{"_id":"59a4ef804f1c1b83018b46b1","slug":"after-doklam-standoff-for-itbp-recurits-candidates-must-have-knowledge-of-chinese-language","type":"story","status":"publish","title_hn":"'ड्रैगन' के मंसूबे समझने के लिए ITBP सीख रही चीनी भाषा","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
'ड्रैगन' के मंसूबे समझने के लिए ITBP सीख रही चीनी भाषा
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद खत्म माना जा रहा है, लेकिन इंडो तिब्बतीयन बॉर्डर पुलिस उसके मंसूबों को समझने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ रही है। आईटीबीपी नई भर्तियों के लिए चीनी भाषा मन्दारिन का ज्ञान अनिवार्य कर रही है। ऐसा भी माना जा रहा है भारत बॉर्डर पर कोई विवाद नहीं चाहता, इसलिए इसे एक कोशिश भी माना जा रहा है।
विज्ञापन
अधिकारी ने बताया कि आवेदकों को चीनी भाषा ही नहीं तिब्बती भाषा का ज्ञान होना भी जरूरी होगा। उनके मुताबिक अक्सर ऐसा होता है कि चीनी भाषा नहीं आने की वजह से चीनी सैनिकों से गलफहमी हो जाती है, इसलिए अब जो नई भर्तियां की जाएंगी उसके लिए चीनी और तिब्बती भाषा का आना अनिवार्य कर दिया गया है।
विज्ञापन
पढ़ें: आखिरकार भारत के आगे झुका चीन, डोकलाम से सेना हटाने को हुआ तैयार
विज्ञापन
अधिकारियों के मुताबिक अगर दोनों देशों के सैनिकों में कम्यूनिकेशन लेवल बेहतर होगा तो हाल ही में पत्थरबाजी और धक्कामुक्की जैसी हरकतों पर रोक लगाई जा सकेगी। तिब्बती भाषा आना इसलिए अनिवार्य किया गया है, क्योंकि कुछ चीनी सैनिक वहां तिब्बती भाषा भी बोलते हैं, ऐसे में ये भी कम्यूनिकेशन लेवल में सुधार ला सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक करीब 12 टीचरों की भर्ती की गई हैं जो मंसूरी में ट्रेनिंग अकादमी चलाएंगे। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 9000 तैनात जवानों में से सिर्फ 150 ऐसे कर्मी हैं, जिन्हें चीनी भाषा आती है। इनमें से कई अफसरों ने आर्मी ट्रेनिंग अकादमी में और जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में चीनी भाषा सीखी है।