Research: अल्जाइमर के लक्षणों को बढ़ा सकता है वायु प्रदूषण, प्रदूषक कण सांस के जरिये शरीर में करते हैं प्रवेश
शोध के अनुसार मनुष्य में अल्जाइमर रोग एसीटिलकोलीन की कमी से सम्बन्धित होता है। इस रोग में मस्तिष्क कोशिकाएं (न्यूरॉन) नष्ट हो जाती हैं, जिसके कारण प्राथमिक स्मृति, निर्णय एवं तर्क की क्षमता, गति समन्वय एवं पहचाने की क्षमता इत्यादि का ह्रास हो जाता है।
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यातायात संबंधित वायु प्रदूषण अल्जाइमर रोग से संबंधित बीमारियों को बढ़ा सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए प्रदूषक में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम 2.5 को जिम्मेदार माना। ये 2.5 माइक्रोन से कम व्यास के कण हैं और बाल से 40 गुना तक छोटे होते हैं। यह कण लगातार सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते रहते हैं।
शोध के अनुसार मनुष्य में अल्जाइमर रोग एसीटिलकोलीन की कमी से सम्बन्धित होता है। इस रोग में मस्तिष्क कोशिकाएं (न्यूरॉन) नष्ट हो जाती हैं, जिसके कारण प्राथमिक स्मृति, निर्णय एवं तर्क की क्षमता, गति समन्वय एवं पहचाने की क्षमता इत्यादि का ह्रास हो जाता है। ब्रेन सेल्स जिस केमिकल का निर्माण करती हैं उसे एसीटिलकोलीन कहते हैं। जैसे-जैसे ब्रेन सेल्स सिकुड़ती जाती हैं एसीटिलकोलीन के निर्माण की प्रक्रिया कम होती जाती है। यातायात संबंधी वायु प्रदूषण भी इस पर असर डालता है। हालांकि दवाओं के जरिए एसीटिलकोलीन और अन्य केमिकल्स के कम होने की प्रक्रिया को बढ़ाया जाता है। अध्ययन मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि ये परिणाम इस सबूत को जोड़ते हैं कि यातायात से संबंधित वायु प्रदूषण से उत्पन्न सूक्ष्म कण मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक की मात्रा पर असर डालते हैं। मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक का स्तर अधिक होने से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।