फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Air Force in favour of Buy Global Make in India route for its USD 20 billion 114 fighter jet deal news in Hindi

रक्षा-सुरक्षा: 20 अरब डॉलर के 114 लड़ाकू विमान सौदे के लिए वायु सेना 'बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया' रास्ते के पक्ष में

Thu, 21 Apr 2022 08:01 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 21 Apr 2022 08:01 PM IST
सार

भारतीय वायु सेना ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर इसमें शामिल होने वाली कंपनियों से विचार भी मांगे हैं और उनमें से अधिकांश ने केवल बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया का रास्ता अपनाने की ही बात कही है।

विज्ञापन
Air Force in favour of Buy Global Make in India route for its USD 20 billion 114 fighter jet deal news in Hindi
तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : भारतीय वायु सेना

विस्तार

114 मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों (एमआरएफए) के उत्पादन के लिए 20 अरब डॉलर से अधिक राशि के समझौते के लिए भारतीय वायु सेना इन विमानों का निर्माण भारत में ही करने की नीति अपना सकती है। इसके लिए वह रणनीतिक भागीदारी नीति को लेकर 'बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया' (खरीद दुनिया भर से और निर्माण भारत में) के रास्ते को प्राथमिकता देगी। 

विज्ञापन


'बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तहत आने वाली रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में उपलब्ध कराई गई खरीद प्रक्रिया की एक श्रेणी है, जो विदेशी हथियार प्रणालियों की खरीद और 'मेक इन इंडिया' के तहत देश में ही निर्माण के कार्य को आसान बनाने का काम करती है।
विज्ञापन


समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी सूत्रों ने कहा कि स्वदेश में निर्मित एलसीए (हल्के युद्धक विमान) तेजस और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट के साथ 114 एमआरएफए प्रोजेक्ट की भी वायु सेना को उत्तरी और पश्चिमी विरोधियों का मुकाबला करने के लिए जरूरत होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि हम बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया रास्ते को अपनाना पसंद करेंगे और इस कार्यक्रम में जिन वेंडरों के शामिल होने की उम्मीद है वो भी इसे बेहतर मानते हैं। इस कार्यक्रम में एफ-18, एफ-15 और एफ-21 समेत तीन अमेरिकी विमान, रूस का मिग-35, सुखोई-35 व फ्रांसीसी राफेल, स्वीडन का साब ग्रिपे और यूरोफाइटर टायफून विमान भी शामिल हो सकते हैं। 

भारतीय वायु सेना ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर इन कंपनियों से विचार भी मांगे हैं और उनमें से अधिकांश ने केवल बाई ग्लोबल मेक इन इंडिया का रास्ता अपनाने की ही बात कही है। सूत्रों ने बताया कि वायु सेना ने इस प्रोजेक्ट पर सरकार से भी निर्देश मांगे हैं और पूछा है कि कब वह आगे के काम के लिए रक्षा मंत्रालय से क्लीयरेंस पाने के लिए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा सकती है।


सूत्रों ने कहा कि राफेल युद्धक विमान की दो स्क्वाड्रन पूरी तरह काम कर रही हैं। अब तक फ्रांस 35 राफेल विमानों की आपूर्ति कर चुका है और केवल एक विमान की डिलिवरी ही बाकी है। सूत्रों ने बताया कि सूत्रों ने कहा कि दो राफेल स्क्वाड्रन ने लद्दाख के उत्तरी क्षेत्र में चीन की ओर से विवाद शुरू होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed