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बालाकोट हमले के बाद मदरसे का दौरा, पर नहीं मिले कुछ सवालों के जवाब

Wed, 10 Apr 2019 07:06 PM IST
तिवारी अभिषेक बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: तिवारी अभिषेक Updated Wed, 10 Apr 2019 07:06 PM IST
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After Balakot airstrike see Status report of Madrasa situated in pakistan
- फोटो : बीबीसी हिंदी

पाकिस्तान की सेना ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के कुछ पत्रकारों को बालाकोट में उस जगह का दौरा करवाया जहां भारत ने 26 फरवरी को हवाई हमला किया था। बीबीसी संवाददाता उस्मान जाहिद भी पत्रकारों के इस दल में मौजूद थे। जब उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से पूछा कि यह दौरा इतनी देरी से क्यों करवाया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि हालात इतने अस्थिर थे कि लोगों को यहां लाना बहुत मुश्किल था।

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अधिकारियों ने कहा कि अब जाकर उन्हें लगा कि यह मीडिया को यहां लाने का उपयुक्त समय है। हालांकि, जब यह कहा गया कि यह बात सभी को मालूम है कि इससे पहले प्रशासन ने स्थानीय पत्रकारों और समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक टीम को मौके पर जाने से रोक दिया था इस बात से इनकार कर दिया गया।
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जब पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग में प्रवक्ता आसिफ गफूर से पूछा गया कि कुछ समय पहले मदरसे के बोर्ड पर पत्रकारों ने मौलाना यूसुफ अजहर का नाम देखा था, ऐसे में इसे कौन चला रहा है। उन्होंने इसका सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि हम मदरसों की फंडिंग और उसके कोर्स पर ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि इस हमले को लेकर काफी विवाद रहा है। भारत करता रहा है कि उसने 26 फरवरी को तड़के हमला कर पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में बालाकोट नाम की जगह पर चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को तबाह कर दिया था। मगर पाकिस्तान का कहना था कि इस हवाई हमले में किसी की जान नहीं गई और जिस परिसर पर हमला करने का दावा भारत कर रहा है, वह मदरसा है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। 

पाकिस्तान का कहना था कि भारतीय वायुसेना के हमलों में सिर्फ पेड़ गिरे हैं और एक जगह पर घर के करीब बम गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ है। पाकिस्तान सरकार ने तब बीबीसी समेत पूरे मीडिया को आश्वस्त किया था कि अगले ही दिन उन्हें घटनास्थल पर ले जाया जाएगा। मगर बाद में सरकार अपने वादे से पीछे हट गई थी।

 

उस्मान जाहिद ने वहां क्या देखा?

पाकिस्तान की सेना के माध्यम से विदेशी मीडिया के लोग इस्लामाबाद आए हुए थे। उन्हें उस जगह का दौरा करवाया गया जहां पर भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक का दावा किया था। इसके साथ ही उस मदरसे का भी दौरा करवाया गया जिसके बारे में भारतीय मीडिया ने कहा था कि जिसे तबाह कर दिया गया।

इस्लामाबाद से हमने हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी और मानसेरा से थोड़ा आगे एक कॉलेज है, वहां पर लैंड किया। हेलिकॉप्टर से जाने के बाद डेढ़ घंटे कठिन रास्ते से मुश्किल पहाड़ी रास्ते से सफर करना पड़ा। जब हम मदरसे की ओर जा रहे थे तो बीच में हमें तीन अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया जहां सिवाये गड्ढों के कुछ नहीं था। यहां पेड़ टूटे हुए थे। हमें बताया कि इंडियन एयरफोर्स ने यहां पर पेलोड गिराए थे।

ये गड्ढे आबादी से काफी दूर थे। इस इलाके में घर काफी दूर-दूर हैं, आबादी काफ़ी बिखरी हुई है। एक गड्ढा एक कच्चे से घर के बाहर था। हमें बताया गया कि एक आदमी यहां जख्मी हुआ है। बाकी जगहें घाटी में पेड़ों के बीच थीं जहां पर गिरे हुए पेड़ अब भी वहीं मौजूद हैं।

फिर हमें ऊपर पहाड़ी की चोटी पर मौजूद मदरसे पर ले जाया गया। यहां पर किसी भी मीडिया को पहली बार लाया गया। हमने जो बिल्डिंग देखी वो शिक्षण संस्थानों जैसी थी। जैसे कि छत पर चादरें वगैरह डाली जाती हैं, उसी तरह की बिल्डिंग है। उसमें किसी तरह के ऐसे निशान नहीं मिले कि इन्हें नया बनाया गया है या यहां कोई नुकसान हुआ है या कोई अटैक हुआ है।

पूरी इमारत अपनी हालत में खड़ी थी। हमने अलग-अलग जगह जाकर देखा। सारा स्ट्रक्चर पुराना है। कुछ हिस्से तो काफी पुराने लग रहे थे। सामने ठीक-ठाक आकार का प्लेग्राउंड है जिसके साथ मस्जिद का हॉल है। यहां 150-200 के करीब बच्चे पढ़ रहे थे।

नहीं मिले कुछ सवालों के जवाब

जब बीबीसी संवाददाता ने अधिकारियों से पूछा कि यह दौरा इतनी देरी से क्यों करवाया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि हालात इतने अस्थिर थे कि लोगों को यहां लाना बहुत मुश्किल था। अधिकारियों ने कहा कि अब जाकर उन्हें लगा कि यह मीडिया को यहां लाने का उपयुक्त समय है। हालांकि, जब यह कहा गया कि यह बात सभी को मालूम है कि इससे पहले प्रशासन ने स्थानीय पत्रकारों और समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक टीम को मौके पर जाने से रोक दिया था इस बात से इनकार कर दिया गया।

जब पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग में प्रवक्ता आसिफ गफूर से पूछा गया कि कुछ समय पहले मदरसे के बोर्ड पर पत्रकारों ने मौलाना यूसुफ अजहर का नाम देखा था, ऐसे में इसे कौन चला रहा है। उन्होंने इसका सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि हम मदरसों की फंडिंग और उसके कोर्स पर ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं।

मदरसे के अंदर एक बोर्ड पर लिखा था कि मदरसा 27 फरवरी से लेकर 14 मार्च तक बंद था। जब बीबीसी संवाददाता ने एक अध्यापक और एक छात्र से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि हमले के बाद आपातकालीन कदम उठाते हुए इसे बंद किया गया था और यह अब भी बंद है। फिर उनसे पूछा कि अगर ऐसा है तो इतने सारे छात्र यहां पर क्यो हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मदरसे में तो छुट्टियां हैं, यहां जो छात्र मौजूद हैं वो स्थानीय हैं।

बीबीसी संवाददाता को वहां पर कुछ लोगों से बातचीत करने की इजाजत दी गई थी मगर जब हमने ऐसा करने की कोशिश की तो कहा गया- जल्दी करो और बहुत देर तक बात मत करो। यह काफी स्पष्ट था कि हमारे पर बंदिशें डाली जा रही थीं और हमें सभी से बात नहीं करने दी जा रही थी।


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