कोरोना से कई गुना ज्यादा घातक है वायु प्रदूषण, हर साल ले लेता है 88 लाख लोगों की जान

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Oct 2020 05:02 PM IST
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air pollution - फोटो : Amar Ujala (File)

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सार

वायु प्रदूषण से बचना भारी चुनौती, दमा, फेफड़ों की बीमारी के साथ-साथ कैंसर का कारण भी बन जाती है गंदी हवा...

विस्तार

इस समय पूरी दुनिया का ध्यान कोरोना पर लगा हुआ है। लेकिन वायु प्रदूषण कई मायनों में दुनिया के लिए कोरोना से ज्यादा बड़ा खतरा साबित हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पिछले साल की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में केवल वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लगभग 88 लाख लोगों की जान चली जाती है।
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भारत के लिए चिंता की बात है कि वह दुनिया में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण के खतरों और उसके कारण होने वाली मौतों वाले देश में आता है। स्वास्थ्य मानकों पर उच्च गुणवत्ता रखने वाले अमेरिकी और यूरोपीय देशों में भी वायु प्रदूषण भारी संख्या में मौत का कारण बनता है। चीन में प्रति वर्ष औसतन पांच लाख लोगों की जान वायु प्रदूषण के कारण चली जाती है।     

क्या हो सकता है नुकसान

मेट्रो अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण लोगों में सांस लेने की समस्या, दमा के गंभीर स्थिति में पहुंचने की समस्या, फेफड़ों में अनेक बीमारियों की समस्या और हृदय रोग से संबंधित समस्याएं बढ़ सकती हैं। दमा के मरीजों के लिए यह कई बार समय पूर्व मौत का कारण बन सकता है। अगर वायु प्रदूषण में अमोनिया, मीथेन या रेडियोएक्टिव पदार्थ भी शामिल हों तो यह कैंसर का कारण भी बन सकता है। 
 
वायु प्रदूषण फेफड़ों और हृदय से संबंधित होने वाले कैंसर में बड़ा कारक होता है। वायु गुणवत्ता अच्छी न रहने पर लोगों की कार्य क्षमता भी घट जाती है। ज्यादा प्रदूषण होने पर लोगों को किसी काम को करने पर जल्दी थकान लगने, किसी विषय पर ध्यान केंद्रित न कर पाने की समस्या भी बढ़ सकती है।
डॉक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक मास्क का प्रयोग केवल कोरोना से बचने के लिए आवश्यक नहीं है। बल्कि यह बेहतर होगा कि हम घर से बाहर निकलने की स्थिति में इसे हमेशा के लिए अपना लें। सामान्य मास्क या कपड़े के दो-तीन स्तर का मास्क भी हमारे श्वास में हानिकारक प्रदूषणकारी तत्त्वों को जाने से बचाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।     

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक

विभिन्न माध्यमों से निकलने वाला कार्बन डाई ऑक्साइड वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारकों में से एक है। इसके अलावा सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, अमोनिया और कई अन्य हानिकारक गैसें वायु को प्रदूषित करती हैं। सड़क पर चलने वाले पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं का हिस्सा नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड पूरी दुनिया में समय पूर्व मौत का बड़ा कारण बनता है। 
 
इसके अलावा हवा में उड़ने वाले महीन धूल कण भी लोगों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसमें पीएम-2.5 और पीएम 10 को सबसे प्रमुख माना जाता है, जो निर्माण गतिविधियों और रेतीली जमीन से उड़ने वाली हवाओं के कारण हवा में समा जाती हैं। हल्के भार के कारण ये लंबे समय तक हवा में उड़ते रहते हैं और लोगों की नाक के जरिए उनके फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं।
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