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Kabul: सैकड़ों सिख कर रहे भारत आने का इंतजार, अफगान सिख नेता ने केंद्र सरकार से की ई-वीजा देने की अपील

Sat, 13 Aug 2022 06:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 13 Aug 2022 06:28 PM IST
सार

काबुल की गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गुरनाम सिंह राजवंशी को शुक्रवार को अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ काबुल से निकाला गया है। हालांकि उनका बेटा अभी भी काबुल में है। वहां लगभग 100 लोग इंतजार कर रहे हैं क्योंकि अधिकांश अफगान हिंदुओं और सिखों के लिए अपने परिवार के किसी भी सदस्य को छोड़कर भारत आना मुश्किल है। 

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Afghan Sikh leader says 100 Sikhs and Hindus waiting to come to India
तालिबान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

काबुल के गुरुद्वारे में रह रहे 100 अफगान सिख और हिंदू भारत आना चाह रहे हैं। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से ये लोग भारत आने के लिए वीजा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। काबुल की गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गुरनाम सिंह राजवंशी ने शनिवार को कहा कि करीब 100 अफगान सिख और हिंदू भारत आना चाहते हैं।

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ई-वीजा मिलने की आस
गौरतलब है कि काबुल की गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गुरनाम सिंह राजवंशी को शुक्रवार को अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ काबुल से निकाला गया है। हालांकि उनका बेटा अभी भी काबुल में है। उसे भारत सरकार से ई-वीजा नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि लगभग 28 लोगों को को अभी तक वीजा नहीं मिला है। इस वजह से वहां लगभग 100 लोग इंतजार कर रहे हैं क्योंकि अधिकांश अफगान हिंदुओं और सिखों के लिए अपने परिवार के किसी भी सदस्य को छोड़कर भारत आना मुश्किल है। 
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सरकार से किया आग्रह
भारत सरकार से तालिबान के नियंत्रण वाले देश में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को ई-वीजा देने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों को वीजा नहीं मिला है उनमें से कई शिशु और बच्चे हैं। वहां के हालात के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वहां स्थिति इतनी अस्थिर है कि हम अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को एक मिनट के लिए भी अकेले नहीं छोड़ सकते।
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18 जून को हुआ था गुरुद्वारे पर हमला
गौरतलब है कि 18 जून दिन शनिवार को काबुल के बाग-ए-बाला इलाके में गुरुद्वारा करते परवान में कई धमाके हुए थे। इस दौरान अफगान सुरक्षाकर्मियों ने एक विस्फोटक से भरे वाहन को गुरुद्वारे तक पहुंचने से रोक लिया था। जिससे एक बड़ी घटना होने से बच गई । पिछले अगस्त में अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद से इस गुरुद्वारे में 150 सिखों ने पनाह ली थी। 18 जून को काबुल में कर्ता-ए-परवान गुरुद्वारे पर आतंकवादियों के हमले के बाद से अब तक 66 अफगान सिखों और हिंदुओं को चार जत्थों में भारत लाया गया है।

'नहीं कर सकते अफगानिस्तान वापस जाने की कल्पना'
हमले को याद करते हुए गुरनाम सिंह राजवंशी ने कहा कि 18 अफगान सिख गुरुद्वारे के अंदर थे,जब इसे निशाना बनाया गया और उनमें से दो की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि वहां कई लोगों के व्यवसाय बर्बाद हो गए। आतंकी हमारी दुकानों को भी निशाना बनाते थे। हमले के बाद से अफगान सिखों ने वहां गुरुद्वारों में जाना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में कोई भी गुरुद्वारा अब चालू नहीं है और लोग उनसे मिलने से भी डरते हैं। हम उस देश (अफगानिस्तान) में पैदा हुए थे, हम वहां पले-बढ़े, वहां हमारे घर हैं, लेकिन हम फिर से उस जगह वापस जाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। जो लोग भारत पहुंचे हैं वे अब अपने जीवन के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।


शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कर रही प्रयास
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अमृतसर अफगान सिखों और हिंदुओं की निकासी प्रक्रिया में शामिल है। एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह ने कहा कि निकासी की बुनियादी मांगें हैं और उन्हें जल्द ही पूरा किया जाएगा। वहां से निकाले गए लोगों की अपने बच्चों के लिए आश्रय और शिक्षा जैसी बहुत ही बुनियादी मांगें हैं। हम देख रहे हैं कि मांगों को कैसे पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी दिल्ली में विस्थापितों के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है।

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