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असम समझौता: असमिया की परिभाषा और कट ऑफ वर्ष स्पष्ट करने की सलाह
Wed, 26 Feb 2020 04:44 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 26 Feb 2020 04:44 AM IST
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सर्बानंद सोनोवाल
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असम में अवैध घुसपैठ के खिलाफ छह साल चले आंदोलन के बाद हुए असम समझौते के लगभग 35 साल बाद धारा छह लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सीएम सर्बानंद सोनोवाल को सौंपी। समिति ने रिपोर्ट में असमिया की परिभाषा और असम के मूल निवासी की पहचान कब से की जाए उस वर्ष को स्पष्ट करने समेत कई सुझाव दिए।
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गृहमंत्रालय ने सेवानिवृत्त जज बीके शर्मा की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय समिति का गठन किया था। शर्मा ने कहा, हमारी रिपोर्ट तय समय 15 फरवरी से ठीक एक महीने पहले 15 जनवरी को ही पूरी हो गई थी। इस दौरान समिति के सदस्यों ने असम के एक एक कोने में लोगों से मुलाकात की और इस दौरान उन्हें 1200 से अधिक प्रस्तुतियां मिलीं।
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समिति ने एक सीलबंद लिफाफे में यह रिपोर्ट सीएम को सौंपी। वरिष्ठ भाजपा नेता और वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में है और इसे बुधवार तक केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा। उनका दावा है कि केंद्र सरकार समिति की सिफारिशों को लागू करने के प्रति गंभीर है।
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असम समझौते की धारा छह असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई पहचान एवं विरासत की रक्षा करने, उसे संरक्षित करने एवं उसका प्रचार करने के लिए सांविधानिक, कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा (इनमें से जो भी उचित हो) देने से संबंधित है।