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महाराष्ट्र की सियासत: चुनाव आयोग से शरद पवार को बड़ा झटका, भतीजे के पक्ष में आया फैसला, अजित गुट ही असली NCP

Tue, 06 Feb 2024 07:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 06 Feb 2024 07:46 PM IST
सार

बीते साल महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर तब हुआ था, जब अजित पवार ने एनसीपी से बगावत कर दी थी। अजित पवार पिछले साल जुलाई में राकांपा के अधिकांश विधायकों के साथ महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना सरकार का समर्थन किया था।

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Ajit Pawar Faction is the real NCP big blow to Sharad Pawar Latest News Update
अजित पवार और शरद पवार। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महाराष्ट्र की सियासत को लेकर बड़ा फैसला आया है। चुनाव आयोग ने अजित पवार वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ही असली एनसीपी करार दिया है। फैसला दिग्गज राजनेता और अजित के चाचा शरद पवार के लिए बड़ा झटका है। जानकारी के मुताबिक, छह महीने से अधिक समय तक चली 10 से अधिक सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने एनसीपी में विवाद का निपटारा किया और अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुट के पक्ष में फैसला सुनाया। अब एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न 'घड़ी' अजित पवार के पास रहेगा।

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फैसले में क्या?
पार्टी का नाम और चिह्न अजित गुट को सौंपते हुए आयोग ने कहा कि फैसला याचिका के पहलू पर गौर करने के बाद किया गया है। पार्टी संविधान के उद्देश्यों की जांच, पार्टी संविधान की जांच के साथ संगठनात्मक और विधायी दोनों में बहुमत की भी समीक्षा करने के बाद हमने अपना फैसला सुनाया है। आयोग ने आगामी राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर विशेष छूट देते हुए शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को अपने राजनीतिक दल के लिए एक नाम का दावा करने और तीन प्राथमिकताएं प्रदान करने के लिए बुधवार दोपहर तक का समय दिया।

एनसीपी का मामला क्या है?
बीते साल महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर तब हुआ था, जब अजित पवार ने एनसीपी से बगावत कर दी थी। अजित पवार पिछले साल जुलाई में राकांपा के अधिकांश विधायकों के साथ महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना सरकार का समर्थन किया था।

पार्टी में फूट के बाद एनसीपी पर अधिकार पर चाचा-भतीजे आमने-सामने आ गए थे। अजित पवार गुट ने चुनाव आयोग में हलफनामा दायर किया। वहीं, शरद पवार खेमे ने भी चुनाव आयोग में एक कैविएट दायर कर अनुरोध किया कि पार्टी की लड़ाई के संबंध में कोई भी निर्देश पारित करने से पहले उनकी बात सुनी जाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के दस्तावेज जांचें और दलीलें सुनीं।

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