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C-295 Aircraft: एयरबस को मिली सी-295 विमान कार्यक्रम के लिए हरी झंडी, भारत ने किया है 21 हजार करोड़ का समझौता
Thu, 20 Oct 2022 07:14 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 20 Oct 2022 07:14 PM IST
सार
समझौते के तहत एयरबस चार साल के भीतर सेविले, स्पेन में अपनी अंतिम असेंबली लाइन से 'फ्लाई-अवे' स्थिति में पहले 16 विमानों कि डिलीवरी देगा और बाद के 40 विमानों का निर्माण और संयोजन भारत में होगा।
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Airbus
- फोटो : acj.airbus.com
विस्तार
यूरोपीय विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एयरबस ने गुरुवार को कहा कि उसे अपने सी-295 विमान कार्यक्रम के लिए भारतीय नियामक से नियामकीय मंजूरी मिल गई है। एयरबस इस तरह की मंजूरी पाने वाली पहली विदेशी मूल उपकरण निर्माता बन गई है। पिछले साल सितंबर में भारत ने एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ लगभग 21,000 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें भारतीय वायुसेना के पुराने एवरो-748 विमानों को बदलने के लिए 56 सी-295 परिवहन विमान की खरीद की गई, जिसमें पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा भारत में सैन्य विमानों का निर्माण शामिल है।
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40 विमानों का निर्माण और संयोजन भारत में होगा
महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए नियामक अनुमोदन वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGAQA) द्वारा दिया गया। समझौते के तहत एयरबस चार साल के भीतर सेविले, स्पेन में अपनी अंतिम असेंबली लाइन से 'फ्लाई-अवे' स्थिति में पहले 16 विमानों कि डिलीवरी देगा और बाद के 40 विमानों का निर्माण और संयोजन भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (टीएएसएल) द्वारा किया जाएगा। एयरोस्पेस कंपनी ने एक बयान में कहा कि सी-295 विमान के लिए एयरबस डिफेंस एंड स्पेस क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम (QMS) को वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन के लिए भारतीय नियामक प्राधिकरण डीजीएक्यूए से मंजूरी मिल गई है।
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यह पहली बार है जब किसी विदेशी विमान निर्माता के क्यूएमएस को डीजीएक्यूए द्वारा स्वीकृति मिली है। गांधीनगर में डेफएक्सपो के मौके पर आयोजित एक समारोह में डीजीएक्यूए के महानिदेशक संजय चावला द्वारा एयरबस रक्षा और अंतरिक्ष की गुणवत्ता के प्रमुख काजेटन वॉन मेंटजिंगन को अनुमोदन का प्रमाण पत्र सौंपा गया। सी-295 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के लिए एयरबस और डीजीएक्यूए के बीच सहमति एक व्यापक गुणवत्ता आश्वासन रोडमैप का यह एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। मेंट्जिगन ने कहा कि हमने सी-295 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर पार कर लिया है। यह प्रमाणन उस विश्वास को प्रदर्शित करता है जो डीजीएक्यूए एयरबस गुणवत्ता मानकों में रखता है।
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मजबूत और व्यापक रोडमैप की शुरुआत का प्रतीक
अधिकारी ने कहा, यह एक मजबूत और व्यापक रोडमैप की शुरुआत का प्रतीक है जिसे एयरबस ने C295 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के लिए रखा है। यह आत्मानिर्भर भारत की नीति के तहत भारत में सफल विमान निर्माण की नींव होगी। यह प्रमाणन भारत में 40 विमानों के निर्माण के कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें एक पूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का पूर्ण विकास- कई भागों के उत्पादन से लेकर असेंबली, परीक्षण और योग्यता तक, विमान के संपूर्ण जीवनचक्र की डिलीवरी और रखरखाव तक शामिल है।
सी-295 को 71 सैनिकों या 50 पैराट्रूपर्स के सामरिक परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले एक बेहतर विमान के रूप में जाना जाता है, और उन स्थानों पर रसद संचालन के लिए उपयोगी माने जाते हैं जो भारी विमानों के लिए सुलभ नहीं हैं। ये विमान पैराट्रूपर्स और लोड को एयरड्रॉप कर सकता है, और इसका उपयोग हताहत या चिकित्सा निकासी के लिए भी किया जा सकता है। विमान विशेष मिशन के साथ-साथ आपदा प्रतिक्रिया और समुद्री गश्ती मिशन को पूरा करने में सक्षम है।