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Kerala : जेसीबी चलाई, अखबार बांटा, संघर्षों पर लिखी किताब तो छा गए लेखन, मिलेगा केरल साहित्य अकादमी से सम्मान

Mon, 24 Jul 2023 05:09 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कन्नूर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कन्नूर। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 24 Jul 2023 05:09 AM IST
सार

रात में जेसीबी चालक और सुबह अखबार के हॉकर अखिल लेखन के लिए केरल साहित्य अकादमी से सम्मानित किए गए हैं।

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Akhil was awarded the Kerala Sahitya Akademi for writing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pexels

विस्तार

रात में जेसीबी चालक और सुबह अखबार के हॉकर अखिल लेखन के लिए केरल साहित्य अकादमी से सम्मानित किए गए हैं। अपने काम और जिंदा रहने की मशक्कत से प्रेरणा लेकर अखिल (28) ने लिखने का प्रेम बनाए रखा और अपने जीवन की कहानी को 'नीलाचदयन' नाम से पुस्तक की शक्ल दी। इस साल पुस्तक का आठवां संस्करण छप रहा है। वहीं, अकादमी ने उन्हें साहित्य के लिए 2020 के सालाना अवार्ड के लिए चुना है।

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परिवार की देखभाल के लिए 12वीं से आगे पढ़ाई न करके कई तरह के कामों में जुटे अखिल कहते हैं, आज मिल रही पहचान के लिए खुशी हो रही है, लेकिन इसकी उन्हें कभी अपेक्षा नहीं थी। वे पढ़ना चाहते थे, लेकिन माता-पिता, भाई व दादी को संभालने के लिए काम करना ज्यादा जरूरी लगा।  
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अकेलापन में डर से मुकाबले को कलम से की दोस्ती
अखिल के मुताबिक, वह छोटी उम्र से अखबार बांटने लगे। कुछ बड़े हुए तो रात में नदी से रेत निकालने वाले श्रमिक भी बने, जहां रोजाना कमाई होती थी। इस दौरान वह कई लोगों, उनके अनुभवों और कहानियों से परिचित होते। कई बार रात में अकेले होते तो इन्हें कहानियों की शक्ल में लिखते। यही कहानियां उन्हें अकेलेपन में सांत्वना और डर से मुकाबले का साहस देतीं। इन्हीं कहानियों से पुस्तक नीलाचदयन का जन्म हुआ।
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पुस्तक ने कोई हलचल नहीं मचाई, फिर अचानक...
अखिल ने बताया कि यह पुस्तक केवल ऑनलाइन बिक्री के लिए जारी हुई थी। राज्य के किसी बुक स्टोर में इसे नहीं रखा गया। इस वजह से इसे लेकर कोई हलचल नहीं हुई। फिर अचानक एक स्क्रीन राइटर बिपिन चंद्रन ने एक फेसबुक पोस्ट पर नीलाचदयन की तारीफ की। लोगों को इसका पता चला, वे स्टोर्स में इसे तलाशने लगे। मांग आई तो प्रकाशन भी होने लगा। इसी का परिणाम है कि आज इसका आठवां संस्करण प्रकाशित हो रहा है।

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