कूटनीति: तालिबान से बातचीत शुरू करने को लेकर भारत अभी भी 'वेट एंड वॉच' की नीति पर, पहले इन शर्तों पर करना होगा अमल!
विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेड उस्मानी कहते हैं, पाकिस्तान को इस बात का अंदाजा है कि दुनिया भर से कटने के बाद उसके हालात बहुत खराब होते जाएंगे। यही वजह है कि वह अपने नजदीकी मुल्कों से रिश्ते बना कर रखना चाहता है। लेकिन जिस तरीके कानून व्यवस्था के तहत तालिबानी अपने देश को चलाना चाहते हैं वह दुनिया के देशों को मान्य नहीं है...
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तालिबान की ओर से भारत के लिए बातचीत के खुले रास्ते पर केंद्र सरकार अभी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। हालांकि भारत ने अफगानिस्तान से पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए उनके साथ खड़े होने की बात कही, लेकिन कूटनीतिक रिश्तों पर फिलहाल अभी किसी भी तरह की बातचीत को शुरू करने का कोई इशारा नहीं किया है।
तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता तारिक गजनीवाल ने अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में स्पष्ट तौर पर कहा था कि तालिबान सरकार भारत के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहती है। तालिबान के इस बयान के बाद विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार का लगातार यही कहना है कि वह अभी 'रुको और देखो' की स्थिति में है। अफगानिस्तान में मानवीय हालातों पर संयुक्त राष्ट्र की वर्चुअल बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां के हालातों पर चिंता जताई, बल्कि दुनिया के देशों से बढ़कर मदद करने का आह्वान किया। भारत सरकार इस बात का लगातार प्रयास कर रही है कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका हो। ताकि इस मुल्क में आने वाले दिनों में होने वाली तमाम दिक्कतों और परेशानियों से वहां के लोगों को न सिर्फ निजात मिले बल्कि उसका कोई निराकरण भी ढूंढा जाए।
अफगान शरणार्थियों को भारत दे रहा पनाह
तालिबान की भारत से दोस्ती वाले बयान पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार अभी पूरी तरह से 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है केंद्र सरकार हर मंच पर अपनी इसी बात पर कायम है। अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार अपने दशकों पुराने अफगानिस्तान के लोगों से रिश्तों को तोड़ना नहीं चाहती है। यही वजह है कि अफगानिस्तान के शरणार्थियों को भारत अपने मुल्क में पनाह दे रहा है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है जब तक अफगानिस्तान में मानवीय मूल्यों की पहचान नहीं होती। महिलाओं से लेकर आमजनों के साथ दुर्व्यवहार और मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन होता रहेगा, तब तक बातचीत का कोई भी सवाल नहीं उठता है। हालांकि इस बात के संकेत जरूर मिले अगर तालिबान महिलाओं और आमजन के प्रति नरम रुख अख्तियार करता है और हिंसा के रास्ता छोड़ता है तो आगे बातचीत की संभावना है।
अफगानिस्तान के हालात को देखते हुए दुनिया के ज्यादातर देशों ने अपने संबंध खत्म कर लिए हैं। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेड उस्मानी कहते हैं, पाकिस्तान को इस बात का अंदाजा है कि दुनिया भर से कटने के बाद उसके हालात बहुत खराब होते जाएंगे। यही वजह है कि वह अपने नजदीकी मुल्कों से रिश्ते बना कर रखना चाहता है। लेकिन जिस तरीके कानून व्यवस्था के तहत तालिबानी अपने देश को चलाना चाहते हैं वह दुनिया के देशों को मान्य नहीं है। अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार पर लगातार दबाव इस बात के लिए बनाया जा रहा है कि वह अपने यहां पर हिंसा छोड़कर महिलाओं और आम नागरिकों के साथ भेदभाव न करते हुए उन्हें दुनिया के दूसरे मुल्कों की तरह ही सामान्य जीवन जीने का माहौल दें।