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एससी-एसटी एक्ट में संशोधन मौलिक अधिकारों का हनन, समाज के विकास में ब्रेकर : अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 30 Sep 2018 08:12 PM IST
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कई राज्यों में चुनाव के ठीक पहले एससी/एसटी एक्ट में हुआ संशोधन केंद्र सरकार को लगातार मुश्किल में डाल रहा है। रविवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस एक्ट में हुए संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। सभा के मुताबिक एक नागरिक को दूसरे नागरिक की शिकायत पर बिना तहकीकात किए जेल में डाल देना सीधा-सीधा मूल अधिकारों के हनन का मामला है। अपनी सफाई पेश किए बिना किसी को सीधे जेल में डाल देना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।
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अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के महासचिव आरडी वत्स के मुताबिक भारत का संविधान सभी नागरिकों को एक समान अधिकार देता है। संविधान किसी के साथ जन्म, लिंग या निवास के आधार पर भेदभाव की इजाजत नहीं देता है। लेकिन एससी/एसटी एक्ट में हुआ संशोधन सीधे-सीधे इस अधिकार का उल्लंघन है जहां एक जाति में जन्मे व्यक्ति के कहने मात्र से दूसरे जाति में जन्मे व्यक्ति को जेल में डाल दिया जाता है।
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व्यक्ति को अपना बचाव करने तक का अधिकार नहीं है जो किसी भी संविधान की मूल आत्मा होती है। ऐसे में यह कानून समाज के एक वर्ग को दूसरे के खिलाफ खड़ा करता है। वत्स के मुताबिक केंद्र सरकार को इस कानून को वापस लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करना चाहिए।
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