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Railways: कोडरमा-गिरिडीह मालगाड़ी हादसे पर एआईसी ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता, खाली पदों पर भर्ती की उठाई मांग

Tue, 05 Aug 2025 12:04 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 05 Aug 2025 12:04 PM IST
सार

बीते 31 जुलाई को कोडरमा-गिरिडीह के बीच पूरी भरी मालगाड़ी पटरी से उतर गई। इस हादसे के बाद अखिल भारतीय गार्ड्स काउंसिल (एआईसी) ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। साथ ही इस हादसे की वजह ट्रेन में गार्ड के ना होने को बताया है। 

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AIC expressed concern over security on Koderma-Giridih goods train accident News In Hindi
मालगाड़ी (File Photo)

विस्तार

31 जुलाई को धनबाद रेल मंडल के कोडरमा और गिरिडीह के बीच एक पूरी तरह भरी हुई मालगाड़ी पटरी से उतर गई। इस घटना के बाद अखिल भारतीय गार्ड्स काउंसिल (एआईसी) ने रेलवे की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। साथ ही रेलवे में खाली पड़े ट्रेन मैनेजर के पदों को जल्द से जल्द भरने की अपनी मांग को भी दोहराया है। काउंसिल ने चेतावनी दी है कि अगर यह पद खाली रहेंगे तो यह दुर्घटना यात्रियों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

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रेलवे में खाली पदों को बताया हादसे का जिम्मेदार
एआईसी ने बताया कि यह हादसा इसलिए हुआ क्योंकि ट्रेन में गार्ड यानी ट्रेन मैनेजर मौजूद नहीं था। घटना के समय जब ट्रेन ढलान पर ऊपर चढ़ रही थी, तो इंजन उसका वजन खींच नहीं पाया और ट्रेन पीछे की ओर फिसलने लगी। लोको पायलट ने स्टेशन मास्टर को बताया, जिसके बाद स्टेशन मास्टर ने एक और लोकोमोटिव भेजी जो पीछे से ट्रेन की मदद कर सके। लेकिन क्योंकि ट्रेन एक मोड़ पर थी और गार्ड नहीं था, लोको पायलट को यह पता नहीं था कि ब्रेक वैन यानी गार्ड वाला आखिरी डिब्बा कहां है। इसी वजह से नई लोकोमोटिव ब्रेक वैन से टकरा गई और ट्रेन पटरी से उतर गई।

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बता दें कि रेलवे के नियमों के अनुसार, ट्रेन मैनेजर की जिम्मेदारी होती है कि वह ट्रेन के पीछे की सुरक्षा करे। अगर ट्रेन बीच में कहीं रुकती है तो उसे आने वाली ट्रेनों को सूचित करने के लिए टेल लाइट जलानी होती है और फ्लैशर लाइट ऑन करनी होती है। साथ ही, ट्रेन मैनेजर को अपनी ट्रेन से 600 से 1200 मीटर दूर डेटोनेटर (सावधानी के लिए पटरी पर रखे जाने वाले उपकरण) भी लगाना होता है ताकि आने वाली ट्रेन सतर्क हो जाए।

काउंसिल ने खाली पद भरने पर दिया जोर
हालांकि काउंसिल ने यह भी बताया कि रेलवे में बहुत सारे ट्रेन मैनेजर के पद खाली हैं, जिसकी वजह से कई मंडलों में मालगाड़ियों को केवल लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के साथ चलाना पड़ता है। क्योंकि यात्रियों वाली ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए गार्ड केवल उन्हीं ट्रेनों में उपलब्ध कराए जाते हैं। इस वजह से मालगाड़ियों में गार्ड की कमी हो जाती है।

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रेलवे में 27 प्रतिशत ट्रेन मैनेजर के पद खाली
बता दें कि 31 दिसंबर 2024 तक रेलवे में लगभग 27 प्रतिशत ट्रेन मैनेजर के पद खाली थे। रेलवे में कुल 53,229 ट्रेन मैनेजर के पद हैं, जिनमें से 14,520 खाली पड़े हैं। एआईसी ने कहा है कि बिना ट्रेन मैनेजर के ट्रेनों का चलना सुरक्षित नहीं है। काउंसिल ने रेलवे प्रशासन से तुरंत इन खाली पदों को भरने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकी जा सकें और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि बिना गार्ड वाली मालगाड़ी यात्रियों के लिए खतरा है क्योंकि यदि मालगाड़ी बीच रास्ते में रुक जाए तो आने वाली यात्रियों वाली ट्रेनों के लिए यह बहुत बड़ा खतरा बन जाती है।

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