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एयर इंडिया हादसा: 24 घंटे बाद भी रवि को नहीं मिली मां और बेटी, बेसुध हालत में अस्पतालों के काट रहे चक्कर
Fri, 13 Jun 2025 07:59 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 13 Jun 2025 07:59 PM IST
सार
गुरुवार दोपहर लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट एआई171) सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से टेक ऑफ कर मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 265 लोगों की मौत हुई है।
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हेल्पडेस्क पर जानकारी लेते पीड़ितों के परिजन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज परिसर में हुए भीषण विमान हादसे के एक दिन बाद भी रवि ठाकोर की हालत विक्षिप्त जैसी हो गई है। हादसे के समय उनकी मां सरला और ढाई साल की बेटी आद्या हॉस्टल की मेस में मौजूद थीं। अब रवि अस्पताल और मेस परिसर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे मेस में जाने नहीं दिया जा रहा है।
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गुरुवार दोपहर लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट एआई171) सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से टेक ऑफ कर मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें दो पायलट और 10 क्रू सदस्य शामिल थे। हादसे में विमान के 241 यात्रियों सहित कुल 265 लोगों की मौत हो गई जिनमें कई जमीन पर मौजूद लोग भी शामिल थे।
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रवि ठाकोर ने बताया कि वह, उनकी पत्नी और पिता बी.जे. मेडिकल कॉलेज की मेस में काम करते हैं और गुरुवार को दोपहर एक बजे के आसपास वे टिफिन सेवा के लिए अस्पताल निकल गए थे, जबकि उनकी मां और बेटी मेस में ही रुक गई थीं।
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रवि बोले - 24 घंटे बीत गए हैं, अब तक कोई पता नहीं
रवि ने शुक्रवार को मीडिया को बताया, मेरी मां वहां खाना बना रही थीं और बेटी उनके साथ थी। जब से हादसा हुआ है, मैं रातभर सिविल और निजी अस्पतालों में तलाश कर चुका हूं। प्रशासन की जारी की गई सूचियों को देख चुका हूं, मगर अब तक मां और बेटी का कोई अता-पता नहीं है।
उन्होंने दुख के साथ कहा, सभी छात्रों के शवों की पहचान हो चुकी है, लेकिन मेरी मां और बेटी का नाम अब भी लापता लोगों की सूची में है। मुझे शक है कि शायद वे हादसे के वक्त नीचे भूतल की ओर सीढ़ियों से चली गई हों। मैं बस चाहता हूं कि अधिकारी मुझे एक बार मेस के आसपास ढूंढने की अनुमति दें, ताकि दिल को थोड़ी तसल्ली मिल सके।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती: आग का गोला आसमान से गिरा
मेस में रोटियां बना रही मीना मिस्त्री नाम की महिला ने बताया, हमें पहले लगा कि गैस सिलेंडर फटा है, लेकिन जब आसमान से आग का एक बड़ा गोला गिरते देखा, तो सब कुछ समझ में आ गया। हम जान बचाने के लिए दौड़ पड़े, अपने मोबाइल और चाबियां तक वहीं छोड़ दीं। एक अन्य महिला कर्मचारी नीमाबेन निगम ने कहा, हम 30 साल से डॉक्टर्स और छात्रों के लिए खाना बना रहे हैं। जब आग की लपटें देखीं, तो किसी की जान की परवाह नहीं की बस जान बचाने के लिए भागे।
मृतकों में छात्र, डॉक्टर की पत्नी और कई आम नागरिक
पुलिस ने बताया कि हादसे में मरने वालों में चार एमबीबीएस छात्र और एक डॉक्टर की पत्नी शामिल हैं। हादसे के समय अधिकांश छात्र डाइनिंग हॉल में लंच कर रहे थे, जहां विमान आ गिरा।