कुरुक्षेत्र: कमल थामते-थामते रह गए जितिन, अब राजनाथ से करेंगे दो-दो हाथ
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होली तो हो ली, लेकिन चुनावी ठिठोली अपने शबाब पर है। राजनीति के दलदल में दलबदल जोरों पर है और सारे दल उसमें डूब रहे हैं। महाराष्ट्र में अगर कांग्रेस विधायक दल के नेता के बेटे भाजपा का दामन थाम लेते हैं, तो उत्तर प्रदेश में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के भतीजे की पत्नी कांग्रेसी बनकर प्रियंका गांधी का बनारस में स्वागत करती हैं। मध्य प्रदेश में विंध्य क्षेत्र की कांग्रेंस की आदिवासी महिला नेता को भाजपा के कमल की महक भा जाती है तो उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को कांग्रेस के हाथ का साथ मिल जाता है।
ताजा मामला है कांग्रेस के युवा और टीम राहुल के जाने पहचाने चेहरे पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का, जिनके कदम दीनदयाल मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय की तरफ बढ़े ही थे कि कांग्रेसी प्रबंधकों ने उन्हें वापस 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय की तरफ मोड़ दिया। अब खबर आ रही है कि जितिन इस शर्त पर माने हैं कि वह अपनी पुरानी सीट धौरहरा छोड़कर लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से टक्कर लेंगे। जितिन को खुद प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मनाया और उन्हें लखनऊ में राजनाथ सिंह से मुकाबले के लिए तैयार कर लिया।
सूत्रों का कहना है कि जितिन धौरहरा से अपना नाम घोषित होने के बाद से लगातार क्षेत्र में जुटे थे, लेकिन सपा बसपा गठबंधन ने मुंबई के मुस्लिम व्यवसायी अरशद आजमी को मैदान में उतारकर उनका गणित बिगाड़ दिया। तब जितिन ने पड़ोस की दो सीटों खीरी लखीमपुर और सीतापुर में किसी एक सीट से लड़ने की इच्छा जताई, जिसे प्रियंका ने मना कर दिया। इसके बाद खिन्न जितिन ने हाथ की जगह कमल थामने का मन बनाया।
बताया जाता है कि भाजपा ओर उनके बीच संपर्क सूत्र का काम जितिन के ही एक पारिवारिक सदस्य ने किया। भाजपा ने उन्हें अपना टिकट देने का वादा भी कर दिया और शुक्रवार को शाम चार बजे उन्हें भाजपा मुख्यालय में भगवा पटका पहनाने की तैयारी भी हो गई। लेकिन जैसे ही यह खबर मीडिया में आई, तत्काल प्रियंका और ज्योतिरादित्य ने संकट प्रबंधन करके जितिन को बुलाया और उनकी मान मनौव्वल करके उन्हें लखनऊ से चुनाव लड़ने को राजी कर लिया।
आडवाणी हो गए दरकिनार
उधर, टिकटों के बंटवारे की बौछारों ने उनके चेहरे चमका दिए हैं, जिन्हें अपने अपने दलों के टिकट मिल गई तो उनके चेहरे बिना गुलाल के ही लाल हैं जिनके टिकट कट गए हैं। उनमें कुछ दूसरे दरवाजों पर कुंडी खटखटाने लगे हैं तो कुछ मन मसोसकर इस जुगत में हैं कि कैसे जिसे टिकट मिला है उसका इलाज किया जा सके। होली का खुमार अभी उतरा भी नहीं था और रंग व गुलाल ठीक से साफ भी नहीं हुआ कि रात में भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची सामने आ गई।
बुजुर्ग और भाजपा के संस्थापक लाल कृष्ण आडवाणी की इच्छा अनिच्छा की परवाह किए बिना भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का नाम उनके संसदीय वारिस के रूप में घोषित कर दिया गया। यानी शाह अब गांधीनगर से भाजपा के उम्मीदवार होंगे। सूची आने से पहले जब इस तरह की खबर आडवाणी को उनके अपने सूत्रों से लगी होगी तो शायद उन्होंने इसे अपने लाडले रहे नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तरफ से होली का मजाक समझा होगा।
लेकिन सूची आने के बाद उन्हें पता चला कि वो दिन चले गए जब होली पर मजाक होता था, रंग डाला जाता था, पर अब तो होली पर रंग में भंग किया जाता है। कभी अटल के साथ भाजपा की दूसरी धरोहर रहे आडवाणी की इस तरह विदाई से भाजपा की तीसरी धरोहर मुरली मनोहर जोशी भी अपने सियासी भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
बिहार में एनडीए सूची जारी
बिहार में भी एनडीए ने अपनी सूची आखिरकार जारी ही कर दी। भाजपा ने अपने बागी सांसद और कभी अटल अडवाणी के दुलारे रहे शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काट कर उनकी जगह पटना साहिब से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को मैदान में उतार दिया है। वहीं पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरे शाहनवाज हुसैन की सीट समझौते में जनता दल (यू) को देकर भले ही भाजपा नेतृत्व ने उदारता दिखाई हो लेकिन शाहनवाज को किसी दूसरी सीट से भी टिकट न देकर क्या संदेश दिया है यह समझ से परे है।
उधर, बिहार और महाराष्ट्र में आखिरकार यूपीए ने भी अपने गठबंधन बना लिए। बिहार में राजद ने अपनी सीटें घटाकर 20 करने और कांग्रेस समेत सभी सहयोगी दलों के लिए 20 सीटें छोड़कर माकूल जातीय समीकरण बनाने की पुरजोर कोशिश की है। भले ही उत्तर प्रदेश में घोषित 28 उम्मीदवारों में साक्षी महाराज ने अपनी दबंगई से उन्नाव में अपनी टिकट पा ली।
इसी तरह महेश शर्मा, वीके सिंह,सत्यपाल सिंह, संजीव बालियान को भी आखिरकार न नुकुर के बाद मैदान में उतार ही दिया गया, लेकिन कृष्णा राज, अंशुल, रामशंकर कठेरिया जैसों के टिकट इसलिए काट दिए गए कि पार्टी को इनके जीतने का भरोसा नहीं था। जबकि भाजपा का दावा है कि उसे वोट उम्मीदवार के नाम पर नहीं मोदी के चेहरे और शाह की रणनीति पर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ की हार का दर्द
हालांकि महाराष्ट्र, असम, उड़ीसा, कर्नाटक में भी ज्यादातर पुराने चेहरों को फिर मौका दिया गया, लेकिन छत्तीसगढ़ में सभी सीटों पर नए चेहरे उतारने का फैसला लेकर भाजपा नेतृत्व ने जता दिया कि वो विधानसभा चुनावों की हार के दर्द को अभी भूला नहीं है। शुक्रवार को भाजपा के हाथ एक बड़ी कामयाबी तब लगी जब मशहूर क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भाजपा का पटका पहन लिया।
गंभीर को नई दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है, यानी अगर ऐसा हुआ तो मीनाक्षी लेखी का टिकट कटेगा। गंभीर के आने की खबर अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि मीडिया में खबर आई कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख युवा नेता जितिन प्रसाद शाम को भाजपा में शामिल होने अटकलों की खबर की वजह से ही राहुल गांधी ने अपनी बहु प्रतीक्षित प्रेस कांफ्रेंस रद्द कर दी जो पहले सुबह सवा दस बजे होनी थी, फिर एक बजे तक के लिए टाली गई । फिर समय बढ़ाकर दो बजे कर दिया गया।
बाद में राहुल की जगह रणदीप सुरजेवाला ने येदियुरप्पा की कथित डायरी को लेकर भाजपा पर हमला बोला। कांग्रेस में भाजपा के कथित मददगारों में एक नाम और तब जुड़ गया जब राहुल गांधी के करीबी और सलाहकार माने जाने वाले सैम पित्रोदा ने पुलवामा हमले और बालाकोट एयर स्ट्राइक पर ऐसा बयान दे दिया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
मोदी ने पित्रोदा के बयान को पाकिस्तान के नेशनल डे के उत्सव मनाने की शुरुआत बताते हुए पाकिस्तान को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर दिया। पीछे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महासचिव रामगोपाल यादव भी नहीं रहे। उन्होंने पुलवामा को लेकर सीधे कह दिया कि अगर सरकार बदली तो इस मामले में कई बड़े लोग फंसेंगे। रामगोपाल के बयान पर भी भाजपा ने विपक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया।