Amar Ujala Samvad: 'छोटे शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं को निखार रहा अमर उजाला फाउंडेशन', ये बोले विशेषज्ञ
Amar Ujala Samvad: प्रबल घोषाल ने कहा अपने अनुभव के आधार पर वे कह सकते हैं कि देश के सुदूर इलाकों में जागरूकता का अभाव है। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड काफी मददगार योजना है। हालांकि, पूरे देश की आबादी के 10 फीसद लोग भी बमुश्किल इससे जुड़े हैं।
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अमर उजाला संवाद 2023 के जम्मू संस्करण में स्वास्थ्य के मुद्दे प्रबल घोषाल और डॉ सुचिन बजाज ने अपनी राय रखी। उन्होंने देश में 'स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की राह' विषय पर अपने विचार साझा किए। डॉ सुचिन बजाज ने बताया कि 75 साल पहले अमर उजाला की शुरुआत हुई। सामाजिक बराबरी, जीवन स्तर में सुधार, सामाजिक जागरुकता और संवाद को अमर उजाला ने हमेशा प्राथमिकता दी है। नई पीढ़ी भी इसे आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर का मुद्दा हमेशा हमारी प्राथमिकता में रहा है। अमर उजाला फाउंडेशन हमेशा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा रहा। टीयर टू शहरों में अस्पतालों की स्थिति और हेल्थ केयर सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को देखते हुए चुनौती काफी बड़ी थी। गरीबों और ग्रामीण इलाकों का ध्यान रखते हुए अच्छे डॉक्टरों की उपलब्धता को मिशन बनाकर काम किया।
अमर उजाला की सामाजिक भूमिका पर डॉ सुचिन बजाज ने कहा, वे खुद एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में रहने वाले परिचित लोग मदद की आस रखते थे, क्योंकि परिवार में वे पहले डॉक्टर थे। उन्होंने कहा, मरीजों की हालत देखकर तकलीफ होती थी। पांच-छह घंटों तक ट्रैवल करने के बाद लोग आते थे। लोगों को कर्ज के बोझ तले दबता भी देखा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में अच्छे डॉक्टर मिलते हैं, लेकिन देश के आंतरिक इलाकों और गांवों-कस्बों में हालात बेहद दयनीय हैं। अमर उजाला की पहल पर उजाला सिग्नल्स जैसे अस्पताल की शुरुआत की गई। देश का आर्थिक पहलू और डॉक्टरों के पलायन से जुड़े सवाल पर डॉ सुचिन बजाज ने कहा, 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई के दौरान बच्चे इस बात की तैयारी करते हैं कि उसे अगले 15-20 साल भी पढ़ाई करनी है। उस समय युवाओं के दिमाग में पैसा नहीं होता। छोटे शहरों में बड़े डॉक्टरों के आने का बड़ा अंतर होता है। बड़े शहरों में डॉक्टरों की भरमार है, ऐसे में प्राथमिकता छोटे शहरों को मिलनी चाहिए। डॉक्टरों के जीवन का उद्देश्य पैसा नहीं होता।
प्रबल घोषाल ने कहा, अपने अनुभव के आधार पर वे कह सकते हैं कि देश के सुदूर इलाकों में जागरूकता का अभाव है। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड काफी मददगार योजना है। हालांकि, पूरे देश की आबादी के 10 फीसद लोग भी बमुश्किल इससे जुड़े हैं। ये तस्वीर दिखाती है कि जागरूकता का काफी अभाव है। लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर के लोगों में बीमारियों की स्थिति और संक्रामक रोगों से जुड़े सवाल पर घोषाल ने कहा, श्रीनगर में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है। यहां आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज होता है। स्वास्थ्य लाभ लेने के प्रति लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है।
एक सवाल पर डॉ सुचिन बजाज ने कहा, आपात स्थिति में छोटे शहरों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने की सलाह मिलती है। कई बार ऐसा होता है कि चंद घंटे और मिनट के अभाव में मरीजों को बचाने में सफलता नहीं मिलती। अमर उजाला संवाद के मंच पर एक संस्था के तौर पर जम्मू कश्मीर के साथ मजबूत होते रिश्तों और अखबार के साथ-साथ उजाला सिग्नस की उल्लेखनीय भूमिका को रेखांकित किया गया।