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सुप्रीम कोर्ट: रक्त चढ़ाने से वायु सेना अधिकारी को एचआईवी, 1.54 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश

Wed, 27 Sep 2023 05:35 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 27 Sep 2023 05:35 AM IST
सार

रक्त चढ़ाने के दौरान एक वायु सेना अधिकारी के एचआईवी से संक्रमित होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1.54 करोड़ रुपये का मुवावजा देने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने वायु सेना और थल सेना को संयुक्त रूप से चिकित्सीय लापरवाही के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

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Air Force officer infected with HIV due to blood transfusion, Supreme Court orders compensation Rs 1.54 crore
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रक्त चढ़ाने के दौरान एक वायु सेना अधिकारी के एचआईवी से संक्रमित होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1.54 करोड़ रुपये का मुवावजा देने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने वायु सेना और थल सेना को संयुक्त रूप से चिकित्सीय लापरवाही के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के दौरान ड्यूटी पर बीमार पड़ने पर रक्त चढ़ाने के दौरान वायु सेना अधिकारी एचआईवी से संक्रमित हो गया था।

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जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने वायु सेना (नियोक्ता) से छह सप्ताह के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान करने के किया कहा है। पीठ ने कहा है कि वायु सेना, थल सेना से मुआवजे की आधी राशि मांगने के लिए स्वतंत्र है। पीठ ने कहा है कि दिव्यांगता पेंशन से संबंधित सभी बकाया राशि छह सप्ताह के भीतर वितरित कर दी जानी चाहिए। पीठ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। एनसीडीआरसी ने प्रतिवादी की ओर से हुई चिकित्सा लापरवाही के कारण अपीलकर्ता के मुआवजे के दावे को नकार दिया था।
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एचआईवी अधिनियम 2017 के तहत सरकार, अदालतों के लिए निर्देश जारी : सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में न सिर्फ विशिष्ट मामले को संबोधित किया, बल्कि एचआईवी अधिनियम, 2017 के ढांचे के तहत सरकार, अदालतों और अर्ध-न्यायिक निकायों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। सभी को अधिनियम की धारा 34 के प्रावधान के अनुपालन के लिए सक्रिय उपाय करने के लिए कहा गया है। धारा 34 एड्स से पीड़ित सभी व्यक्तियों के मामलों को प्राथमिकता देती है। पीठ ने कहा, सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इससे संबंधित जानकारी संकलित करेंगे और उचित रूप से प्रभावित व्यक्तियों की पहचान को अज्ञात करते हुए जानकारी एकत्र करने के तरीके विकसित करेंगे और धारा 34(2) का अनुपालन भी करेंगे। 
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सशस्त्र बल कर्मियों के जीवन की रक्षा करना अथॉरिटी का कर्तव्य
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल कर्मियों की गरिमा और भलाई को बनाए रखने के सर्वोपरि महत्व पर जोर देते हुए कहा, लोग काफी उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ सशस्त्र बलों में शामिल होते हैं। सशस्त्र बलों के पदाधिकारियों समेत सभी राज्य अथॉरिटी पर एक समान कर्तव्य होता है कि सुरक्षा के उच्चतम मानक बनाए रखा जाए, जिसमें शारीरिक और मानसिक कल्याण भी शामिल है।

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