लॉकडाउन का असर: दिल्ली में सबसे कम तो कोलकाता में सबसे ज्यादा साफ हुई हवा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Jul 2020 05:17 AM IST
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air pollution - फोटो : social media

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कोरोना वायरस महामारी के चलते देश में लागू लॉकडाउन के दौरान दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और बंगलूरू में 30 से 50 फीसदी तक वायु प्रदूषण कम हुआ। हालांकि कोलकाता सबसे ज्यादा और दिल्ली में हवा सबसे कम साफ हुई। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे एनसीएपी ट्रैक से मिले रुझानों के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है। साथ ही इससे पता चला कि 74 दिन के लॉकडाउन ने क्लीन एयर प्रोग्राम के 2024 तक के लक्ष्य का 95 फीसदी हासिल कर लिया।  
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पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण के बेहतर प्रबंधन के लिए नगरों की कार्ययोजना को रणनीति और रवैये के हिसाब से और भी व्यापक तथा मजबूत बनाने की जरूरत है। रेस्पिाइरर लिविंग साइसेंज और कार्बन कॉपी के शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉकडाउन में देश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण में खासी कमी आई। एनसीएपी ट्रैकर योजना के तहत दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बंगलूरू में पीएम 2.5 और पीएम 10, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, ओजोन, बेंजीन की सांद्रता  की भी अध्ययन की गई।  
इसमें पाया गया कि 25 मार्च से 8 जून के लॉकडाउन के दौरान महानगरों में वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। शहरों में पीएम को 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत कर हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एनसीएपी लागू किया था। पर्यावरण मंत्रालय ने एक साल के दौरान इस सूची 122 शहरों को जोड़ा था। इसमें से 102 शहरों के लिए वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कार्ययोजना को भी विकसित और अनुमोदित किया गया।
चरणवार हुआ बदलाव
मुंबई में पीएम2.5 का स्तर लॉकडाउन के पहले चरण में 20, दूसरे में 19.5, तीसरे में 18.04 और चौथे में 14.4 रहा। कोलकाता में यह स्तर क्रमश: 37.27, 15.68, 17.57 और 15.01 रहा। दिल्ली में यह पहले चरण में 42.06, दूसरे में 46.65, तीसरे में 55.51 और चौथे में 54.02 रहा। वहीं बंगलूरू में 27.9, 23.46, 22.03 ओर 18.2 रहा। औसतन पीएम2.5 का स्तर 28.51 फीसदी रहा जबकि पीएम10 औसतन 67.49 फीसदी रहा।

35 प्रकार के प्रदूषणकारी तत्व दिल्ली की हवा को बनाते हैं जहरीला
हाल ही में कानपुर आईआईटी द्वारा किए शोध में खुलासा हुआ कि तीन तरफ से दिल्ली में 35 प्रकार के प्रदूषणकारी तत्व हवाओं को जहरीला बनाते हैं। हालांकि लॉकडाउन से मिले अनुभव ने साफ कर दिया कि बेहतर वायु प्रदूषण प्रबंधन से यदि हर शहर के लिए एक्शन प्लान बना दिया जाए तो वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है।
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2017 के स्तर को माना गया आधार

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