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Fertilisers: 'वन नेशन-वन फर्टिलाइजर' का एलान, मंडाविया बोले- सिंगल ब्रांड के तहत बिकेंगे सब्सिडी वाले उर्वरक
Sat, 27 Aug 2022 09:28 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 27 Aug 2022 09:28 PM IST
सार
रसायन और उर्वरक ममंत्री मनसुख मंडाविया ने उर्वरक सब्सिडी योजना 'प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना' (पीएमबीजेपी) के तहत नई पहल 'वन नेशन वन फर्टिलाइजर' की घोषणा की।
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मनसुख मंडाविया
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
यूरिया और डीएएफ सहित सभी सब्सिडी वाले उर्वरक अक्टूबर से सिंगल ब्रांड 'भारत' के तहत बेचे जाएंगे, जिसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी के पोषक तत्वों की समय पर उलब्धता सुनिश्चित करना और माल ढुलाई सब्सिडी को कम करना है।
वन नेशन-वन फर्टिलाइजर की घोषणा
रसायन और उर्वरक ममंत्री मनसुख मंडाविया ने उर्वरक सब्सिडी योजना 'प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना' (पीएमबीजेपी) के तहत नई पहल 'वन नेशन वन फर्टिलाइजर' की घोषणा की।
पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए साल के अंत तक का समय
मंडाविया ने कहा कि कंपनियों को केवल अपना नाम, ब्रांड, उनके बैग के एक तिहाई स्थान पर लोगो और अन्य प्रासंगिक उत्पाद की जानकारी प्रदर्शित करने की अनुमति है। शेष दो तिहाई हिस्से पर भारत ब्रांड और पीएमबीजेपी का लोगो दिखाना होगा। कंपनियों को अपना पुराना स्टॉक क्लियर करने के लिए साल के अंत तक का समय दिया गया है।
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सब्सिडी बिल बढ़कर 2.25 लाख करोड़ होने का अनुमान
पिछले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने 1.62 लाख करोड़ रुपये का उर्वरक सब्सिडी बिल वहन किया। पिछले पांच-छह महीनों में वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि देखते हुए सरकार का सब्सिडी बिल चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
मंडाविया ने इस योजना को शुरू करने के पीछे के तर्क के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार यूरिया के खुदरा मूल्य का 80 प्रतिशत, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का 65 प्रतिशत, एनपीके का 55 प्रतिशत और पोटाश के म्यूरेट (एमओपी) के 31 प्रतिशत कीमतों पर सब्सिडी देती है। माल ढुलाई सब्सिडी भी सानाना 6000-9000 करोड़ रुपये की सीमा प्रदान की जाती है।
हालांकि, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुसार देशभर में विभिन्न कंपनियों द्वारा निर्मित उर्वरकों के विनिर्देश समान हैं, उत्पादों का निर्माण और विपणन विभिन्न राज्यों में विभिन्न ब्रांडों के तहत किया जाता है।
माल ढुलाई सब्सिडी का सरकार पर बढ़ रहा बोझ
मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों में उर्वरकों की एक क्रोस-मूवमेंट है, जिससे मिट्टी के पोषक तत्वों के परिवहन में देरी हो रही है और सरकार पर माल ढुलाई सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए सहकारी समीतियों इफको और क्रिबको की उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं लेकिन वे परिवहन के जरिए राजस्थान और मध्यप्रदेश में अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं।
"चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड की राजस्थान में एक विनिर्माण इकाई है लेकिन मध्यप्रदेश में अपने उत्पाद बेचती है। नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड की मध्यप्रदेश में एक इकाई है लेकिन यह उत्तर प्रदेश में बिक्री करती है। कुछ मामलों में देश के पूर्वी क्षेत्र में विपणन के लिए पश्चिमी भारत में उर्वरकों का निर्माण किया जाता है।"
एक ब्रांड पेश करने के पीछ क्या है तर्क
मंडाविया ने कहा, एकल ब्रांड पेश करने के पीछे का पूरा विचार इस क्रॉस मूवमेंट को रोकना है और यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अपने उत्पादों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के नजदीक बेच दे और अनावश्यक परिवहन से बचे।
उन्होंने कहा, "यह पहल उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाएगी और बिना किसी रुकावट के आपूर्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी, उर्वरक आपूर्ति में एकरूपता लाएगी, कंपनियों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करेगी और माल ढुलाई सब्सिडी के बोझ को कम करेगी।"
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वन नेशन-वन फर्टिलाइजर की घोषणा
रसायन और उर्वरक ममंत्री मनसुख मंडाविया ने उर्वरक सब्सिडी योजना 'प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना' (पीएमबीजेपी) के तहत नई पहल 'वन नेशन वन फर्टिलाइजर' की घोषणा की।
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पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए साल के अंत तक का समय
मंडाविया ने कहा कि कंपनियों को केवल अपना नाम, ब्रांड, उनके बैग के एक तिहाई स्थान पर लोगो और अन्य प्रासंगिक उत्पाद की जानकारी प्रदर्शित करने की अनुमति है। शेष दो तिहाई हिस्से पर भारत ब्रांड और पीएमबीजेपी का लोगो दिखाना होगा। कंपनियों को अपना पुराना स्टॉक क्लियर करने के लिए साल के अंत तक का समय दिया गया है।
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सब्सिडी बिल बढ़कर 2.25 लाख करोड़ होने का अनुमान
पिछले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने 1.62 लाख करोड़ रुपये का उर्वरक सब्सिडी बिल वहन किया। पिछले पांच-छह महीनों में वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि देखते हुए सरकार का सब्सिडी बिल चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
मंडाविया ने इस योजना को शुरू करने के पीछे के तर्क के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार यूरिया के खुदरा मूल्य का 80 प्रतिशत, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का 65 प्रतिशत, एनपीके का 55 प्रतिशत और पोटाश के म्यूरेट (एमओपी) के 31 प्रतिशत कीमतों पर सब्सिडी देती है। माल ढुलाई सब्सिडी भी सानाना 6000-9000 करोड़ रुपये की सीमा प्रदान की जाती है।
हालांकि, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुसार देशभर में विभिन्न कंपनियों द्वारा निर्मित उर्वरकों के विनिर्देश समान हैं, उत्पादों का निर्माण और विपणन विभिन्न राज्यों में विभिन्न ब्रांडों के तहत किया जाता है।
माल ढुलाई सब्सिडी का सरकार पर बढ़ रहा बोझ
मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों में उर्वरकों की एक क्रोस-मूवमेंट है, जिससे मिट्टी के पोषक तत्वों के परिवहन में देरी हो रही है और सरकार पर माल ढुलाई सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए सहकारी समीतियों इफको और क्रिबको की उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं लेकिन वे परिवहन के जरिए राजस्थान और मध्यप्रदेश में अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं।
"चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड की राजस्थान में एक विनिर्माण इकाई है लेकिन मध्यप्रदेश में अपने उत्पाद बेचती है। नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड की मध्यप्रदेश में एक इकाई है लेकिन यह उत्तर प्रदेश में बिक्री करती है। कुछ मामलों में देश के पूर्वी क्षेत्र में विपणन के लिए पश्चिमी भारत में उर्वरकों का निर्माण किया जाता है।"
एक ब्रांड पेश करने के पीछ क्या है तर्क
मंडाविया ने कहा, एकल ब्रांड पेश करने के पीछे का पूरा विचार इस क्रॉस मूवमेंट को रोकना है और यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अपने उत्पादों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के नजदीक बेच दे और अनावश्यक परिवहन से बचे।
उन्होंने कहा, "यह पहल उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाएगी और बिना किसी रुकावट के आपूर्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी, उर्वरक आपूर्ति में एकरूपता लाएगी, कंपनियों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करेगी और माल ढुलाई सब्सिडी के बोझ को कम करेगी।"