इलाहाबाद हाईकोर्ट को मिला देश का पहला डिजिटाइजेशन सेंटर
- मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने सेंटर फॉर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी का शनिवार को उद्घाटन किया।
- इस केंद्र की स्थापना में लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत आई है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेंटर फॉर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी का शनिवार को उद्घाटन किया। इस मौके पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड सहित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण, कई उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्ति तथा हाईकोर्ट के सभी जज, अवकाश प्राप्त जज तथा शहर के विशिष्ट और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
हाईकोर्ट सूचना तकनीकी केंद्र देश में अपनी तरह का पहला केंद्र है, जो न्यायपालिका के डिजिटाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दो हजार वर्गमीटर के क्षेत्रफल में बने केंद्र की स्थापना में लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत आई है। केंद्र में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ फाइलों को डिजिटल फार्म में तब्दील किया जाएगा।
हाईकोर्ट द्वारा अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर 13 मार्च को भव्य समारोह का आयोजन किया गया है। इसके पहले चरण में इनफॉरर्मेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर शनिवार दिन में ही इलाहाबाद पहुंच गए। उद्घाटन कार्यक्रम शाम साढ़े छह बजे आयोजित किया गया।
मुख्य न्यायाधीश के पहुंचने पर उनकी अगवानी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड ने की। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद जस्टिस ठाकुर ने सबसे पहले केंद्र के प्रवेश द्वारा के समीप बने शिलापट्ट का अनावरण किया। इसके बाद पास ही लगे कंप्यूटर को ऑन कर ‘सेसक्यूसेनटेनियल ऑफ इलाहाबाद हाईकोर्ट’ वेबसाइट का उद्घाटन किया।
दो मंजिला इमारत को भव्य रूप से सजाया
हाईकोर्ट मीडिएशन सेंटर के बगल में स्थित सूचना तकनीकी केंद्र की नवनिर्मित दो मंजिला इमारत को भव्य रूप से सजाया गया था। केंद्र के बेसमेंट में करीब 30 लाख फाइलें स्टोर करने की व्यवस्था है। भूमितल पर दो वीडियो कांफ्रेंस हॉल, डाटा सेंटर, न्यायिक अधिकारियों के केबिन, ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के केबिन तथा तकनीकी टीम के लिए स्थान बनाया गया है।
डिजिटाइजेशन का कार्य प्रथम तल पर किया जाएगा। पूरी बिल्डिंग में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कर्मचारियों का प्रवेश बायोमैट्रिक कार्ड के जरिए ही संभव होगा। केंद्र में उच्च क्षमता के बुक टू नेट स्कैनर और 288 टीबी क्षमता के सैन स्टोरेज सर्वर लगाए गए हैं, जो प्रतिदिन 35000 फाइलों को स्कैनकर उपलब्ध करा देगा।
एक वर्ष में 50 करोड़ पेज स्कैन किए जाएंगे। सेंटर हाईकोर्ट द्वारा निस्तारित मुकदमों की फाइलों को ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने मुकदमे से संबंधित सूचना एक क्लिक में प्राप्त कर सके।
इच्छाशक्ति ने नामुमकिन को बनाया मुमकिन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेंटर फॉर इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की स्थापना हाईकोर्ट प्रशासन के लिए आसान लक्ष्य नहीं रहा, मगर अपनी इच्छाशक्ति के बूते इस नामुमकिन जैसे दिखने वाले कार्य को मुमकिन बना दिया गया।
चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड के अक्तूबर 2013 में चार्ज लेने के बाद यहां फाइलों के रख-रखाव और स्थान की कमी की भीषण समस्या को देखते हुए डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू कराया।
जिस भवन में सेंटर बना है उसके बेसमेंट में पांच फिट सीवेज का पानी भरा था, जो सेंटर के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए देश भर से बुलाए गए इंजीनियरों को समाधान खोजने में महीनों लग गए। देश का पहला डिजिटाइजेशन सेंटर शुरू करने की राह में और भी कई चुनौतियां थीं।
इसके बाद बिल्डिंग के निर्माण उपकरण लगाने और सुरक्षा के प्रबंध का कार्य पूरा हो सका। केंद्र के निर्माण में जस्टिस दिलीप गुप्ता, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और और ई-कोर्ट प्रोजेक्ट देख रहे जस्टिस पीके श्रीवास्तव की समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।