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शनिवार को खुलेंगे सबरीमाला मंदिर के कपाट, महिलाओं के प्रवेश का अलग दिन तय करने का प्रस्ताव

Thu, 15 Nov 2018 12:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Updated Thu, 15 Nov 2018 12:11 PM IST
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All party meeting called by CM Pinarayi Vijayan to discuss Sabarimala Temple issues

सबरीमाला मंदिर के कपाट 17 नवंबर से दो महीने के लिए खोल दिए जाएंगे। बता दें कि मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लगातार विरोध जारी है। इसी मामले में बातचीत के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया।


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सबरीमाला मंदिर के कपाट 17 नवंबर से दो महीने के लिए खोल दिए जाएंगे। बता दें कि मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लगातार विरोध जारी है। इसी मामले में बातचीत के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कदम नहीं उठा सकती है। हम श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हैं। हम कोर्ट के फैसले को लागू करने को लेकर बाध्य हैं। यह सर्वदलीय बैठक दो महीने तक चलने वाले तीर्थाटन सीजन के लिए मंदिर के 17 नवंबर को खुलने से पहले बुलाई गई थी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में महिलाओं के मंदिर में दर्शन के लिए अलग दिन तय करने का प्रस्ताव रखा गया। 

करीब तीन घंटे चली बैठक को विपक्ष ने ‘स्वांग’ करार दिया। अदालत के आदेश को लागू करने पर अड़े रहने पर कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और भाजपा के प्रतिनिधि इस अहम बातचीत के आखिर में उठकर चले गए। विधानसभा में नेता विपक्ष रमेश चेन्निथला ने कहा कि सरकार अदालत के आदेश को लागू करने के अपने रुख पर अडिग है। वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। विपक्षी दलों ने 22 जनवरी तक शीर्ष अदालत के आदेश के क्रियान्वयन को स्थगित करने की मांग की। इस आदेश के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं पर उसी दिन सुनवाई होनी है। 

विपक्ष की मांग खारिज करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई ने कहा, ‘चूंकि शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर के अपने आदेश पर रोक नहीं लगाई है, ऐसे में आगामी सीजन में सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने के सिवा कोई विकल्प नहीं है। हम कोर्ट के आदेश को लागू करने के लिए बाध्य हैं।’

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने बिना किसी पूर्वाग्रह के यह बैठक बुलाई थी। सरकार अड़ियल नहीं है। लेकिन उसके पास शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने के सिवा कोई विकल्प नहीं है। यदि कल अदालत कोई और निर्णय लेती है तो सरकार उसका पालन करेगी।’ वामपंथी नेता ने कहा कि सरकार सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षा प्रदान करेगी। सरकार बस अदालत के आदेश का पालन कर सकती है और सभी लोगों को यह बात समझनी चाहिए।

बताते चलें कि शीर्ष अदालत के आदेश के बाद पिछले महीने से दो बार यह मंदिर खुला और कुछ महिलाओं ने उसमें प्रवेश की कोशिश की। हालांकि भगवान अयप्पा के भक्तों और विभिन्न हिंदू संगठनों के विरोध के चलते वे मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाईं। इस बीच, मंदिर में प्रतिबंधित आयु (10 से 50 साल) वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का विरोध करते रहे सबरीमाला मंदिर से जुड़े पंडालम शाही परिवार ने कहा कि वह अपने पुराने रुख पर कायम है।

सबरीमाला पर लेखक सुनील को मिली धमकी

प्रख्यात वक्ता, थिंकर और लेखक सुनील पी इलईडोम को सबरीमाला मंदिर विवाद को लेकर धमकी मिली है। कालडी संस्कृति यूनिवर्सिटी के प्रोफेस सुनील के दफ्तर पर भी हमला किया गया। वह भगवान अयप्पा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू को मांग करते रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करने पर उन्हें धमकी दी गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, सीएम पिनराई विजयन ने लेखक के दफ्तर पर हुए हमले की निंदा की। 
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