को थी। तब देश में ऐसी सरकार आई, जैसी खुद रामभरोसे और देश की करोड़ो जनता चाहती थी। सौभाग्य से उस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मैं ही निभा रहा था। तब देश को एक आशा कि किरण दिखाई दी। उसी वक्त रामभरोसे के बेटे कमल के घर आशा और किरण का जन्म हुआ। कुछ समय बाद इनके भाई अजय का भी जन्म हुआ।
आशा और किरण दस साल के होने को हैं। उन्हें देखकर रामभरोसे जी को सुकून होता है। वह यह देख पा रहे हैं कि कैसे जनधन योजना के माध्यम से उन्हें और उनके परिवार को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है। जो कर्ज पहले उन्हें महाजन से लेना पड़ता था, वही कर्ज अब उन्हें बैंक से मिलता है और मामूली ब्याज पर। उनकी मां और बहन इलाज के अभाव में मर गई थी, लेकिन आज ब्लॉक लेवल पर सीएचसी-पीएचसी बन चुके हैं। उनकी मां को चूल्हे पर खाना बनाने के चलते लंग्स कैंसर हुआ था, लेकिन आज प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत देश की करोड़ों मां को गैस-चूल्हा दिया जा रहा है।
रामभरोसे को अब तसल्ली, उनके पोते-पोतियां देश का स्वर्णिम भविष्य देख रहे
रक्षामंत्री ने आगे देश में तेजी से हो रहे विकास की कहानी भी बताई। कहा कि रामभरोसे अब फूले नहीं समाते हैं। वह सोचते हैं कि एक उनका बचपन था, जब उन्होंने देश की 500 से ज्यादा रियासतों को एक होते देखा था और आज उनके पोते-पोतियां बड़ी हो रहीं हैं तो वह जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म होते देख रहे हैं। रामभरोसे जी का हृदय यह देखकर भर जाता है कि वह अपने अराध्य प्रभु श्रीराम के मंदिर बनने का सपना देख रहे थे, आज उनके पोते-पोतियां ये साकार होते हुए देख रहे हैं। इतना ही नहीं, कई धार्मिक स्थलों के बढ़ते हुए भी देखा।
कोरोना को भी मात दिया, देश का गौरव बढ़ा
रक्षामंत्री की कहानी में कोरोना के दौर का भी जिक्र था। उन्होंने कहा, रामभरोसे ने अपने जीवन का सबसे भयावह कोरोना संक्रमण महामारी भी देखा। जब पूरी दुनिया इससे जूझ रही थी, तब कम संसाधनों के बीच भी हमारे देश के वैज्ञानिकों ने कैसे वैक्सीन बना दिया। कैसे देश की सरकार ने 200 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगवा दिया। कैसे दूसरे देशों को भी भारत ने मदद की।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया। बोले, उन्होंने कहा था कि मैं 100 पैसा ऊपर से भेजता हूं और लोगों तक 15 पैसे ही पहुंचता है। लेकिन अब रामभरोसे जी को इस बात की तसल्ली है कि आज अगर 100 पैसा केंद्र सरकार की तरफ से भेजा जाता है तो पूरा 100 पैसा डीबीटी के माध्यम से जनता को मिलता है।
रक्षामंत्री ने आगे देश में तेजी से हो रहे विकास की कहानी भी बताई। कहा कि रामभरोसे अब फूले नहीं समाते हैं। वह सोचते हैं कि एक उनका बचपन था, जब उन्होंने देश की 500 से ज्यादा रियासतों को एक होते देखा था और आज उनके पोते-पोतियां बड़ी हो रहीं हैं तो वह जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म होते देख रहे हैं। रामभरोसे जी का हृदय यह देखकर भर जाता है कि वह अपने अराध्य प्रभु श्रीराम के मंदिर बनने का सपना देख रहे थे, आज उनके पोते-पोतियां ये साकार होते हुए देख रहे हैं। इतना ही नहीं, कई धार्मिक स्थलों के बढ़ते हुए भी देखा।
कोरोना को भी मात दिया, देश का गौरव बढ़ा
रक्षामंत्री की कहानी में कोरोना के दौर का भी जिक्र था। उन्होंने कहा, रामभरोसे ने अपने जीवन का सबसे भयावह कोरोना संक्रमण महामारी भी देखा। जब पूरी दुनिया इससे जूझ रही थी, तब कम संसाधनों के बीच भी हमारे देश के वैज्ञानिकों ने कैसे वैक्सीन बना दिया। कैसे देश की सरकार ने 200 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगवा दिया। कैसे दूसरे देशों को भी भारत ने मदद की।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया। बोले, उन्होंने कहा था कि मैं 100 पैसा ऊपर से भेजता हूं और लोगों तक 15 पैसे ही पहुंचता है। लेकिन अब रामभरोसे जी को इस बात की तसल्ली है कि आज अगर 100 पैसा केंद्र सरकार की तरफ से भेजा जाता है तो पूरा 100 पैसा डीबीटी के माध्यम से जनता को मिलता है।
देश ने कबूतर छोड़ने से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक को देखा
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि रामभरोसे जी ने देश को कबूतर छोड़ने से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक करते हुए देखा। उन्होंने अपने जीवन में अनेक परिवर्तन देखे हैं। उन्होंने देखा कि कैसे पहले के मुकाबले अब देश तेजी से तरक्की करने लगा है। जिन मुश्किलों से उन्होंने अपना बचपन और युवा अवस्था गुजारा, आज वह सब खत्म हो चुका है। आज उनके पोते और पोतियां कितनी खुश हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'रामभरोसे जी जैसे करोड़ों लोग ये अनुभव करने लगे हैं कि देश की प्रगति अब रामभरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। अब देश की प्रगति हमें पुरुषार्थ से खुद करनी होगी। 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। मॉर्गन स्टेनली ने तो यह तक कह दिया है कि 2027 तक भारत शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होंगे।'
रक्षामंत्री ने कहा, 'रामभरोसे के पोते जिस स्कूल में जा रहे हैं, वह समानता का एक उदाहरण है। वहां धर्म, जाति के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। यह स्वर्णिम भारत की तस्वीर पेश करता है। आज आशा, किरण और अजय को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होता है। अब इन्हें सच बताया जा रहा है कि भारत कमजोर लोगों की धरती नहीं है। आज ये बच्चे गुमनाम नायकों के बारे में भी जानते हैं।'
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि रामभरोसे जी ने देश को कबूतर छोड़ने से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक करते हुए देखा। उन्होंने अपने जीवन में अनेक परिवर्तन देखे हैं। उन्होंने देखा कि कैसे पहले के मुकाबले अब देश तेजी से तरक्की करने लगा है। जिन मुश्किलों से उन्होंने अपना बचपन और युवा अवस्था गुजारा, आज वह सब खत्म हो चुका है। आज उनके पोते और पोतियां कितनी खुश हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'रामभरोसे जी जैसे करोड़ों लोग ये अनुभव करने लगे हैं कि देश की प्रगति अब रामभरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। अब देश की प्रगति हमें पुरुषार्थ से खुद करनी होगी। 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। मॉर्गन स्टेनली ने तो यह तक कह दिया है कि 2027 तक भारत शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होंगे।'
रक्षामंत्री ने कहा, 'रामभरोसे के पोते जिस स्कूल में जा रहे हैं, वह समानता का एक उदाहरण है। वहां धर्म, जाति के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। यह स्वर्णिम भारत की तस्वीर पेश करता है। आज आशा, किरण और अजय को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होता है। अब इन्हें सच बताया जा रहा है कि भारत कमजोर लोगों की धरती नहीं है। आज ये बच्चे गुमनाम नायकों के बारे में भी जानते हैं।'