फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   after nine years of mumbai attack 26/11 family waiting for death certificate

26/11 हमले के 9 सालः इनको आज भी है अपने पति के डेथ सर्टिफिकेट का इंतजार

Sat, 25 Nov 2017 03:55 PM IST
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा Updated Sat, 25 Nov 2017 03:55 PM IST
विज्ञापन
after nine years of mumbai attack 26/11 family waiting for death certificate
मुंबई हमले के नौ साल
मुंबई हमले को नौ साल हो गए हैं। इन नौ सालों में कई परिवार हैं जिन्हें इंसाफ का इंतजार है जबकि पाकिस्तान में मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी हाफिज सईद को पाक की अदालत ने रिहा कर दिया है। मुंबई हमलों में अपने पिता को खो चुकीं रवीना बांभनिया अब बड़ी हो गई हैं। अब वो एक टीचर बनना चाहती हैं और मां परिवार चलाने के लिए हर दिन जूझ रही है। रमेश सरकारी दस्तावेजों में आज भी मिसिंग पर्सन हैं। 
विज्ञापन


2008 में रवीना सात साल की थीं, जब उसके रिश्तेदार उसके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे। रमेश बांभनिया को 26 नवंबर 2008 को मछली पकड़ने वाली उसकी बोट के साथ ही आतंकियों ने अपहरण कर लिया था और बाद में उसे मार दिया था। 
विज्ञापन


गुजरात के उना ताल्लुका के सिमासी गांव में उस रात आतंकियों ने चार मछुआरों का अपहरण कर लिया था। जब मुबंई के तट पर कैप्ट‍न अमर सिंह सोलंकी की बॉडी मिली थी तब और सभी मछुआरों का कोई नामोनिशन नहीं मिला था। आधिकारिकतौर पर सरकार ने उन्हें मृत घोषित नहीं किया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें: हाफिज ने केक काटकर मनाया अपनी आजादी का जश्न, भारत के खिलाफ फिर उगला जहर
 

परिवार चलाने के लिए कंपनी ने 75000 रुपये दिए थे लेकिन उसका पैसा चार बच्चों को पालने के लिए नाकाफी साबित हुए। रमेश के स्कूल गोइंग चार बच्चे थे जिसमें बेटा महेश, बेटी रीना, रवीना और मनीषा शामिल थीं।

अधिकारियों के चक्कर काट रहा परिवार

after nine years of mumbai attack 26/11 family waiting for death certificate
mumbai attack
परिवार चलाने के लिए मां का हाथ बंटाने और बहनों को पढ़ाने के लिए महेश ने स्कूल जाना छोड़ दिया और दिहाड़ी मजदूर बन गया। पिता की मौत के समय वह 8 वीं में पढ़ता था। बड़ी बहन रीना की शादी कर दी है जबकि रवीना ने मां का हाथ बटाते हुए पढ़ाई जारी रखी। हाईअर एजुकेशन के लिए वो रोज 5 किलोमीटर तक जाती रही।

जब रवीना 10वीं में थी तब उसे बुखार आया और वो परीक्षा में नहीं बैठ पाई और उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी और फिर उसने मां के साथ खेती में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। रमेश की पत्नी जासी कहती हैं कि अब मुंबई हमले को 9 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन सरकार ने अभी तक रमेश का डेथ सर्टिफिकेट नहीं दिया है और न ही कोई वित्तीय सहायता ही दी है।  जासी वित्तीय मदद के लिए कई अधिकारियों के पास चक्कर लगा चुकी है लेकिन बिना डेथ सर्टिफिकेट के उसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिलेगी। 

गिर सोमनाथ के जिला अधिकारी अजय प्रकाश ने कहा कि फिशरिश विभाग ने रमेश के परिवार को मिसिंग की सूचना के बाद डेढ लाख रुपये दिया था। प्रकाश ने बताया कि फिशरिश विभाग ने राज्य सरकार को पत्र भेज कर रमेश को मृत घोषित करने की बात कही थी लेकिन विभाग ने उस प्रपोजल पर अभी तक कोई काम नहीं किया है। लेकिन आज भी सारा परिवार एकदूसरे को सपोर्ट कर अपने पिता के डेथ सर्टिफिकेट के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed