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Alpassi Arattu: केरल में अल्पासी आराट्टू जुलूस के लिए रुकी उड़ानें, पांच घंटे बंद रहा तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट
Thu, 30 Oct 2025 10:43 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 30 Oct 2025 10:43 PM IST
सार
केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के ‘अल्पासी आराट्टू’ जुलूस के लिए गुरुवार को पांच घंटे तक उड़ानें रोकी गईं। राजपरिवार की अगुवाई में जुलूस एयरपोर्ट रनवे से होकर समुद्र तट तक पहुंचा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुरुवार को पांच घंटे तक उड़ान सेवाएं रोक दी गईं। वजह थी श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का ‘अल्पासी आराट्टू’ धार्मिक जुलूस, जो सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इस दौरान एयरपोर्ट पूरी तरह बंद रहा और सभी उड़ानें अस्थायी रूप से रोकी गईं।
अधिकारियों के मुताबिक उड़ानें शाम 4.45 बजे से रात नौ बजे तक रोकी गईं। जुलूस के मंदिर लौटने के बाद एयरपोर्ट को साफ कर फिर से उड़ानें शुरू की गईं। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का यह जुलूस साल में दो बार निकलता है। एक बार अल्पासी उत्सव (अक्तूबर-नवंबर) में और दूसरी बार पैंकुनी उत्सव (मार्च-अप्रैल) में। परंपरा के मुताबिक यह जुलूस एयरपोर्ट के रनवे से होकर समुद्र तट तक जाता है।
राजपरिवार की अगुवाई में निकला भव्य जुलूस
पूर्व त्रावणकोर राजघराने के मुखिया श्री मूलम तिरुनाल राम वर्मा ने इस जुलूस का नेतृत्व किया। वे पारंपरिक हरे रेशमी टोपी, पन्ने का हार और धार्मिक तलवार के साथ आगे चल रहे थे। उनके साथ पुलिसकर्मियों की एक टुकड़ी, सजाए गए हाथी, बैंड-बाजा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। शाम करीब पांच बजे मंदिर से शुरू हुआ यह जुलूस एयरपोर्ट के रनवे को पार करते हुए शंकुमुखम बीच पहुंचा, जहां समुद्र स्नान की रस्म पूरी की गई।
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ये भी पढ़ें- PM मोदी ने एकता नगर में ई-बसों को दिखाई हरी झंडी, 1220 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास किया
एयरपोर्ट से साझा की गई तस्वीरें
तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (TIAL) ने फेसबुक पर जुलूस की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भक्ति की लय और श्रद्धा की शांति के बीच, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का पवित्र आराट्टू जुलूस हमारे रनवे से गुजरा। यह वह क्षण है जब परंपरा और आधुनिकता एक साथ उड़ान भरते हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि जुलूस के लौटने के बाद रनवे को साफ किया गया और रात नौ बजे से सामान्य परिचालन बहाल कर दिया गया।
साल 1932 से कायम परंपरा
इतिहासकारों के अनुसार, यह धार्मिक परंपरा कई शताब्दियों पुरानी है और 1932 में एयरपोर्ट की स्थापना के बाद भी जारी है। जब हवाई अड्डा बनाया गया था, तब त्रावणकोर के तत्कालीन महाराजा श्री चित्र तिरुनाल ने स्पष्ट किया था कि एयरपोर्ट वर्ष में 363 दिन जनता के लिए और दो दिन भगवान पद्मनाभ के लिए रहेगा। यही परंपरा आज भी निभाई जा रही है। यहां तक कि अदाणी समूह द्वारा एयरपोर्ट संभालने के बाद भी यह परंपरा बरकरार है। एयरपोर्ट प्रशासन हर साल दो बार NOTAM जारी करता है ताकि पायलटों और एयरलाइनों को इस अस्थायी बंदी की जानकारी रहे।
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अधिकारियों के मुताबिक उड़ानें शाम 4.45 बजे से रात नौ बजे तक रोकी गईं। जुलूस के मंदिर लौटने के बाद एयरपोर्ट को साफ कर फिर से उड़ानें शुरू की गईं। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का यह जुलूस साल में दो बार निकलता है। एक बार अल्पासी उत्सव (अक्तूबर-नवंबर) में और दूसरी बार पैंकुनी उत्सव (मार्च-अप्रैल) में। परंपरा के मुताबिक यह जुलूस एयरपोर्ट के रनवे से होकर समुद्र तट तक जाता है।
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राजपरिवार की अगुवाई में निकला भव्य जुलूस
पूर्व त्रावणकोर राजघराने के मुखिया श्री मूलम तिरुनाल राम वर्मा ने इस जुलूस का नेतृत्व किया। वे पारंपरिक हरे रेशमी टोपी, पन्ने का हार और धार्मिक तलवार के साथ आगे चल रहे थे। उनके साथ पुलिसकर्मियों की एक टुकड़ी, सजाए गए हाथी, बैंड-बाजा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। शाम करीब पांच बजे मंदिर से शुरू हुआ यह जुलूस एयरपोर्ट के रनवे को पार करते हुए शंकुमुखम बीच पहुंचा, जहां समुद्र स्नान की रस्म पूरी की गई।
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एयरपोर्ट से साझा की गई तस्वीरें
तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (TIAL) ने फेसबुक पर जुलूस की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भक्ति की लय और श्रद्धा की शांति के बीच, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का पवित्र आराट्टू जुलूस हमारे रनवे से गुजरा। यह वह क्षण है जब परंपरा और आधुनिकता एक साथ उड़ान भरते हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि जुलूस के लौटने के बाद रनवे को साफ किया गया और रात नौ बजे से सामान्य परिचालन बहाल कर दिया गया।
साल 1932 से कायम परंपरा
इतिहासकारों के अनुसार, यह धार्मिक परंपरा कई शताब्दियों पुरानी है और 1932 में एयरपोर्ट की स्थापना के बाद भी जारी है। जब हवाई अड्डा बनाया गया था, तब त्रावणकोर के तत्कालीन महाराजा श्री चित्र तिरुनाल ने स्पष्ट किया था कि एयरपोर्ट वर्ष में 363 दिन जनता के लिए और दो दिन भगवान पद्मनाभ के लिए रहेगा। यही परंपरा आज भी निभाई जा रही है। यहां तक कि अदाणी समूह द्वारा एयरपोर्ट संभालने के बाद भी यह परंपरा बरकरार है। एयरपोर्ट प्रशासन हर साल दो बार NOTAM जारी करता है ताकि पायलटों और एयरलाइनों को इस अस्थायी बंदी की जानकारी रहे।