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Agusta Westland: सुप्रीम कोर्ट का आरोपी जेम्स मिशेल की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार, सीजेआई ने कही ये बात

Mon, 18 Mar 2024 06:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 18 Mar 2024 06:31 PM IST
सार

Agusta Westland: सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। मामले की जांच अभी सीबीआई और ईडी कर रही है। 

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Agusta Westland: SC refuses to entertain bail plea of alleged middleman Christian Michel James
क्रिश्चियन मिशेल - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

शीर्ष अदालत ने सोमवार को क्रिश्चियन मिशेल की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। मिशेल अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित तौर पर बिचौलिया था। सीबीआई और ईडी 36000 करोड़ रुपये के 12 वीवीआई हेलीकॉप्टर्स की खरीद में उसकी भूमिका की जांच कर रही हैं। उसे दुबई से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद दिसंबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था। 

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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, "आप इस मामले में (संविधान के) अनुच्छेद-32 के तहत याचिका कैसे दायर कर सकते हैं?" अनुच्छेद-32 मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। पीठ ने कहा कि यह मामला पहले भी निपटाया जा चुका है और इसे नहीं दोहराया जा सकता। 

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मिशेल के वकील अल्जो जोसेफ ने दलील दी कि मिशेल पिछले पांच साल से जेल में बंद है। दोषी ठहराए जाने पर उसे दी जाने वाली अधिकतम सजा इतनी ही हो सकती है।उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सात फरवरी को भी जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने तब भी यह दलील खारिज कर दी थी कि उसे इस आधार पर रिहा किया जाए कि उसने मामले में अधिकतम सजा की अवधि पूरी कर ली है। 

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सीजेआई ने फैसला लिखते हुए कहा था कि मिशेल मामले में निचली अदालत के सामने नियमित जमानत के लिए याचिका दाखिल कर सकते हैं। उसने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 436ए के तहत जमानत मांगी थी। इस प्रावधान के तहत अगर किसी व्यक्ति ने अपराध के लिए तय अधिकतम सीमा का आधा समय पूरा कर लिया है तो उसे रिहा किया जा सकता है। 

आरोपी ने तब दिल्ली उच्च न्यायालय के 11 मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने सीबीआई और ईडी दोनों के मामलों में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले 2021 में एक निचली अदालत ने इन मामलों में उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि सभी तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपों की गंभीर प्रकृति, अपराध की गंभीरता और आरोपी के आचरण पर विचार करते हुए जमानत का उपयुक्त मामला नहीं बनता है। 

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