IAF: 'पड़ोस में सुरक्षित माहौल नहीं, हाइब्रिड जंग के लिए रहें तैयार', वायुसेना प्रमुख ने क्यों दी ऐसी चेतावनी,
भारतीय वायु सेना प्रमुख ने कहा कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध का असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। पूरा विश्व आर्थिक मंदी की चपेट में आता दिख रहा है। कई छोटे-छोटे देश पहले से ही मुद्रास्फीति के कारण राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का शिकार हो चुके हैं।
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हमारे पड़ोसी देशों में सुरक्षा का आदर्श वातावरण नहीं है। ऐसे में हमें हाईब्रिड युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी ने मंगलवार को ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों में यह देखते हुए कि देश को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में हाइब्रिड युद्धों में माहिर होना बड़ी चुनौती है, देश को इस तरह के युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। ले राजधानी दिल्ली में इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव में बोल रहे थे।
इस कॉन्क्लेव में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध का असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। पूरा विश्व आर्थिक मंदी की चपेट में आता दिख रहा है। कई छोटे-छोटे देश पहले से ही मुद्रास्फीति के कारण राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का शिकार हो चुके हैं। इस माहौल में भी हमारी अर्थव्यवस्था ने एक मजबूत सुधार दिखाया है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पड़ोस में सुरक्षा का आदर्श वातावरण नहीं है। ऐसे में हमारी आर्थिक प्रगति की छाया घरेलू सैन्य क्षमताओं में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तीव्र आर्थिक विकास ने देशों को सैन्य प्रौद्योगिकी और संबद्ध अनुसंधान और विकास में भारी निवेश करने की अनुमति दी है। अगल-अलग पावर केंद्रो द्वारा आर्थिक, तकनीकी और सैन्य क्षेत्रों में कमजोर स्थानों पर अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
वायुसेना प्रमुख ने आगे कहा कि भारत जिम्मेदारी के साथ स्थिरता, समावेशिता, आर्थिक विकास और सुरक्षा के उद्देश्यों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान के राजनीतिक माहौल को देखते हुए भारतीय वायु सेना के लिए पारंपरिक, उप-पारंपरिक और गैर-पारंपरिक डोमेन में अपनी क्षमताओं को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
हालात पर चेताया
- हमारे दुश्मन कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं बढ़ा चुके हैं, जो हमारे खिलाफ उपयोग हो सकती हैं। जरूरी नहीं कि यह युद्ध में हो, शांतिकाल में भी हो सकता है।
- युद्ध से जुड़ी जिन नई तकनीकों, प्लेटफॉर्म, हथियार, प्रणालियों और नीतियों पर इस समय विश्व में काम हो रहा है, वे मौजूदा तकनीकों व हथियारों को कम उपयोगी बना सकते हैं, बल्कि बेकार भी कर सकते हैं।
- कई शक्ति केंद्र इस समय सक्रिय हैं जो आर्थिक, तकनीकी और सैन्य मामलों में पैदा हुए खाली क्षेत्रों को कब्जा चाहते हैं, अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटे हैं।
ये दिए सुझाव
- नये खतरों व चुनौतियों का जवाब देने के लिए दुश्मनों पर तकनीकी उत्कृष्टता हासिल करनी होगी।
- भारत जिम्मेदार शक्ति है, लेकिन मौजूदा हालात में खासतौर पर वायुसेना की पारंपरिक, गैर पारंपरिक और सह-पारंपरिक क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
- विभिन्न प्लेटफॉर्म, सेंसर, हथियार, नेटवर्किंग सबसे अहम हैं, इनमें भविष्य की क्षमताएं बढ़ाने के लिए घरेलू शोध, विकास और उत्पादन बढ़ाना होगा।
सेना प्रमुख बोले- पूर्वी लद्दाख से मिला हर वक्त तैयार रहने का सबक, बुनियादी ढांचे में करना होगा सुधार
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध से हर वक्त उच्च स्तर की तैयारी रखने और बुनियादी ढांचे में सुधार करने का सबक मिला। सेना प्रमुख ने ‘इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव’ में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तरी सीमा के साथ अरुणाचल में भी बुनियादी ढांचे को सुधारना होगा।जनरल पांडे ने कहा, गोगरा-हॉट स्प्रिंग में पीपी-15 से सैनिकों के हटने के बावजूद गतिरोध वाले दो बिंदु बचे हैं। उन्होंने कहा, मुझे यकीन है कि हम इनका भी समाधान निकाल लेंगे। सेना प्रमुख ने बताया, जम्मू-कश्मीर में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख में वायुसेना से मिली मदद की सराहना भी की।