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Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Exclusive Ground Report of Gajwel Telangana Election- 2023

Ground Report@Gajwel: पहले केसीआर के साथ थे अब केसीआर के विरोध में इटाला, लोगों में सीएम को लेकर नाराजगी

Tue, 28 Nov 2023 05:35 AM IST
जलज मिश्रा नितिन यादव, हैदराबाद
नितिन यादव, हैदराबाद Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 28 Nov 2023 05:35 AM IST
सार

दोनों की दोस्ती तब टूटी जब प्रदेश के मंत्री रहे इटाला राजेंद्र बीआरएस छोड़ 2021 में भाजपा में चले गए। इटाला के दलबदल से हुजूराबाद में हुए उपचुनाव में राजेंद्र को हराने के लिए बीआरएस प्रमुख केसीआर ने पूरी ताकत लगा दी।

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Amar Ujala Exclusive Ground Report of Gajwel Telangana Election- 2023
Telangana Election 2023 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

हैदराबाद से लगभग 50  किमी दूर। मुख्य हाईवे से थोड़ा अंदर बसा यह शहर और विधानसभा क्षेत्र बड़ी सियासी लड़ाई में फंसा है। लड़ाई है ऐसे दो बड़े दिग्गजों के बीच जो कभी एक दूसरे के साथी थे। एकदूसरे को आगे बढ़ाने में अपनी मेहनत और पसीना लगाया था। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव यानी केसीआर और भाजपा के इटाला राजेंद्र एकदूसरे को शिकस्त देने के लिए गजवेल में हर तरह का प्रयास कर रहे हैं। नितिन यादव की रिपोर्ट…
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दोनों की दोस्ती तब टूटी जब प्रदेश के मंत्री रहे इटाला राजेंद्र बीआरएस छोड़ 2021 में भाजपा में चले गए। इटाला के दलबदल से हुजूराबाद में हुए उपचुनाव में राजेंद्र को हराने के लिए बीआरएस प्रमुख केसीआर ने पूरी ताकत लगा दी। बीआरएस ने 100 विधायक मैदान में उतार दिए। फिर भी इटाला राजेंद्र ने लड़ाई जीत ली और भाजपा का प्रमुख चेहरा बनकर प्रदेश में उभरे।
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अब केसीआर को इटाला राजेंद्र ने गजवेल में चुनौती दी है। दोनों ही दूसरी सीटों से भी लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री परंपरागत गजवेल सीट के साथ ही कामारेड्डी से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वही इटाला हुजूराबाद से भी ताल ठोक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एक दौर में पार्टी को बढ़ाने में केसीआर के साथ ही इटाला का भी काफी रोल रहा है। पार्टी में मुख्यमंत्री के बेटे और बेटी के बढ़ते कद के कारण इटाला राजेंद्र अलग होने पर मजबूर हुए।
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मुस्लिमों का वोट यहां भी अहम
क्षेत्र में दस से 15 प्रतिशत तक मुस्लिम वोटर हैं। कुल वोट लगभग दो लाख 60 हजार हैं। कांग्रेस से नरसारेड्डी मैदान में हैं। पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटर बीआरएस के साथ रहे। यहां भी कुछ मुद्दों पर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। गजवेल वक्फ बोर्ड मुतलवल्ली खादर पाशा का कहना है कि वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जे नहीं हटवाए गए और कई अन्य मुद्दों पर केसीआर की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। हालांकि वह मानते हैं कि भाजपा के आक्रामक प्रचार के सामने यहां केसीआर ही विकल्प बचते हैं।

दोनों ओर खूब हो रही है जोर आजमाइश
रात के लगभग साढ़े नौ बजे दामरकुंडा गांव में इटाला राजेंद्र का स्वागत हो रहा है। रात होने के बावजूद गांव में भारी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग मौजूद हैं। पीएम मोदी के नाम के नारे भी खूब लग रहे हैं। गांव के युवा नागेंद्र का कहना है कि केसीआर को दो बार जिता लिया है, लेकिन क्षेत्र का वैसा विकास कर नहीं पाए। गजवेल में अंबेडकर चौक पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले हरीश का कहना है कि इस बार मुकाबला बहुत कड़ा है। इसी बाजार में फुटवियर की दुकान चलाने वाले मो. इन्साफ का कहना है कि यहां पर नया अस्पताल, नया बस अड्डा बना है। शिक्षा के संस्थान भी खुले हैं। जब इतना विकास हो तो फिर किसी और को क्यों चुनना। इलेक्ट्रिक सामान के दुकानदार करण का भी कहना है कि गजवेल की सीट सीएम से जुड़ी होने के कारण यहां पर विकास तो काफी हुआ है। वहीं नवित यादव का कहना है कि भाजपा ने पिछड़ा मुख्यमंत्री देने की बात कही है, इस कारण पिछड़ी जातियों का कुछ झुकाव भाजपा की ओर भी है।


फार्म हाउस पर भी राजनीति
गजवेल शहर के बाहर केसीआर का फार्म हाउस है। यह फार्म हाउस सत्ता के केंद्र के रूप में चर्चित रहा है। कहा जाता था कि प्रदेश के अहम फैसले यहीं से होते थे और केसीआर अक्सर यहां पर उपलब्ध रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण में केसीआर को फार्म हाउस सीएम कह कर तंज किया।
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