{"_id":"6463825b3537982d4a069bd5","slug":"amar-ujala-poll-will-the-issue-of-old-pension-scheme-prove-decisive-in-the-elections-know-what-people-said-2023-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Poll: चुनावों में निर्णायक साबित होगा पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा? जानें अमर उजाला के पोल में क्या बोले लोग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Poll: चुनावों में निर्णायक साबित होगा पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा? जानें अमर उजाला के पोल में क्या बोले लोग
Tue, 16 May 2023 06:49 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 16 May 2023 06:49 PM IST
सार
अमर उजाला ने अपने ऑनलाइन पोल में लोगों से पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर सवाल किया। हमने पाठकों से पूछा था कि पुरानी पेंशन के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी बाजी मार ली है।
विज्ञापन
पुरानी पेंशन योजना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बीते कुछ महीनों में कांग्रेस ने पुरानी पेंशन स्कीम के मुद्दे को लागू करने के वादे के साथ दो बड़े चुनावों- हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में जीत हासिल की है। दरअसल, कांग्रेस के ओल्ड पेंशन स्कीम मॉडल से करीब पांच लाख सरकारी कर्मचारियों और उन पर निर्भर 40 लाख लोगों को फायदा होने की संभावना है।
विज्ञापन
माना जा रहा है कि इस वर्ग के लोगों ने कर्नाटक में ओपीएस के चलते कांग्रेस का साथ दिया। इतना ही नहीं, सरकारी कर्मचारी वर्ग से जुड़े लोगों ने भी इस योजना के फायदे को देखते हुए कर्नाटक में कांग्रेस को ही वोट दिया, जबकि भाजपा को इस वर्ग से नाराजगी का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
ऐसे में अमर उजाला ने अपने ऑनलाइन पोल में लोगों से पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर सवाल किया। हमने पाठकों से पूछा था कि पुरानी पेंशन के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी बाजी मार ली है। क्या आपको लगता है कि आने वाले चुनावों में भी यह निर्णायक मुद्दा साबित होगा?
विज्ञापन
इस मुद्दे को लेकर अमर उजाला वेबसाइट पर अब तक 1 लाख 17 हजार से ज्यादा लोग वोट कर चुके हैं। पोल में शामिल होने वाले कुल लोगों में से 1 लाख 17 हजार से ज्यादा (करीब 99 फीसदी) लोगों ने कहा है कि आगामी चुनावों में पुरानी पेंशन स्कीम का मुद्दा निर्णायक साबित होगा। दूसरी तरफ महज 910 लोगों (करीब 0.77 फीसदी) लोगों ने अगले चुनावों में इस मुद्दे के बेअसर रहने की बात कही है।
क्या थी पुरानी पेंशन योजना?
केंद्र और राज्यों में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन अंतिम आहरित मूल वेतन का 50 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। उदाहरण के लिए, अगर किसी रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी का सेवा में रहते हुए मासिक मूल वेतन 10,000 रुपये था, तो उसे 5,000 रुपये की पेंशन का आश्वासन दिया जाता था। इसके अलावा सरकार द्वारा सेवारत कर्मचारियों के लिए घोषित महंगाई भत्ते या डीए में बढ़ोतरी का असर भी पेंशनभोगियों के मासिक भुगतान पर पड़ता था। मतलब भत्ते और डीए का लाभ पेंशनभोगियों को भी मिलने लगता था।
अभी तक सरकार द्वारा भुगतान की जाने वाली न्यूनतम पेंशन नौ हजार रुपये प्रति माह है और अधिकतम 62,500 रुपये है। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को 2004 में बंद कर दिया गया था। इसके बदले नई पेंशन योजना लागू कर दी गई।
पुरानी पेंशन योजना से सरकार को क्या दिक्कत थी?
पिछले तीन दशकों में केंद्र और राज्यों के लिए पेंशन देनदारियां कई गुना बढ़ गई। 1990-91 में केंद्र का पेंशन बिल 3,272 करोड़ रुपये था और सभी राज्यों के लिए कुल व्यय 3,131 करोड़ रुपये था। 2020-21 तक, केंद्र का बिल 58 गुना बढ़कर 1,90,886 करोड़ रुपये हो गया। राज्यों के लिए यह 125 गुना बढ़कर 3,86,001 करोड़ रुपये हो गया। पढ़ें पूरी खबर