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सीएम बनते ही अम्मा ने किसानों का कर्ज किया माफ

Tue, 24 May 2016 04:24 AM IST
एजेंसी/ चेन्नई
एजेंसी/ चेन्नई Updated Tue, 24 May 2016 04:24 AM IST
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After taking oath Jayalalitha waiver farmers from debt
जे जयललिता ने निभाया वादा - फोटो : PTI

अन्नाद्रमुक चीफ जे जयललिता ने सोमवार को छठी बार तमिलनाडु के सीएम के रूप में शपथ ली। अम्मा के नाम से लोकप्रिय 68 वर्षीय जयललिता ने सीएम बनते ही चुनावी वादे के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ कर दिया और सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया।

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इसके अलावा मंगलसूत्र के लिए महिला लाभार्थियों को मिलने वाले स्वर्ण के आवंटन में बढ़ोतरी करके इसे चार ग्राम से आठ ग्राम कर दिया। इसके अलावा महिलाओं को 25 से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलती रहेगी। मद्रास यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित शपथ समारोह में राज्यपाल के. रोसैया ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। ओ पनीरसेलवम समेत 28 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया।
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शपथ समारोह में मुख्य विपक्षी दल डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के पुत्र एम स्टालिन भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने भी मुख्यमंत्री बनने पर जयललिता को बधाई दी और और केंद्र से हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।

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सभी किसानों को नहीं मिलेगा फायदा 

After taking oath Jayalalitha waiver farmers from debt
`27 अन्य मंत्रियों ने भी साथ में लिया शपथ - फोटो : PTI

 शपथ लेते ही एक्शन में आईं अम्मा सीधे सचिवालय पहुंची और चुनावी वादे पूरा करने के लिए पांच फाइलों पर दस्तखत किए। हथकरघा बुनकरों को मिलने वाली मुफ्त बिजली को बढ़ाकर 200 यूनिट और पावरलूम को मिलने वाली मुफ्त बिजली को बढ़ाकर 750 यूनिट किया गया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन (टीएएसएमएसी) की मदिरा दुकानों के काम के घंटों में न केवल कटौती की गई है बल्कि 500 दुकानों को बंद भी कर दिया गया है। पहले शराब की दुकानें और बार सुबह दस बजे से रात दस बजे तक खुले रहते थे, लेकिन अब दोपहर से रात दस बजे तक खुलेंगे। 

कर्ज माफी का फायदा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने 31 मार्च 2016 तक कोआपरेटिव बैंक से ऋण लिया था। जिन किसानों ने राष्ट्रीय बैंकों से ऋण लिया है उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। कर्ज माफी के तहत फसली ऋण समेत छोटे और मझोले किसानों के मध्यम और लंबी अवधि के ऋण माफ किए गए हैं। कर्ज माफी के कारण सरकार पर 5780 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। मुफ्त बिजली देने के फैसले के कारण राज्य सरकार को सालाना 1607 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। 

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