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All Party Meeting on Manipur: 'एक हफ्ते में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा जाए'; टीएमसी ने की मांग

Sat, 24 Jun 2023 05:24 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 24 Jun 2023 05:24 PM IST
सार

मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने अपना बयान जारी किया है। तृणमूल कांग्रेस ने मांग की है कि एक हफ्ते में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा जाए। 

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All India Trinamool Congress demands that an all party delegation be sent to Manipur
ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। वहीं मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने अपना बयान जारी किया है। सर्वदलीय बैठक को लेकर सूत्रों ने बताया कि टीएमसी ने अपने बयान में केंद्र पर मणिपुर के लोगों की जरूरतों को अनदेखा करने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाने की कोशिश कर रही है।  

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केंद्र कर रहा मणिपुर की अनदेखी
बयान में तृणमूल कांग्रेस ने मांग की है कि एक हफ्ते में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा जाए। केंद्र सरकार ने अब तक इस मामले की अनदेखी की है। अगर वहां शांति और सद्भाव बहाल करना है तो इस मामले पर ध्यान देना होगा। बता दें कि तीन मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से लगभग 120 लोगों की जान चली गई और 3,000 से अधिक लोग घायल हो गए।
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टीएमसी ने कहानी सुनाकर बताई मणिपुर की हालत
बयान में टीएमसी ने एक कहानी सुनाई जिसमें बताया गया कि एक सात साल के बच्चे को हिंसा के दौरान गोली लग गई। उसकी मां और चाची उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जा रही थीं लेकिन उनको रास्ते में जिंदा जला दिया गया। टीएमसी ने कहा कि यह एक कहानी है ऐसी हजारों दिल दहला देने वाली कहानियां हैं। मणिपुर एक खतरनाक स्थिति में है और केंद्र सरकार बुरी तरह विफल रही है।
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लोगों में फैल रहा डर
आगे तृणमूल ने कहा कि जब मणिपुर जलता है, तो असम प्रभावित होता है, मेघालय प्रभावित होता है, पूरा उत्तर-पूर्व प्रभावित होता है। पूरा देश प्रभावित होता है। क्या केंद्र सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाने की कोशिश कर रही है? आगे कहा कि राज्य में निराशा, भय और हताशा की भावना व्याप्त है, लोगों की जान जा रही है, छात्र परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं, मरीज प्रभावित हैं और लोग भय में जी रहे हैं। राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। 4000 से अधिक घरों पर हमला किया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया, 60,000 लोग विस्थापित हो गए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हुए राज्य भर में 50 दिनों से अधिक समय तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। 

मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक में भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह (कांग्रेस), डेरेक ओ ब्रायन (टीएमसी), मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड सिंह (एनपीपी), एम थंबी दुरई (एआईएडीएमके), तिरुचि शिवा (डीएमके) के अलावा पिनाकी मिश्रा (बीजेडी), संजय सिंह (आप), मनोज झा (आरजेडी) और प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना) शामिल हुए।


बैठक में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, नित्यानंद राय और अजय कुमार मिश्रा, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक तपन डेका भी शामिल हुए। विपक्षी दल स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि 50 दिनों के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है। हालांकि अमित शाह ने पिछले महीने चार दिनों के लिए राज्य का दौरा किया था लेकिन इसके बाद भी वहां हिंसा रुकी नहीं है।

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