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नगालैंड शांति समझौते से पहले इलाके में अलर्ट, सुरक्षाबलों की छुट्टियां रद्द

Tue, 29 Oct 2019 04:02 AM IST
देव कश्यप रीता तिवारी, गुवाहाटी
रीता तिवारी, गुवाहाटी Published by: देव कश्यप Updated Tue, 29 Oct 2019 04:02 AM IST
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Alert in area before Peace agreement in Nagaland, central government has said to sign on 31 October
नागालैंड में छात्र संगठनों का विरोध - फोटो : PTI

दो दशक से ज्यादा से नगालैंड में जारी शांति प्रक्रिया आखिरी चरण में पहुंचने के साथ ही इलाके में तनाव भी बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने 31 अक्तूबर तक समझौते पर हस्ताक्षर की बात कही है। इस बीच, सोमवार को केंद्र सरकार और एनएससीएन-आईएम प्रतिनिधियों के बीच फिर वार्ता हुई। इस दौरान अलग झंडे और संविधान सहित कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बात हुई।

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सोमवार को एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और केंद्र की ओर से वार्ताकार तथा नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि के बीच अलग ध्वज और संविधान के मुद्दे का ‘सम्मानजनक’ हल खोजने के संभावित तरीकों पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक अलग झंडे और संविधान की मांग खारिज होने की आशंका से शांति प्रक्रिया की कवायद पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, समझौता होने की स्थिति में ग्रेटर नगालैंड की मांग पर खासकर मणिपुर में भारी तनाव है। नगालैंड और मणिपुर के नगा-बहुल इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर पुलिस व सुरक्षाबलों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

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सात बटालियन रिजर्व में

नगालैंड के पुलिस महानिदेशक टी. जान लांगकुमार ने कहा, पुलिस की सात बटालियन को रिजर्व रखा गया है। दो महीने का राशन और ईंधन जमा कर लिया गया है। मणिपुर के उखरूल जिले में प्रशासन ने संबंधित विभाग को जरूरी सामान जमा करने का निर्देश दिया है। ताकि समझौते के बाद अशांति या प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर खाद्यान्न की दिक्कत न हो। नगालैंड के बाहर सबसे ज्यादा नगा मणिपुर में ही हैं। यहां प्रशासन ने इंफाल पश्चिमी जिले के सभी पुलिसवालों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। एनएससीएन (आई-एम) की पहली मांग नगा-बहुल क्षेत्रों के एकीकरण की है। मणिपुर हमेशा इसके खिलाफ रहा है।

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सभी नगा गुट एकमत नहीं

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कई नगा गुट शांति समझौते से सहमत नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा एनएससीएन का इसाक-मुइवा के रुख को लेकर अनिश्चितता है। अलग झंडे व संविधान की मांग खारिज होने के बाद वह समझौते के लिए तैयार होगा या नहीं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि केंद्र ने नगा-बहुल इलाकों के एकीकरण की मांग पर सहमति जताई है या नहीं।

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