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गड़बड़झाले का आरोप: बिना एग्रीमेंट निजी दूरसंचार कंपनी को 189 करोड़ दिए, जूनियर ने फाइल रोकी तो सीनियर ने दी मंजूरी 

Sun, 18 Jul 2021 08:33 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 18 Jul 2021 08:33 PM IST
सार

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कैग ने भी इस पर अंगुली उठाई है। 
 

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Allegations of fraud: Payment of 189 crores to private telecom company without agreement, Junior stopped the file, then the senior officer approved
Pawan Kheda (File Photo) - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी, 'माइटी' में एक निजी दूरसंचार कंपनी को बिना एग्रीमेंट के ही 189 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। इस राशि को जारी करने से पहले दो अधिकारियों के बीच इसे लेकर बहस हुई थी कि इस कंपनी के साथ कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है, इसलिए मोबिलाइजेशन एडवांस जारी नहीं किया जा सकता। यह नियमों के खिलाफ है। 

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को प्रेस वार्ता में कहा कि देश के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में इस मामले को लेकर अंगुली उठाई गई है। उन्होंने दावा किया कि एक अधिकारी ने जब यह पैसा जारी करने से मना कर दिया तो दूसरे अधिकारी, जो एक महिला हैं और एडमिनिस्ट्रेटर ऑफ यूएसओएफ के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने अपने जूनियर अधिकारी की नोटिंग को ओवररूल करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया है। पवन खेड़ा के मुताबिक, सीनियर अधिकारी ने कहा कि भले ही एग्रीमेंट नहीं हुआ हो, ये पैसा यानी 30 प्रतिशत राशि '189 करोड़ रुपये' रिलीज कर दी जाए। 
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रविशंकर प्रसाद को हटाने की बड़ी वजह यह तो नहीं : खेड़ा
कांग्रेस नेता खेड़ा ने सवाल किया है कि क्या पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद को कैबिनेट से हटाने के पीछे यही एक बड़ी वजह तो नहीं है। खेड़ा ने कहा, क्या सिर्फ रविशंकर प्रसाद को हटाने से काम हो जाएगा, क्या यह काफी है। इन तमाम सवालों के उत्तर चाहिए। इसके लिए एक हाई लेवल, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे घपला करार दिया है। खेड़ा ने कहा कि लोग यह बात जानना चाहते हैं कि एडमिनिस्ट्रेटर ऑफ यूएसओएफ ने अपने जूनियर अधिकारी की बात को क्यों नजरअंदाज कर दिया। उन्हें ये शब्द क्यों कहने पड़े कि प्रधानमंत्री ने 21 सितंबर को इसका उद्घाटन किया है।

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कैग की रिपोर्ट में खुलासा

सीएजी की लगभग 122 पेज वाली प्रिलिमिनरी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। सीएजी ने सवाल उठाया है कि जुलाई 2019 से लेकर दिसंबर 2020 तक फाइबर केबल के मेंटेनेंस और ऑपरेशन के लिए 'माइटी' द्वारा सीएससी को करोड़ों रुपये दे दिए गए। सीएजी के मुताबिक, एक फंड होता है। उसमें तमाम प्राइवेट प्लेयर को कॉन्ट्रिब्यूट करना पडता है। इस फंड को 'यूएसओएफ' यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लीगेशन फंड, कहा जाता है। यूएसओएफ के बारे में सीएजी लिखता है कि सीएससी को करोड़ों रुपये दे दिए गए। सीएससी कंपनी द्वारा विलंब से प्रोजेक्ट पूरा किया जाए तो या वह सही ढंग से काम न करे तो यूएसओएफ उस पर पेनल्टी भी नहीं लगा सकता। वजह, एग्रीमेंट में पेनल्टी का प्रावधान ही नहीं है। 

बकौल पवन खेड़ा, ये सीएजी की टिप्पणी है। सेवा को लेकर कोई अनुबंध नहीं किया गया है। अगर किसी गांव या शहर से इंटरनेट न चलने की कोई शिकायत आ जाए तो वह शिकायत कब तक दूर होगी, इसकी कोई तय सीमा नहीं रखी गई है। ये त्रिपक्षीय करार मंत्रालय और सीएससी के बीच हुआ था।  

दूरसंचार विभाग पिछले डेढ़ दो सालों से लगातार निजी कंपनियों को बिना टेंडर के ठेके दे रहा था। सीएससी, वाईफाई चौपाल सर्विस इंडिया प्राइवेट लि. के जरिए विभाग करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के लिए यूएसओएफ फंड से पैसा लेता था। इसके बाद सीएससी वाईफाई चौपाल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए उस पैसे को प्राइवेट कंपनियों को, वह भी बिना टेंडर किए बांट देता था। 

कंपनी के पास सिर्फ एक पत्र था, जिसमें काम शुरू करने की बात थी

पवन खेड़ा ने बताया कि जनवरी, 2021 तक यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लीगेशन फंड में 1,12,650 करोड़ रुपये जमा थे। कुछ ही दिन में 57,433 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। बिहार का उदाहरण देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, सीएससी एक प्राइवेट कंपनी है। दूरसंचार विभाग के चौथे फ्लोर से ऑपरेट होती है। सितंबर 2020 में एक प्राइवेट कंपनी के साथ मंत्रालय, एसपीवी बनाता है। एसपीवी के जरिए प्रपोजल्स मंगाए जाते हैं और पैसे मंजूर कर दिए जाते हैं। सीएससी ने 13 सितंबर, 2020 को मंत्रालय को फाइबर  टू होम, का एक प्रपोजल दिया। इसके तहत बिहार के हर गांव में वाई फाई कनेक्शन दिए जाएंगे। ये 630 करोड़ रुपए का प्रपोजल था। इसे पायलट प्रोजेक्ट भी नहीं कहा जा सकता। 19 सितंबर 2020 को डिजिटल कम्यूनिकेशन कमीशन ने इस प्रपोजल को मंजूरी दे दी। 15 अक्तूबर, 2020 को यूएसओएफ ने, नोमिनेशन बेसिस पर बिना किसी टेंडर के इस सीएससी को काम शुरू करने का लैटर दे दिया। खास बात है कि उस कंपनी के साथ कोई एग्रीमेंट भी नहीं हुआ था। 23 नवंबर, 2020 को सीएससी कंपनी ने एक ईमेल भेजा। इसमें यूएसओएफ को मोबिलाइजेशन एडवांस देने की बात की गई थी। प्रोजेक्ट राशि का 30 प्रतिशत मोबिलाइजेशन एडवांस होता है। कंपनी ने कोई एग्रीमेंट नहीं किया। उसके पास सिर्फ एक पत्र है, जिसमें लिखा है आप काम शुरू कीजिए। कंपनी ने इसके दम पर 189 करोड़ रुपये मोबिलाइजेशन एडवांस मांग लिया।

पवन खेड़ा ने कहा, हम प्रधानमंत्री से यह जानना चाहते हैं, सीएजी की ड्रॉफ्ट रिपोर्ट, प्रिलिमिनरी रिपोर्ट पर वे क्या कार्रवाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि एक मंत्री को मंत्रालय से बाहर कर देना, क्या उससे काम हो जाएगा। इस कंपनी ने भारतीय जनता पार्टी को किसी भी दिशा में, किसी भी तरीके से चंदा दिया है या नहीं दिया है, बताएं।

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