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तालिबान: दुनिया का अकेला 'आतंकी' संगठन, जिसके पास 50 से ज्यादा एयरक्राफ्ट, ऑपरेशन लादेन वाली अमेरिकी रणनीति गायब

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 20 Aug 2021 04:23 PM IST
सार

सुरक्षा मामलों के जानकार ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं, तालिबान दुनिया का एकमात्र ऐसा कट्टरवादी संगठन है, जिसके पास 50 से अधिक एयरक्राफ्ट्स हैं। वे सब हथियार अमेरिका ने अफगान सेना को दिए थे। वहीं पाकिस्तान में जब अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मारा तो उस ऑपरेशन के बाद वहां उपकरण के नाम पर केवल राख पड़ी हुई थी...

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afghanistan: Taliban is a World only terrorist organization, which has more than 50 aircraft which was left by US army
तालिबान (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के ज्यादातर दस्ते वापस लौट चुके हैं। बाकी बचे दस्ते 31 अगस्त तक चले जाएंगे। हालांकि राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि जब तक उनके नागरिक वहां पर हैं, तब तक कुछ दस्ते अफगानिस्तान में मौजूद रहेंगे। अमेरिका ने अफगान फौज को जो हथियार, एयरक्रॉफ्ट्स व संचार उपकरण उपलब्ध कराए थे, तालिबान ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। सुरक्षा मामलों के जानकार ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं, तालिबान दुनिया का एकमात्र ऐसा कट्टरवादी संगठन है, जिसके पास 50 से अधिक एयरक्राफ्ट्स हैं। यह अलग बात है कि वे सब हथियार अमेरिका ने अफगान सेना को दिए थे। पाकिस्तान में जब अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मारा तो उस ऑपरेशन के बाद वहां उपकरण के नाम पर केवल राख पड़ी हुई थी। अफगानिस्तान में ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि अमेरिका के हथियार अफगान आर्मी के पास थे। हालांकि पेंटागन के अधिकारी कह रहे हैं कि तालिबान उन हथियारों की ट्रेनिंग, मेकैनिज्म और तकनीक हासिल नहीं कर सकेगा। M16 असॉल्ट राइफल, करीब डेढ़ लाख संचार उपकरण और 16 हजार नाइट-विजन गॉगल्स, लंबे समय तक लड़ाकों के काम नहीं आ सकेंगे।

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बता दें कि तालिबान के पास अमेरिका के आधुनिक हथियार एवं आयुध-संभार है। जैसे-जैसे तालिबान, इन हथियारों, वाहनों व एयरक्रॉफ्ट को अपने कब्जे में ले रहा है, दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ती जा रही है। तालिबान के लड़ाकों की हरकतें नजर आने लगी हैं। तालिबान भले ही मौजूदा समय में आर्थिक संकट में हो, लेकिन वह अमेरिकी हथियारों के बलबूते पड़ोसी देशों को डरा रहा है। लोगों को मारा जा रहा है। लोगों के लिए अफगानिस्तान से बाहर निकलने का संकट पैदा हो गया है। अगर कोई बहस करता है तो तालिबान के लड़ाके उसे गोली मारने में देर नहीं लगाते।

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वीडियो में साफतौर से देखा जा सकता है कि तालिबान के लड़ाके अमेरिकी निर्मित हथियारों से लैस हैं। रॉयटर की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगान बलों, जिसमें छह लाख की पैदल सेना शामिल थी, उसे आधुनिक हथियार प्रदान किए थे। इनमें केवल M16 असॉल्ट राइफल या डेढ़ लाख से ज्यादा संचार उपकरण ही नहीं थे, बल्कि 16 हजार नाइट-विजन गॉगल्स डिवाइस भी शामिल हैं। इन उपकरणों के बलबूते, अफगान सेना ने लंबे समय तक तालिबान को रोके रखा था। यूएस ह्यूमवेस और यूएच-60 ब्लैक हॉक्स व स्काउट अटैक हेलीकॉप्टर सहित सभी उपकरण तालिबान के कब्जे में हैं।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) ने बताया, अमेरिकी सेना अपने सभी जरूरी उपकरण साथ ले गई है। तालिबानी लड़ाके जिन हेलीकॉप्टर्स, एयरक्रॉफ्ट, बख्तरबंद गाड़ियां, सैन्य ड्रोन व एम16 असॉल्ट राइफल के साथ वीडियो शेयर कर रहे हैं, दरअसल वे सभी अफगान आर्मी के हैं। इनमें बहुत से उपकरण तो ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल ही नहीं हुआ है। संचार उपकरण, ड्रोन और बख्तरबंद वाहनों का संचालन सिस्टम समझना आसान नहीं है। उन्हें अब ट्रेनिंग कौन देगा। इन हथियारों का इस्तेमाल एक बार तो किया जा सकता है। दूसरी बार उसका एम्युनेशन कहां से लाएंगे। सबसे बड़ी बात तकनीक की है, वह तो अमेरिका के पास ही है। एक बार वाहन खराब हो गया तो उसका पुर्जा कहां से हासिल करेंगे। अफगानिस्तान में वह पुर्जा बनता ही नहीं है। वह तो अमेरिकी सेना से ही मिलेगा। ये सब मुश्किलें तालिबान के सामने आएंगी।

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन यह बात जानते हैं। यह बात भी सही है कि अब तालिबान के अफगानिस्तान में जो कुछ भी है, उसे वापस लेने के लिए अमेरिका गंभीर नहीं है। अमेरिका यह बात मान चुका है कि मौजूदा अफगानिस्तान में उसका जो कुछ भी है, वह सब तालिबान का हो चुका है।

भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं कि अमेरिका के यूएस ह्यूमवेस और यूएच-60 ब्लैक हॉक्स व स्काउट अटैक हेलीकॉप्टर सामान्य नहीं हैं। ये सभी देशों के पास नहीं हैं। इनके संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इस वक्त तालिबान के पास पायलटों की भारी कमी है। कहा जा रहा है कि अफगान आर्मी के बहुत से पायलटों को मार दिया गया है। संचार उपकरण, एयरक्राफ़्ट्स और हेलीकॉप्टर आदि ऐसे भी हैं जो दूसरे देश की सीमा पर लगे रडार की पहुंच से बाहर रहते हैं। ये पड़ोसी राष्ट्रों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। अमेरिका के जिन विमानों, वाहनों, मशीनगन, मोर्टार, और हॉवित्जर के साथ लड़ाकों के जो वीडियो आ रहे हैं, वे कुछ ही समय तक उनके काम के हैं। तकनीक के अभाव में वे बाद में खिलौने भी बन सकते हैं। तालिबान इस मामले में चीन से तकनीक व ट्रेनिंग लेने का प्रयास करेगा। ये चीन और तालिबान के संबंधों पर निर्भर करेगा कि चीन उसे तकनीक व ट्रेनिंग मुहैया कराएगा या नहीं। शुरू में तो चीन के लिए भी 'पेंटागन' की तकनीक को समझना आसान नहीं होगा।

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