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Agniveer: राहुल बोले- खत्म करेंगे अग्निपथ योजना, इस मामले में क्यों 'अस्पष्ट' हैं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह?
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अग्निवीर स्कीम
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अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान से पहले कांग्रेस पार्टी ने सेना भर्ती के लिए शुरू की गई 'अग्निपथ' योजना पर खास फोकस किया है। राहुल गांधी से लेकर पार्टी के दूसरे नेता, अपनी चुनावी रैलियों में 'अग्निपथ' योजना की कमियां गिना रहे हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता, इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी लगातार मुखर हैं। मंगलवार को राहुल गांधी ने 'एक्स' पर लिखा, 'अग्निपथ' योजना, भारतीय सेना और देश की रक्षा करने का सपना देखने वाले बहादुर युवाओं का अपमान है। यह भारतीय सेना की नहीं, नरेंद्र मोदी के कार्यालय में बनी योजना है, जिसे सेना पर थोप दिया गया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी ने कहा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 'अग्निपथ' पर अस्पष्ट इसलिए हैं, क्योंकि भाजपा युवाओं को गुमराह करके सिर्फ लोकसभा चुनाव में वोट लेना चाहती है।अग्निवीर भर्ती योजना में बदलाव के लिए तैयार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों कहा था कि उनकी सरकार जरूरत पड़ने पर अग्निवीर भर्ती योजना में बदलाव के लिए तैयार है। हालांकि राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा, अग्निवीरों का भविष्य बेहद सुनहरा है। अग्निवीरों को अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी मिलेगी। राहुल गांधी ने अग्निवीरों को लेकर अपनी पोस्ट में लिखा, शहीदों के साथ दो तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता, हर व्यक्ति जो देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देता है, उसे शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। इंडिया गठबंधन की सरकार बनते ही इस योजना को तुरंत रद्द कर सेना में पुरानी स्थायी भर्ती प्रक्रिया फिर से लागू की जाएगी।
घातक 'अग्निपथ योजना' को खत्म करेंगे
कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने कहा, राजस्थान प्रदेश में कृषि योग्य भूमि बेहद कम व पानी की कमी है। किसान परिवारों के ज्यादातर बच्चे फौज, पुलिस व अर्धसैनिक बलों में भर्ती होते रहे हैं। वीर भूमि राजस्थान से सेना भर्ती में हर साल हजारों युवा चयनित होते थे। अग्निपथ के बाद यहां का युवा हताश व निराश है। चौधरी ने कहा, मोदी सरकार की नीतियों ने पिछले 10 साल में 'किसान व जवान' दोनों को आर्थिक रूप से कमजोर करने का काम किया है। भाजपा सरकार, किसानों को न उचित एमएसपी दे रही, न ही उनके बच्चों को सेना में भर्ती कर रही है। कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने के बाद किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देगी। युवाओं के लिए घातक 'अग्निपथ योजना' को खत्म किया जाएगा।
ये है अग्निवीर बनाम नियमित सैनिक का भेद
कर्नल रोहित चौधरी ने अग्निवीर बनाम नियमित सैनिक के बीच का अंतर बताते हुए कहा, एक ही यूनिट में व एक ही परिस्थिति में 'शहीद' होने पर/रिटायरमेंट होने पर, कई बातों में अंतर आ जाता है। 'सर्विस' के दौरान 'अग्निवीर सैनिक' को एक 'रेगुलर सैनिक' की तुलना में बहुत कुछ नहीं मिलता है।
अग्निवीर के 'शहीद' होने पर यह नहीं मिलेगा
- पेंशन नहीं मिलेगी
- ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी
- शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा
- मेडिकल सुविधा आश्रित पत्नी, बच्चे व माता-पिता को नहीं मिलेगी
- कैंटीन सुविधा नहीं मिलेगी
- फुल पे, बचे हुए सेवा कार्यकाल से लेकर सिर्फ चार साल तक मिलेगी, क्योंकि अग्निवीर की कॉन्ट्रैक्चुअल सेवा सिर्फ चार साल की है, जो कि रेगुलर सैनिक को 15 साल तक मिलती है। उसके बाद परिवार की पेंशन पत्नी/माता-पिता को जब तक जीवित है, तब तक मिलती रहेगी। उदाहरण के तौर पर, शहीद अग्निवीर 'गवाते अक्षय लक्ष्मण' अगर 'रेगुलर सैनिक' होते, तो उन्हें 15 साल तक फुल पे मिलती। रिटायरमेंट उम्र आने पर यह पे, उसकी फैमिली पेंशन में तब्दील हो जाती। ये ताउम्र उसके परिवार को मिलती रहती, जब तक पत्नी व माता-पिता जीवित रहते। शहीद का दर्जा मिलता, मेडिकल सुविधा मिलती और सीएसडी सुविधा भी मिलती। इसके अलावा, सभी तरह के मिलिट्री बेनिफिट्स, जो सरकार कभी भी अनाउंस करती है, वे भी मिलते हैं।
अग्निवीर को 'सर्विस' के दौरान यह नहीं मिलेगा
- 'डियरनेस अलाउंस' व मिलिट्री सर्विस पे नहीं मिलेगा
- केवल 30 हजार रुपये (पहले साल में) तनख्वाह मिलेगी
- उसमें से भी '30 प्रतिशत' (9 हजार रुपये) सेवा निधि के तौर पर काट लिया जाएगा, जो कि चार साल की सर्विस के बाद दिया जाएगा
- कुल मासिक तनख्वाह केवल 21 हजार रुपये होगी, जबकि रेगुलर सैनिक को 35 हजार से अधिक मिलते हैं
- अग्निवीर की 'तनख्वाह व अलाउंसेस' रेगुलर सैनिक से कम हैं। 'सेवा निधि' भी 30 फीसदी अधिक काटी जा रही है, ताकि उनको आखिर में चार साल बाद थोड़ा अधिक अमा
उंट इकट्ठा करके दिया जा सके। यह राशि करीब 5.02 लाख रुपये होगी। इतना ही अमाउंट सरकार देगी, ताकि सेवा के बाद उसे 11 लाख रुपये दिए जा सकें।
अग्निवीर को 'रिटायरमेंट' के बाद यह नही मिलेगा
- ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी
- मेडिकल सुविधा खुद के लिए या आश्रित पत्नी, बच्चे व माता-पिता को नहीं मिलेगी
- पेंशन नहीं मिलेगी
- कैंटीन सुविधा नहीं मिलेगी
- पूर्व सैनिक का दर्जा भी नहीं मिलेगा
- पूर्व सैनिकों व उनके बच्चों के लिए आरक्षित वैकेंसी (शिक्षा व सरकारी नौकरी में) नहीं मिलेगी
- बच्चों को किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी
- इसके अलावा कोई भी मिलिट्री बेनिफिट, जो सरकार कभी भी रेगुलर सैनिकों के लिए अनाउंस करेगी, वह भी नहीं मिलेगा।
सेना में हर साल 40 हजार जवानों की कटौती
कर्नल रोहित चौधरी के अनुसार, सरकार ने कहा है कि सभी अग्निवीरों को चार साल बाद नौकरी देंगे। क्या सच में चार साल बाद अग्निवीरों को सरकारी नौकरी मिलेगी, यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा, जब सरकारी नौकरी लेने के लिए पूर्व सैनिक पहले से ही कतार में लगे हैं, तो सभी अग्निवीरों को पक्की नौकरी कैसे मिलेगी। पहले सेना में लगभग 80 हजार भर्तियां, हर वर्ष होती थी। अग्निपथ स्कीम के तहत 40 हजार (वार्षिक) जवानों को सेना में कम कर दिया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के 8 लाख 10 हजार पद हैं। इनमें से 7.70 लाख पद (95 फीसदी) खाली हैं। अब 'अग्निवीर' भी सरकारी नौकरी लेने वाली कतार में खड़े हो जाएंगे। इसके चलते चार वर्ष बाद सभी अग्निवीरों को नौकरी कैसे मिलेगी। कोरोनाकाल के दौरान 2020, 2021 व 2022 में मोदी सरकार ने सेना में भर्तियां नहीं की। महज तीन साल में सेना में 2.25 लाख पद कम कर दिए। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार 4 साल बाद सभी अग्निवीरों को नौकरी कैसे देगी। क्या मोदी सरकार का 2 करोड़ सालाना नौकरियों की तरह, 4 साल बाद अग्निवीरों को नौकरी देने की बात भी महज एक जुमला साबित होगी।
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने उठाया सवाल
रोहित चौधरी ने कहा, तत्कालीन चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल एमएम नरवणे भी कह चुके हैं कि अग्निवीर योजना, तीनों सेनाओं पर थोपी गई स्कीम है। अग्निवीर योजना न देशहित में है और न ही युवाओं के हित में है। अग्निपथ योजना को लेकर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने अपनी किताब में लिखा था, अग्निपथ स्कीम से सेना 'आश्चर्यचकित' हो गई थी। खासतौर पर, नौसेना और वायु सेना के लिए, यह नीले रंग से बोल्ट की तरह आया था। इसके अलावा, यह योजना सैनिकों के समानांतर कैडर बनाकर हमारे जवानों के बीच भेदभावपूर्ण स्थिति पैदा करती है। सेना में एक जैसी ड्यूटी के लिए समान काम करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बहुत अलग परिलब्धियों, लाभों और संभावनाओं के साथ। बतौर चौधरी, चार साल की सेवा के बाद अधिकांश अग्निवीरों को अनिश्चित जॉब मार्केट में छोड़ दिया जाएगा। कुछ लोगों का तर्क है कि इससे सामाजिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।