दमघोंटू हवा: 2019 में दुनियाभर में 18 लाख लोग मौत के मुंह में समा गए, 20 लाख बच्चों को हो गया अस्थमा
रिपोर्ट में पीएम 2.5 पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कहा गया है कि हवा में घुले छोटे धूल के कणों के कारण प्रदूषण फैल रहा है और ह्रदय रोग, श्वसन रोग व फेफड़ों में कैंसर तक हो रहा है।
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हवा में वाकई जहर मिल चुका है। यह जहर धीरे-धीरे हमारी जान ले रहा है। हमारे फेफड़ों, श्वसन तंत्र को खोखला कर रहा है। आंकड़ों को देखा जाए तो 2019 में दुनिया भर में करीब 18 लाख लोगों की मौत जहरीली हवा के कारण हो गई। यह आंकड़े द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 86 प्रतिशत लोग यानी 2.5 बिलियन लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। इसका सीधा आशय यह है कि 2.5 बिलियन लोग अस्वस्थ्य पीएम के सीधे संपर्क में हैं। इसी रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के प्रदूषण के कारण दुनियाभर में 20 लाख बच्चे अस्थमा का शिकार हो गए।
पीएम 2.5 के कारण हुईं 18 लाख मौतें
रिपोर्ट में पीएम 2.5 पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कहा गया है कि यह हवा में घुले छोटे धूल के कणों के कारण प्रदूषण फैल रहा है और ह्रदय रोग, श्वसन रोग व फेफड़ों में कैंसर तक हो रहा है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने वर्ष 2000 से 2019 के बीच 1300 से अधिक शहरों में मृत्यु दर व पीएम 2.5 की जांच की। इसमें सामने आया कि 2000 से 2019 के बीच, पीएम 2.5 की घनत्व में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया की 55 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है।
33 से 84 प्रतिशत हुई मृत्यु दर
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पीएम 2.5 के कारण प्रति एक लाख व्यक्तियों पर मृत्युदर 33 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई थी, जो अब 84 प्रतिशत पहुंच गई है। अध्ययन में कहा गया है कि 2019 तक दुनिया भर में 86 प्रतिशत से अधिक लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी किए गए मानके के अनुसार वाले क्षेत्रों में नहीं रहते हैं। यही कारण है कि जहरीली हवा के कारण 18 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी।