कानों देखी: रस्सी जल गई, लेकिन कांग्रेसी नेताओं की ऐंठन नहीं गई
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44 से 52 सीटों पर पहुंची कांग्रेस पार्टी की कश्ती वहीं डूबी जहां पानी कम था। चुनावों में लगातार दुर्दशा के बाद भी इसके नेताओं की अकड़ ढीली नहीं पड़ रही है। बताते हैं इससे सोनिया गांधी भी आहत हैं। हरियाणा में बड़ी वकालत करके प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा का मान बचाया। सोनिया गांधी तैयार हुईं और कुमारी शैलजा अध्यक्ष बन गई, लेकिन पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर की सेना ने रार ठान ली है।
आलम यह है कि आजाद फोन करते हैं और किरण चौधरी और तंवर दोनों फोन उठाने की जहमत तक नहीं उठाते। रणदीप सुरजेवाला भी खिन्न हैं और दबी जुबान से उन्हें कांग्रेस का मालिक अब भगवान ही नजर आ रहा है। वहीं तंवर के सहयोगियों का कहना है कि जब उन्होंने कमान संभाली थी, तब कौन सा हुड्डा और शैलजा ने साथ दिया था। दरअसल कांग्रेस की यह पीड़ा केवल हरियाणा में ही नहीं है, बल्कि म.प्र., राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब समेत कई राज्यों में है।
लालू बीमार हैं, कौन जलाए लालटेन
राजद के प्रमुख, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले में दोषी करार लालू प्रसाद यादव की तबियत ठीक नहीं है। लालू की यह दशा पत्नी राबड़ी देवी को खाए जा रही है। इसका फायदा न केवल राजद के नेता उठा रहे हैं,बल्कि सहयोगी दलों के नेता भी पीछे नहीं है। उपेन्द्र कुशवाहा, जीतनराम मांझी, यहां तक कि कांग्रेस भी सब अपनी चाल पर हैं। जबकि बिहार विधानसभा चुनाव में ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। वहीं परिवार भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।
बड़े पुत्र तेज प्रताप भोलेनाथ के अवतार में आ जाते हैं, तो छोटे पुत्र अचानक गायब हो जाते हैं। बहुत दिन हो गए राजद के प्रशंसकों ने तेजस्वी की आवाज भी नहीं सुनी। बड़ी बेटी, राज्यसभा सदस्य मीसा भारती की राजनीतिक महत्वाकांक्षा उड़ान भर रही है। ऐसे में लालू प्रसाद के पुराने मित्रों को अब चिंता सता रही है। पहली चिंता लालू का स्वास्थ्य है तो दूसरी यह भी लालटेन जलाएगा कौन?
नीतीश कुमार पलटेंगे?
लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पलटूराम कहते हैं। लालू के पुराने मित्र, राजद के बड़े नेता को उम्मीद है कि चुनाव से पहले नीतीश कुमार फिर पलटी मार सकते हैं। कांग्रेस पार्टी भी बिहार में ऐसी किसी उम्मीद का इंतजार कर रही है। सबकी उम्मीदें भाजपा और जदयू के रिश्ते पर टिकी हैं। बिहार कांग्रेस के एक नेता तो भविष्यवाणी कर रहे हैं कि नीतीश कुमार फिर भाजपा का साथ छोड़ेंगे। भाजपा बिहार में राम विलास पासवान के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। यह टकराव सीट बंटवारे के कारण होगा। क्योंकि भाजपा नीतीश कुमार को अब बिहार में अपरहैंड देने के मूड में नहीं है।
समझा जा रहा है कि विपक्षी दलों का यह कयास नीतीश कुमार के रह-रहकर आने वाले बयानों पर है। कभी लालू और नीतीश दोनों के गुरु रहे राजद के दिग्गज नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार को खुला निमंत्रण देते हुए कहा है कि अगर नीतीश एनडीए छोड़ते हैं, तो यूपीए को उन्हें अपना नेता मान लेना चाहिए। वहीं भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि हम दूसरे के लिए अपनी राजनीति तो छोड़ नहीं देंगे। भाजपा का जहां राजनीतिक हित होगा, सहयोगियों का पूरा सम्मान करते हुए आगे बढ़ेगी। बिहार हो या महाराष्ट्र हम विश्वास की राजनीति करते हैं, बाकी सहयोगियों पर छोड़ देते हैं।
'टीपू' से न घर संभल रहा है न पार्टी
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का परिवार कभी राजनीति में सक्रिय सबसे बड़ा परिवार था। भाई, भतीजा, बेटा, पुत्र, पुत्र वधू नात-रिश्तेदार सब मिलाकर कोई दस लोग सफल थे। जब से पुत्र और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (टीपू) ने म्यान से तलवार निकाली और चचा बगावत कर गए, समाजवादी पार्टी हाशिए पर आ गई है। बताते हैं अब एक बार फिर परिवार के सदस्यों ने समाजवादी पार्टी की इस दशा के लिए अखिलेश को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। मुलायम के छोटे पुत्र प्रतीक यादव, बहू अपर्णा यादव को भी सब रास नहीं आ रहा है। पार्टी के एक राज्यसभा सदस्य का कहना है कि नेता जी (मुलायम) इसे लेकर काफी चिंतित हैं।
वह अखिलेश से शिवपाल को मनाने के लिए कहते हैं, जिसे अखिलेश टालते जा रहे हैं। इस पूरे खेल के एक किरदार और हैं। उनका नाम है अमर सिंह। अमर सिंह कभी मुलायम सिंह के इशारे पर नाचते थे और आज काफी खुश हैं। क्योंकि उनके दुश्मन नंबर एक आजम खान के बुरे दिन चल रहे हैं। समाजवादी पार्टी का पतन हो रहा है, अखिलेश और उनके चाणक्य चाचा रामगोपाल पर इसका ठीकरा फूट रहा है। अमर सिंह की खुशी का एक राज और है। वह यह कि सबको धोखा देने वाले मुलायम सिंह यादव ,सब जीते जी अपनी आंखों से देख रहे हैं और कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
दिल्ली को छोड़ भाजपा को कहीं की चिंता नहीं
अगले छह महीने में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह को इन चुनावों की कोई परवाह नहीं है। भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार पार्टी की तैयारियों पर जोर दे रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों को थोड़ा सा डर केवल दिल्ली में दिखाई पड़ रहा है। बाकी उन्हें भरोसा है कि हर राज्य में इस बार, प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर भाजपा की सरकार बन जाएगी। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि उन्होंने पूरा होमवर्क कर लिया है।
मेहनत की जरूरत केवल दिल्ली में लग रही है। यहां आम आदमी पार्टी से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। दिल्ली में भाजपा ने अपने सभी नेताओं को टारगेट देना शुरू कर दिया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल दिन-रात सक्रिय हैं। रमेश विधूड़ी ने भी जोर लगा रखा है। भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने सहयोगियों का कठिन परिश्रम देखकर थोड़ा परेशान भी हो रहे हैं। लेकिन सबका दावा है कि इस बार दिल्ली में भी बनेगी भाजपा की सरकार।