अच्छी खबर: कोविड-19 के सभी नए वेरिएंट का एक घंटे में पता लगाएगी नई टेस्ट किट, नाम है 'रे'
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वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने एक नया कोविड-19 परीक्षण विकसित किया है जो कि एक घंटे में वायरस के प्रकार की पहचान कर सकता है। महान बंगाली फिल्म निर्माता और लेखक सत्यजीत रे को श्रद्धांजलि देते हुए इस नए परीक्षण किट को ‘रे’ (रैपिड वैरिएंट अस्से) नाम दिया गया है। यह उसी सीएसआईआर टीम द्वारा बनाया गया है, जिसने पिछले साल अप्रैल में कोविड-19 परीक्षण किट फेलूदा को डिजाइन किया था। बता दें, फेलूदा कोविड-19 परीक्षण के लिए बनाई गई एक पेपर किट है। इस किट का नाम बांग्ला फिल्मकार सत्यजीत रे की फिल्मों और कहानियों का एक किरदार रहे फेलूदा के नाम पर रखा गया था जो कि हर हाल में छानबीन कर हर समस्या का रहस्य खोज ही लेता था।
एक घंटे में नए स्ट्रेन का चलेगा पता
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले पहले से कम हो गए हैं। इसके साथ ही कई देशों में कोरोना टीकाकरण भी शुरू किया जा चुका है, लेकिन कई देशों में कोरोना के नए स्ट्रेन का संक्रमण अब भी तेजी से फैल रहा है। कोरोना के नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए वायरस के जीनोम अनुक्रमण की जांच करनी पड़ती है, जिसकी रिपोर्ट आने में 36 से 48 घंटे का समय लगता है। हालांकि, अब भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित परीक्षण किट ‘रे’ एक घंटे के अंदर ही कोरोना वायरस का पता लगाने में सक्षम है।
जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं का संघ स्थापित
कोरोना वायरस का नया प्रकार पिछले वेरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक है। ऐसे में भारत में इसके प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने यूके से सभी उड़ानों को निलंबित कर रखा है। बता दें, जनवरी में लगभग दो दर्जन देशों से आए कोरोना वायरस के नए वैरिएंट की जांच के लिए जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं का एक संघ स्थापित किया गया था। इन प्रयोगशालाओं में यात्रियों से एकत्रित किए गए सैंपल की जांच के लिए जीनोम अनुक्रमण किया जाता है। जीनोम अनुक्रमण खून से लिए गए डीएनए के नमूने का विश्लेषण करने की एक प्रक्रिया है।