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EXCLUSIVE: बनारस-लखनऊ से बेहतर है आगरा की हवा, चले आइए
राजीव शर्मा/अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 08 Apr 2016 04:44 AM IST
सार
- यूपीपीसीबी ने 20 शहरों में परीक्षण के बाद जारी की रिपोर्ट
- फरवरी में प्रदेश के 60 स्थानों पर किया गया था परीक्षण
- इलाहाबाद, कानपुर, गाजियाबाद में भी स्थिति ठीक नहीं
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ताजमहल
- फोटो : getty
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी राजधानी लखनऊ को बेहतर बनाने के लिए चाहे जितने जतन कर रहे हों, लेकिन प्रदेश के इन दोनों ही शहरों की हवा ताजनगरी की अपेक्षा ज्यादा खराब है। दोनों शहरों की हवा में न सिर्फ धूल के कण अधिक हैं, बल्कि सल्फर डाई ऑक्साइड (एसओटू) और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (एनओटू) भी आगरा की अपेक्षा ज्यादा है। संगमनगरी इलाहाबाद, कानपुर, गाजियाबाद और फीरोजाबाद की हवा में कम प्रदूषित नहीं है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट हाल ही में जारी की है। नेशनल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के तहत प्रदेश के 20 प्रमुख शहरों के 60 स्थानों पर फरवरी में वायु गुणवत्ता परीक्षण कराया गया। इसके अंतर्गत पर्टिकुलेट मैटर (पीएम-10), एसओटू और एनओटू की मात्रा जांची गई।
अध्ययन के बाद पाया कि पीएम-10 का औसतमान सभी स्थलों पर अधिक पाया गया। जबकि एसओटू की स्थिति समान्य पाई गई। हालांकि वाराणसी, लखनऊ सहित कई शहरों की हवा में इसकी मौजूदगी आगरा की अपेक्षा अधिक रही।
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वाराणसी के जवाहरनगर में 22.1, सिगरा में 22.3, चांदपुर में एसओटू की स्थिति 14.4 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। जबकि लखनऊ के तालकटोरा में 11.6, सराय माली खां में एसओटू की स्थिति 10.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। सबसे अधिक एसओटू गजरौला के इंदिरा चौक (29 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) पर थी। मुरादाबाद के बुद्ध बाजार और गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में भी एसओटू आगरा की अपेक्षा अधिक है।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट हाल ही में जारी की है। नेशनल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के तहत प्रदेश के 20 प्रमुख शहरों के 60 स्थानों पर फरवरी में वायु गुणवत्ता परीक्षण कराया गया। इसके अंतर्गत पर्टिकुलेट मैटर (पीएम-10), एसओटू और एनओटू की मात्रा जांची गई।
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अध्ययन के बाद पाया कि पीएम-10 का औसतमान सभी स्थलों पर अधिक पाया गया। जबकि एसओटू की स्थिति समान्य पाई गई। हालांकि वाराणसी, लखनऊ सहित कई शहरों की हवा में इसकी मौजूदगी आगरा की अपेक्षा अधिक रही।
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वाराणसी के जवाहरनगर में 22.1, सिगरा में 22.3, चांदपुर में एसओटू की स्थिति 14.4 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। जबकि लखनऊ के तालकटोरा में 11.6, सराय माली खां में एसओटू की स्थिति 10.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। सबसे अधिक एसओटू गजरौला के इंदिरा चौक (29 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) पर थी। मुरादाबाद के बुद्ध बाजार और गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में भी एसओटू आगरा की अपेक्षा अधिक है।
क्या है पीएम-10 की स्थिति?
प्रदूषण
- फोटो : pti
वाराणसी के चांदपुर में पीएम-10 की स्थिति 334.5, साकेतनगर में 304.1 व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आसपास 295.2 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। पीएम-10 लखनऊ के तालकटोरा पर 288.8, सराय माली खां पर 286.7 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। कानपुर के रामादेवी क्षेत्र में 331.4, गाजियाबाद के साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 311.8, फीरोजाबाद के सीडीजीआईएसएन मार्ग पर 310, इलाहाबाद के कासिंग महालक्ष्मी टाकीज पर 331 व आलोपीबाग में 309.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। जबकि आगरा के नुनिहाई में पीएम-10 274.4 व बोदला में 198.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था।
एनओटू की स्थिति
मेरठ की हवा में सबसे ज्यादा एनओटू मिली हुई है। यहां के बेगम ब्रिज पर 64.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। गोरखपुर के गीडा में 50.8, इलाहाबाद के कासिंग महालक्ष्मी टाकीज पर 49.5, मुरादाबाद के बुद्धबाजार में 43 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाई गई।
इन शहरों में हुआ परीक्षण
लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, सोनभद्र, गजरौला, गाजियाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद, नोएडा, खुर्जा, मेरठ, फीरोजाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, रायबरेली, मथुरा, बरेली, गोरखपुर, उन्नाव।
बीमार कर देती है दूषित हवा
हवा में घुले पीएम-10 (10 माइक्रोन से कम आकार के कण) काफी नुकसानदेह होते हैं। इंडस्ट्री से निकलने वाले इन कणों की वजह से मुख्य रूप से सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियां घेर सकती हैं। इसके अलावा फेफड़े, लीवर और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एनओटू की स्थिति
मेरठ की हवा में सबसे ज्यादा एनओटू मिली हुई है। यहां के बेगम ब्रिज पर 64.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। गोरखपुर के गीडा में 50.8, इलाहाबाद के कासिंग महालक्ष्मी टाकीज पर 49.5, मुरादाबाद के बुद्धबाजार में 43 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाई गई।
इन शहरों में हुआ परीक्षण
लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, सोनभद्र, गजरौला, गाजियाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद, नोएडा, खुर्जा, मेरठ, फीरोजाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, रायबरेली, मथुरा, बरेली, गोरखपुर, उन्नाव।
बीमार कर देती है दूषित हवा
हवा में घुले पीएम-10 (10 माइक्रोन से कम आकार के कण) काफी नुकसानदेह होते हैं। इंडस्ट्री से निकलने वाले इन कणों की वजह से मुख्य रूप से सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियां घेर सकती हैं। इसके अलावा फेफड़े, लीवर और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।