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गुजरात का चुनावी शोर थमा, अब संसद में दिखेगा सियासी संग्राम, केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

Wed, 13 Dec 2017 09:59 AM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Wed, 13 Dec 2017 09:59 AM IST
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after Gujarat elections promotions now center calls all party meeting

गुजरात चुनाव का प्रचार थमने के बाद राजनीतिक दलों ने अब संसद सत्र की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। गुजरात चुनाव में प्रचार का स्तर बेहद नीचे जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संसद के सत्र में भी विपक्ष की ओर से सरकार पर हमले तेज होंगे। इसे भांपते हुए सरकार ने सत्र की शुरूआत से एक दिन पूर्व सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

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विपक्ष खासतौर से कांग्रेस पार्टी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र जय शाह के मामले और राफेल डील के मुद्दे को संसद में उठाने का ऐलान पहले ही कर रखा है। तो सत्र की देरी को लेकर भी विपक्ष सरकार को कटघरे में घेरने की तैयारी में है। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत शुक्रवार 15 दिसंबर को होगी।
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गुरुवार को सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
विपक्ष के मंसूबों को भांपते हुए सरकार ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। संसदीय कार्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि संसद सत्र की पूर्व संध्या पर गुरूवार शाम को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। इसमें संसद की रणनीति और मुद्दों को लेकर राजनैतिक दलों से चर्चा की जाएगी। गुरुवार शाम को संसद भवन के लाइब्रेरी परिसर में यह बैठक बुलाई गई है। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने राजनैतिक दलों के नेताओं को इसकी सूचना दे दी है। 
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सत्र पर दिखेगा गुजरात परिणाम का असर 
गुजरात चुनाव की शोर थमने के बाद अब संसद के सत्र में भी सूबे के चुनाव परिणाम का असर दिखाई देगा। दूसरे चरण के मतदान के अगले दिन यानी की 15 दिसंबर से संसद के शीत सत्र की शुरूआत होगी। मगर सत्र की असल कार्यवाही 19 दिसंबर से ही चलने के आसार हैं। इस बीच 18 दिसंबर सोमवार को गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम आने हैं।

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भाजपा को लगता है कि अगर गुजरात के परिणाम उसके पक्ष में रहे तो विपक्ष के मनोबल पर मनौवैज्ञानिक असर पड़ेगा और सरकार के खिलाफ उसके जरिए उठाए जाने वाले आरोपों को बल नहीं मिलेगा। लेकिन विपक्ष खासतौर से कांग्रेस में इस दफा निजाम बदला नजर आएगा। सोनिया की जगह राहुल गांधी पार्टी का अध्यक्ष हो गए हैं। उनके नेतृत्व संभालने के बाद संसद का यह पहला सत्र है।


इसलिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेता भी संसद में पूरा दमखम दिखाएंगे ताकि बदले निजाम का असर स्पष्ट दिख सके। इस बीच गुजरात से भी कांग्रेस के लिए अच्छी खबर की उम्मीद है। सूबे में पार्टी की सरकार बनने की स्थिति नजर आ रही है। वरना सीटें बढ़ना तो तय माना जा रहा है। गुजरात के बाद कांग्रेस के भी हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। संसद के सत्र में भी कांग्रेस का यह हौसला नजर आएगा, इसलिए संसद सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार के रणनीतिकार भी सक्रिय हो गए हैं। सरकार को भी अब सत्र की रणनीति के लिए गुजरात चुनाव के परिणाम का इंतजार है।

इसे ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने संसद सत्र की तिथि निर्धारित की है। शुक्रवार 15 दिसंबर को कामकाज की संभावना न के बराबर है। 16-17 दिसंबर को अवकाश रहेगा। 18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा के परिणाम आने हैं। सत्र से ज्यादा सियासी दलों का ध्यान चुनाव परिणाम पर टिका होगा। उसके बाद 19 दिसंबर से ही संसद में कामकाज शुरू हो सकेगा। बावजूद उसके गुजरात परिणाम के बाद की स्थिति भी संसद सत्र पर हावी रहेगी। परिणाम आने के बाद भी राज्य में सियासी सक्रियता बढऩे की उम्मीद है। 

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