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बिहार में भाजपा से डरी कांग्रेस बंगाल में वामदलों से करेगी गठबंधन

Tue, 17 Nov 2020 07:56 AM IST
देव कश्यप शरद गुप्ता, नई दिल्ली।
शरद गुप्ता, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 17 Nov 2020 07:56 AM IST
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After Bihar election Result 2020 Congress scared from BJP now decide to tie up with Leftists in West Bengal election 2021
पश्चिम बंगाल में वामदल और कांग्रेस के साथ गठबंधन - फोटो : सोशल मीडिया

बिहार विधानसभा चुनाव में लड़ी 70 सीटों में से महज 19 जीत पाने वाली कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने के लिए पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ औपचारिकत गठबंधन करने जा रही है।

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पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर समझौता तो हुआ था, लेकिन दोनों दलों के बीच जमीनी स्तर पर कोई भी समन्वय नहीं था। दोनों के अलग एजेंडे थे और दोनों के नेताओं ने अलग-अलग प्रचार किया था। सिर्फ अंतिम चुनावी सभा में राहुल गांधी के साथ मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव दासगुप्ता दिखाई दिए थे। तब कांग्रेस ने 92 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था जिनमें से वह 12.25 प्रतिशत मत लेकर 44 सीटें जीतने में सफल साबित हुई थी। जबकि सीपीआई और सीपएम ने मिलकर 159 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे और 21.2 प्रतिशत मत पाकर उनके 27 विधायक जीते थे। आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक ने पांच सीटों पर विजय पाई थी और 4.5 प्रतिशत मत पाए थे। यानी गठबंधन को कुल मिलाकर 39 प्रतिशत मत मिले थे।
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वहीं ऑल इंडिया तृणमल कांग्रेस ने 45 प्रतिशत मत हासिल करने के साथ ही 293 में 211 सीटें जीतक धमाकेदार जीत दर्ज की थी। राज्य विधानसभा में 294 सीटें हैं। लेकिन इस बार तृणमूल कांग्रेस भी भाजपा के साथ कठिन लड़ाई में फंसी है, जिसने 2016 के विधानसभा चुनाव में लड़ी तो 291 सीटें थी लेकिन उसे 10 फीसदी मोतों के साथ मात्र तीन सीटें ही मिली थी।
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तृणमूल कांग्रेस के डर की मुख्य वजह है पिछला लोकसभा चुनाव, जिनमें भाजपा ने 40.64 प्रतिशत मत हासिल कर प्रदेश की 40 में से 18 सीटें हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस को 43.69 प्रतिशत मत और केवल 22 सीटें मिल पाईं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद तृणमूल 34 सीटें जीतकर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

सीपीएम केंद्रीय समिति का फैसला, अंतिम प्रारूप प्रदेश समिति बनाएगी
इस बार वामदल और कांग्रेस दोनों के नेता बकायदा मंच साझा करेंगे, साझा चुनाव प्रचार चलाएंगे और हो सके तो न्यूनतम साझा कार्यक्रम भी जारी करेंगे। इस बारे में हाल ही में हुई सीपीएम की केंद्रीय समिति की बैठक में फैसला ले लिया गया है। हालांकि, अंतिम समझौते पर प्रारूप बनाने की जिम्मेदारी प्रदेश समिति पर छोड़ दी गई है।


कांग्रेस, वाम को साफ होने की आशंका
पिछले डेढ़ वर्ष में भाजपा ने और मेहनत की है और उसका सीधा मुकाबला तृणमूल कांग्रेस से होने की संभावना है। यही वजह है कि इस बार वामदल और कांग्रेस दोनों ही के सामने अस्तित्व का संकट है। पिछले वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की 40 में से सिर्फ 2 सीटें जीत पाई जबकि वामदलों के खातें में कुछ भी नहीं आया। उन्हें आशंका है कि यही स्थिति कहीं विधानसभा चुनावों में भी न दोहराई जाए। 

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