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आलोक वर्मा दर्ज कर सकते हैं नई एफआईआर, तबादले पर ले सकते हैं फैसले
Wed, 09 Jan 2019 06:54 AM IST
संदीप भट्ट
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 09 Jan 2019 06:54 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निदेशक की कुर्सी पर बहाल हुए आलोक वर्मा का भविष्य दरअसल प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वाली सलेक्ट कमेटी तय करेगी। अब वर्मा समेत सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक हफ्ते के भीतर बैठने वाली उसी कमेटी पर होगी। हालांकि वर्मा इस बीच नए एफआईआर दर्ज करने और तबादले करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। वर्मा 31 जनवरी को रिटायर करने वाले हैं।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सलेक्ट कमेटी के फैसले तक वर्मा को बतौर निदेशक किसी भी नीतिगत फैसले से दूर रहने को कहा है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक एफआईआर दर्ज करना और तबादले करना रुटीन मामला है ना कि नीतिगत फैसला। हालांकि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का सीबीआई पर परीवेक्षिय अधिकार (सुपरवायजरी पावर) वर्मा के इन फैसलों पर अड़ंगा लगा सकती है। सीबीआई के एक पूर्व निदेशक ने बताया कि वर्मा के लिए गए किसी भी फैसले पर सुप्रीम कोर्ट और सीवीसी की तलवार लटकती रहेगी। क्यूंकि कई रुटीन फैसले को नीतिगत फैसला मानकर चुनौती दी जा सकती है। सीबीआई में चर्चा है कि वर्मा के बचे हुए कार्यकाल में ऐजेंसी में कई नए समीकरण बन सकते हैं।
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सूत्रों के मुताबिक एम नागेश्वर राव के बतौर निदेशक अल्प अवधि में वर्मा के कई नजदीकी अधिकारियों का तबादला किया गया। अब वर्मा उन्हें वापस बहाल कर सकते हैं। इसकेअलावा विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दायर एफआईआर की जांच में तेजी आ सकती है। गौरतलब है कि वर्मा और अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आपसी आरोप प्रत्यारोपों के चलते ही 23 अक्टूबर को सरकार ने दोनों को उनके सभी अधिकार छीन कर छुट्टी पर भेज दिया था। मीट व्यापारी मोईन कुरैशी के मामले में घूस लेने केआरोप में अस्थाना केखिलाफ सीबीआई ने ही एफआईआर दर्ज किया है। लेकिन वर्मा के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं बल्कि अस्थाना की ओर से सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखी शिकायत है। इसके अलावा विजय माल्या जैसे मामले में चल रही जांच में अस्थाना के अधिकारों पर कैंची चल सकती है। माल्या मामले की जांच अस्थाना की अगुवाई में ही चल रही है।
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क्या है सलेक्ट कमेटी- लोकपाल कानून के तहत प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोक सभा में विपक्षी दल या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता की कमेटी सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति संबंधि फैसला करती है। कानून के मुताबिक सीबीआई निदेशक की नियुक्ति दो साल की निश्चित अवधि केलिए होती है। इससे पहले सरकार या कोई भी संवैधानिक संस्था निदेशक को हटा नहीं सकती। विपरीत हालात में निदेशक के साथ क्या करना है इसका फैसला भी नियुक्ति करने वाली सलेक्ट कमेटी ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को हटाए जाने के सीवीसी की अनुशंसा पर लिए गए सरकार के फैसले को दरकिनार करते हुए इसी सलेक्ट कमेटी की याद दिलाई है।