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अमर उजाला पोल: पीरियड्स से घृणा रखने की सोच कुंठा का प्रतीक है
Wed, 16 Jan 2019 08:03 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 16 Jan 2019 08:03 PM IST
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हमारे समाज में लड़कियों के पीरियड्स से जुड़ी कई तरह की घटिया धारणाएं हैं। कई जगहों पर पीरियड्स के दौरान लड़कियों-औरतों को अशुद्ध माना जाता है और उन्हें घर से बाहर रखने की प्रथा है। कुछ इसी तरह की एक घटिया प्रथा ने तमिलनाडु के अनिकडु गांव में एक 12 वर्षीय बच्ची की जान ले ली।
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हुआ यूं कि 12 साल की विजया, जो सातवीं क्लास में पढ़ती थी। उसे 12 नवंबर को पहली बार पीरियड्स आए। जिसके बाद घर में उसकी एंट्री बंद हो गई। विजया के घरवालों ने उसे पास ही बनी एक छोटी सी झोपड़ी में रहने को कहा। प्रथा के मुताबिक, विजया को 16 दिनों तक उसी झोपड़ी में रहना था और वो भी अकेले।
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चक्रवात के कारण आई तेज हवाओं से पास ही में एक नारियल का पेड़ उखड़ गया और वो सीधे झोपड़ी के ऊपर जा गिरा, जिसमें विजया सो रही थी। उसके नीचे दबकर बच्ची की जान चली गई। सुबह जब लोगों ने देखा तो उसकी लाश पेड़ और झोपड़ी के नीचे दबी हुई थी, उसकी सांसें नहीं रही थीं। वो अब इस दुनिया से जा चुकी थी।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था ' क्या आपको लगता है कि पीरियड्स से घृणा रखने की सोच कुंठा का प्रतीक है?
पोल के जवाब में हमें कुल 4699 वोट मिले। इनमें 78.88 फीसदी (2581 वोट) पाठकों ने माना कि कि पीरियड्स से घृणा रखने की सोच कुंठा का प्रतीक है, जबकि 21.12 फीसदी (691 वोट) पाठकों ने माना कि कि पीरियड्स से घृणा रखने की सोच कुंठा का प्रतीक नहीं है।