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वेब पोर्टल बनाकर 2001-05 पासआउट छात्रों की तलाश करेगा AICTE, दोबारा होगी परीक्षा

Sun, 12 Nov 2017 04:41 AM IST
सीमा शर्मा/ नई दिल्ली
सीमा शर्मा/ नई दिल्ली Updated Sun, 12 Nov 2017 04:41 AM IST
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AICTE to seek 2001-05 passout students, exam Will be taken again
AICTE

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन चार डीम्ड यूनिवर्सिटी से वर्ष 2001-05 के बीच पासआउट छात्रों की इंजीनियरिंग की डिग्री निरस्त की गई है, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) अब उनकी तलाश करेगा।

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उनकी तलाश वेब पोर्टल के माध्यम से की जाएगी और फिर उन्हें परीक्षा देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। खास बात यह है कि एआईसीटीई के पास फिलहाल उक्त चारों संस्थानों से कितने छात्र पासआउट हुए हैं, उसका कोई अधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं। 
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इस वजह से उक्त चारों संस्थानों से छात्रों और उनके प्रोग्राम की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे के मुताबिक, काउंसिल के पास फिलहाल छात्रों का आंकड़ा या अन्य रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। इस वजह से वेब पोर्टल तैयार किया जा रहा है।

पासआउट छात्रों से रजिस्ट्रेशन की होगी अपील

AICTE to seek 2001-05 passout students, exam Will be taken again
AICTE

पोर्टल के माध्यम से चारों संस्थानों के वर्ष 2001 से वर्ष 2005 तक पासआउट छात्रों को रजिस्ट्रेशन की अपील की जाएगी। रजिस्ट्रेशन के साथ छात्रों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री किस प्रोग्राम (मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल, कंप्यूटर इंजीनियरिंग आदि) से की थी। इसके आधार पर आगे परीक्षा की तैयारी होगी।

इसके साथ ही संस्थानों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें उन्हें बताना होगा कि उक्त अवधि में कितने छात्र रजिस्टर्ड थे, कितने छात्रों को डिग्री मिली और कितने छात्रों ने दाखिला लिया था। वहीं, वर्ष 2005 के बाद वाले छात्रों को पैसा वापस दिलवाने पर भी काम किया जाएगा।

प्रो. सहस्रबुद्धे के मुताबिक काउंसिल ने इस संबंध में यूजीसी से भी जानकारी मांगी है। यूजीसी से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार डीम्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों की डिग्री निरस्त की है, उसके अलावा कितने संस्थानों में इस प्रकार की डिग्री की पढ़ाई करवाई जा रही है।

जानकारी मिलने के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।अदालत के निर्देश के तहत ऐसे छात्रों (वर्ष 2001-05 तक) की परीक्षा आयोजित करवाकर उनकी डिग्री को मान्यता दी जाएगी, लेकिन जो छात्र परीक्षा नहीं देना चाहेंगे उनके पैसे वापस कराने पर भी काम होगा।

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