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क्या फैसलों को प्रभावित करेगा AI? डिजिटल उपकरण पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की सख्त चेतावनी; कहा- विवेक सबसे अहम

Sun, 12 Apr 2026 06:16 PM IST
Himanshu Singh Chandel पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sun, 12 Apr 2026 06:16 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि AI और डिजिटल टूल्स न्यायिक प्रक्रिया में केवल सहायक भूमिका निभाएं, वे न्यायाधीशों के फैसलों को प्रभावित न करें। उन्होंने डेटा गोपनीयता पर भी चिंता जताई।

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AI technology digital tools in Indian judiciary Supreme Court Justice Rajesh Bindal warning data privacy
जस्टिस राजेश बिंदल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

देश की न्याय व्यवस्था में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम चेतावनी दी है। सुप्रीम कोर्ट के जज राजेश बिंदल ने साफ कहा है कि एआई और डिजिटल टूल्स केवल सहायक के रूप में इस्तेमाल होने चाहिए, न कि वे न्यायाधीशों की सोच और फैसले लेने की प्रक्रिया पर हावी हों। उन्होंने कहा कि इंसानी समझ और न्यायिक विवेक को किसी भी हालत में मशीन से बदला नहीं जा सकता।

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी और न्याय विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। इस दौरान जस्टिस बिंदल ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य न्याय को आसान और तेज बनाना है, लेकिन यह न्यायाधीशों के निर्णय का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे डेटा की गोपनीयता को खतरा हो सकता है।
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क्या एआई न्यायिक फैसलों को प्रभावित कर सकता है?
जस्टिस बिंदल ने कहा कि अगर एआई को बिना नियंत्रण के इस्तेमाल किया गया, तो यह न्यायिक सोच पर असर डाल सकता है। उन्होंने साफ किया कि एआई केवल जानकारी जुटाने और प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा इंसान द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
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डिजिटल उपकरणों पर गोपनीयता का खतरा कितना बड़ा?
उन्होंने ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा लीक होने के खतरे को गंभीर बताया। उनका कहना था कि अदालतों में आने वाले मामलों में संवेदनशील जानकारी होती है, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में तकनीक का इस्तेमाल करते समय मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।


सम्मेलन में क्या चर्चा हुई?
यह सम्मेलन 11 और 12 अप्रैल को आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के जज, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और आईटी विशेषज्ञ शामिल हुए। इसमें कुल पांच सत्र हुए, जिनमें न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और उसे बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन के समापन सत्र में जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा कि न्यायिक सुधार और तकनीकी विकास साथ-साथ चलेंगे। वहीं, संदीप मेहता ने न्यायपालिका में नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया, लेकिन संतुलन बनाए रखने की जरूरत भी बताई।

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