नाराज किसानों ने कहा- क्या हमलोगों को बात करने के लायक भी नहीं समझती है सरकार?
- नए किसान कानूनों पर बातचीत के लिए सरकार ने बुलाया था किसानों का प्रतिनिधि मंडल
- कृषि मंत्री की अनुपस्थिति में सचिव स्तर के अधिकारी ने करनी चाही बात, किसानों ने नाराज होकर किया बातचीत का बहिष्कार
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किसान कानूनों पर किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने उनसे बातचीत का रास्ता अपनाया था। लेकिन बुधवार को जब किसान सरकार के आमंत्रण पर उससे बातचीत करने के लिए दिल्ली पहुंचे तो बैठक में कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को न पाकर नाराज हो गए। किसानों ने कहा कि इससे यह साबित होता है कि सरकार किसानों को बातचीत के काबिल भी नहीं समझती है। नाराज किसानों ने बातचीत का बहिष्कार किया और कृषि भवन के बाहर निकलकर किसान कानून की कापियां फा़ड़कर अपना विरोध जताया।
पंजाब से आए किसानों के दल में शामिल दर्शन पाल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि लगभग दो दर्जन किसान नेता सरकार से बातचीत करने के लिए दिल्ली आए हुए थे। वे सरकार को किसान कानून पर अपनी आपत्तियां बताना चाहते थे और उसका समाधान पाना चाहते थे। लेकिन सरकार के रूख से ऐसा लगता है कि वह कुछ सुनने के मूड में नहीं है। बल्कि वह केवल अपनी बात हमें 'समझाना' चाहती है।
दर्शन पाल सिंह ने बताया कि जब वे बातचीत के लिए कृषि भवन पहुंचे तो किसान बिल की कॉपी पंजाबी भाषा में उन्हें पढ़ने के लिए दे दी गई। उनसे कहा गया कि नया किसान कानून उनके हित में है और वे इसे ठीक से पढ़कर समझ लें। इस पर किसानों ने अधिकारियों को बताया कि वे कानून के बारे में हर चीज पहले से ही जानते हैं और वे सीधे मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं। इसके बाद कृषि मंत्रालय के अधिकारी उनसे बातचीत करने के लिए आए।
बिफरे किसान
किसानों ने कहा कि वे किसी अन्य अधिकारी से बातचीत नहीं करना चाहते हैं। वे केवल उससे बातचीत करना चाहते हैं जो कानून में किसी प्रकार का बदलाव करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें बताया गया कि कृषिमंत्री उपस्थित नहीं हैं और अधिकारी ही उनसे बातचीत करेंगे। इसके बाद किसान नाराज हो गए।
भाजपा कर रही दोहरापन
किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा किसान कानूनों के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही है। एक तरफ वह किसानों से बातचीत के नाम पर उनकी बात सुनने का 'नाटक' कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके नेता पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में बैठक कर किसानों को यह समझाने की कोशिश में लगे हैं कि यह बिल उनके हित में है और इसमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है। किसानों के मुताबिक यह भी साबित करने की कोशिश की जा रही है कि किसान कानून का विरोध केवल राजनीतिक कारणों से की जा रही है।
अब क्या करेंगे किसान
दर्शन पाल सिंह ने बताया कि आज के सरकार के रूख से किसानों में भारी निराशा है। अब उन्हें यह महसूस हुआ है कि सरकार उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहती है, बल्कि बातचीत के बहाने मामले को ठंडा करने की कोशिश की जा रही है। सरकार इस तरह केवल समय बिताना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए। किसान इस बार खुले बाजार में भी एमएसपी से कम पर किसी भी तरह तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि किसी भी कीमत पर एपीएमसी मंडियां खत्म नही की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सभी किसान नेता मिलकर जल्दी ही अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे और आंदोलन की राह तैयार करेंगे।