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कानून सबके लिए समान: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी, अब भांजी को गोद ले सकेंगे मामा-मामी

Fri, 02 Jul 2021 05:08 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, नागपुर।
पीटीआई, नागपुर। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 02 Jul 2021 05:08 PM IST
सार

बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने कहा है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल उन बच्चों तक सीमित नहीं है जो अनाथ हैं, छोड़ दिए गए हैं या कानून की नजर में आरोपी हैं। न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की एकल पीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा।

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Adoption process not limited to orphans, abandoned children: Bombay High Court, juvenile justice law equal for all
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने कहा है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल उन बच्चों तक सीमित नहीं है जो अनाथ हैं, छोड़ दिए गए हैं या कानून की नजर में आरोपी हैं। पीठ ने कहा कि किशोर न्याय कानून रिश्तेदारों के बच्चों को भी गोद लेने की इजाजत देता है।

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न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की एकल पीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा। याचिका एक दंपति ने दायर की थी, जो अपने रिश्तेदार की नाबालिग बेटी को गोद लेना चाहते थे। यह दंपति बच्ची के मामा-मामी हैं और बच्ची के माता-पिता उसे गोद देने के लिए राजी हैं।
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यवतमाल की जिला अदालत ने बच्ची को गोद लेने के उनके अनुरोध को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि बच्ची न तो अनाथ है, न कानून की नजर में आरोपी है, न ही उसके माता-पिता ने उसे छोड़ा है और न ही बच्ची को देखभाल तथा संरक्षण की जरूरत है। जिला अदालत के फैसले के बाद दंपति ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई।
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न्यायमूर्ति पिटाले ने कहा कि किशोर न्याय कानून (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) केवल ऐसे बच्चों के लिए नहीं है, जो कानून की नजर में आरोपी हैं, जिन्हें देखभाल और संरक्षण की जरूरत है बल्कि यह रिश्तेदारों के बच्चों, सौतेले अभिभावक द्वारा बच्चे को गोद लेने संबंधी प्रक्रिया का भी नियमन करता है और इसकी मंजूरी देता है।


अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता बच्ची के मामा-मामी हैं इसलिए वह कानून के तहत 'रिश्तेदार' की परिभाषा के दायरे में आते हैं। न्यायमूर्ति पिटाले ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि वह दंपति की याचिका पर नए सिरे से विचार करें।

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