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जानना है जरूरी: कोरोना के इलाज के लिए एम्स और आईसीएमआर के नए दिशा-निर्देश
Sun, 25 Apr 2021 08:08 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sun, 25 Apr 2021 08:08 AM IST
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कोरोना के नए लक्षण
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस के हल्के लक्षण
यह करें
डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें अगर
इलाज के लिए यह कर सकते हैं-
ज्यादा जोखिम वाले मरीज
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- हल्का बुखार, पर सांस लेने में दिक्कत नहीं और श्वास नलिका के ऊपरी हिस्से में संक्रमण के लक्षण
यह करें
- घर में आइसोलेट करें
- दूरी बनाए रखें, इंडोर हों तब भी मास्क पहनें। हाथ बार-बार धोएं।
- पानी व अन्य तरल लगातार पिलाते रहे, मल्टीविटामिन लें।
- डॉक्टर के लगातार संपर्क में रहें।
- शरीर के तापमान व ऑक्सीजन स्तर पर लगातार निगरानी रखें।
डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें अगर
- सांस लेने में दिक्कत हो
- बहुत तेज बुखार या खांसी हो जो 5 दिन से ज्यादा चले
- अगर हाई रिस्क वाले मरीज हों
इलाज के लिए यह कर सकते हैं-
- आइनरमेक्टिन की 200 एमसीसी की गोलियां 3 दिन लें सकते हैं। गर्भवती या स्तनपान करवाने वाली मां इस न लें।
- खांसी व बुखार के लक्षण हों तो ड्राई पाउडर इनहेलर या मीटर्ड डोज इनहेलर से 800 एमसीजी की इनहेलेशन बडसोनाइड 5 दिन लें।
ज्यादा जोखिम वाले मरीज
- जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है
- लो हाइपरटेंशन या अन्य रोगों से ग्रस्त हों। जो लोग डाइबिटीज या इम्युनो कम्प्रोमाइज्ड हालत में हैं।
- जो किडनी या लिवर की बीमारी से जुझ रहे हैं
- मोटापे से पीड़ित हैं
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कोरोना वायरस के मध्यम लक्षण
- सांस की गति प्रति मिनट 24 से कम हो, सांस में दिक्कत हो और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा 90 से 93 फीसदी हो।
- वार्ड में भर्ती करें
ऑक्सीजन सपोर्ट
- ऑक्सीजन 92 से 96 फीसदी तक लाएं
- नॉन रीब्रीदिंग फेस मास्क से ऑक्सीजन दें
- प्रोनिंग यानी पेट के बल लेटकर ऑक्सीजन स्तर बढ़ाएं, हर दो घंटे में पोजिशन बदलें।
बुखार के लिए दवा और इम्युनिटी संबंधी उपचार
- इंजेक्शन मिथाइलप्रीडेनिसोलोन 0.5 से 1 एमजी मरीज के प्रति किलोग्राम वजन के अनुसार दो डोज में बांटकर या डेक्सोमेथासन की बराबर डोज 5 से 10 दिन दे सकते हैं। मरीज की हालत स्थिर हो तो गोली दें।
खून पतला करने की दवाएं
- प्रोफिलैक्टिक अनफ्रेक्शनेटेड हेपरिन या लो मॉलिक्यूलर वेट हेपरिन की पारंपरिक डोज (वेट आधार एनॉक्सआपरिन 0.5 एमजी प्रति किलोग्राम प्रतिदिन)
निगरानी
- सांस पर निगरानी ऱकें, रक्त प्रवाह का ध्यान रखें, ऑक्सीजन की जरूरत पर भी नजर रखें।
- हालत बिगड़े तो सीने का एचआर सीटी स्कैन करवाएं।
- लैब में सीपीआर और डी-डिमर 48 से 72 घंटे, सीबीसी, केएफटी, एलएफटी 24 से 48 घंटे, आईएल 6 लेवल, अगर हालत बिगड़ रही है।
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गंभीर मरीजों के लक्षण
- सांस प्रति मिनट 30 पर पहुंचने, सांस में दिक्कत, एसपीओ 2 लेवल 90 फीसदी से कम हो
- मरीज को आईसीयू में एडमिट करें
सांस संबंधी सावधानी
- अगर ऑक्सीजन स्तर कम है तो एनआईवी दें
- एचएफइनसी के उपयोग पर भी विचार करें
- मरीज को सांस लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है तो इनट्यूबेशन पर विचार करें
- पारंपरिक एआरडीएसनेट प्रोटोकॉल का वेंटीलेटरी मैनेजमेंट में उपयोग करें
बुखार घटाने और प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपाय
- इंजेक्शन मिथाइलप्रीडेनिसोलोन 1 से 2 एमजी आईवी प्रति किग्रा दो डोज में बांट कर या डेक्सामेथासन की बराबर डोज 5 से 10 दिन दे सकते हैं
बुखार घटाने और प्रतिरक्षा के उपाए
- इंजेक्शन मिथाइलप्रीडेनिसोलोन 1 से 2 एमजी आईवी प्रति किलोग्राम दो डोज में बांट कर या डेक्सोमेथासन की बराबर डोज 5 से 10 दिन दे सकते हैं।
खून पतला करने की दवाएं
- वजन के अनुसार, प्रोफिलैक्टिक अनफ्रेक्शनेटेड हेपरिन या लो मॉलिक्यूलर वेट हेपरिन की इंटरमीडिएट डोज। इस दौरान मरीज में रीडिंग या हाई रेस या कंट्राइडिकेशन नहीं हो।
- शरीर में खून की पर्याप्त मात्रा हो, फ्लुइड रिस्पांस जांचें
- सेप्सिस या सेप्टिक शॉक हो तो लोकल एंटीबायोग्राम के तहत प्रबंधन करें
- सीएक्सआर, सीने का एचआरसीटी करें
- लैब में सीपीआर और डी-डिमर 48 से 72 घंटे, सीबीसी, केएफटी, एलएफटी 24 से 48 घंटे, आईएल 6 लेवल, अगर हालत बिगड़ रही है।
दवा और थैरेपी
रेमडेसिविर: इन्हीं मरीजों में उपयोग करें
टॉसिलिजूमैब: अगर रोग गंभीर हो
कन्वसेंट प्लाज्मा
- मरीज मध्यम श्रेणी का हो और ऑक्सीजन सप्लीमेंट की आवश्यकता पड़ रही हो
- उसमें किडनी या लिवर की दिक्कत ना हो
- जो लक्षण शुरू होने के 10 दिन के भीतर आया हो
- जो मरीज घर पर हो या ऑक्सीजन के सपोर्ट पर हो उसे यह देने की जरूरत नहीं है
- डोज: पहले दिन आईवी के जरिए 200 एमजी, अगले 4 दिन आईवी के जरिए 100 एमवी
टॉसिलिजूमैब: अगर रोग गंभीर हो
- मरीज में इस श्रेणी के लक्षण 24 में से 48 घंटे में शुरु हुए हैं
- स्टेरॉयड देने के बावजूद सुधार नहीं
- बैक्टीरियल, फंगल या टीबी संक्रमण न हो
- डोज: 4 से 6 एमजी मरीज के प्रति किलो वजन के हिसाब से दें
कन्वसेंट प्लाज्मा
- रोग मध्यम श्रेणी का हो और लक्षण 7 दिन के भीतर आए हों
- ज्यादा एंटीबॉडी वाला प्लाज्मा उपलब्ध हो