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ड्रग्स का आदी था हिटलर, नशे की आदत के चलते लेता था सनकी फैसले

Fri, 07 Oct 2016 12:01 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Oct 2016 12:01 PM IST
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Adolf hitler was a drug addict

जर्मनी के कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर को उसके सनकी स्वभाव के लिए जाना जाता है। उस स्वभाव के लिए जिसकी वजह से दुनिया को दूसरा विश्व युद्ध झेलना पड़ा। लेकिन हिटलर का यह सनकी स्वभाव क्या उसकी नशे की लत की देन था। 

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कुछ ऐसा ही दावा किया गया है एक किताब में। किताब के अनुसार अत्यधिक मात्रा में ड्रग्स और नशे के इंजेक्‍शन लेने के कारण उसके शरीर की नशें भी खराब हो चुकी थीं। इस नशे की लत के चलते ही वह सनकी फैसले लेता था। 
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किताब में बताया गया है कि कैसे नशे की लत के कारण वह सनकी फैसले लेने लगा था और इसकी वजह से दुनिया को दूसरा विश्व युद्ध झेलना पड़ा। जर्मनी के मशहूर लेखक नार्मन ओहलर ने अपनी किताब में यह सनसनीखेज दावे किए हैं। 
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'ब्लिट्ज्डः ड्रग्स इन नाजी जर्मनी' शीर्षक वाली किताब में ओहलर ने बताया है कि हीरोइन जैसे एक नशीले द्रव्य इकोडेल की लत के कारण उसकी यह हालत हुई जिसे लेने की सलाह 1944 में लगे सदमे के बाद दी गई थी। ब्रिटिश इतिहासकारों ने इस पुस्तक को काफी सराहा है। पुस्तक में बताया गया है कि कैसे नशे की
लत के कारण धीरे धीरे हिटलर की जिंदगी खत्म होती चली गई। 

आत्मघाती हमले में बचने के बाद पड़ी जानलेवा ड्रग्स की लत

Adolf hitler was a drug addict

किताब में हिटलर के निजी चिकित्सक रहे डा. थेओ मोरेल के हवाले से बताया गया है कि कैसे हिटलर को इस नशे की लत लगी। डॉक्टर ने बताया कि एक बार उन्होंने चेतावनी दी थी कि वह अब उन्हें नशे के और इंजेक्‍शन नहीं लगा सकते क्योंकि उनके शरीर में कहीं जगह नहीं बची है और अभी उन्हें पुराने छेद भरने का इंतजार करना होगा। 

उसके दाएं और बाएं हाथों पर कहीं कोई जगह नहीं बची थी जहां इंजेक्‍शन के निशान न बने हों। लेखक ओहलर ने बताया कि हिटलर को यह ड्रग्स लेने की सलाह तब दी गई जब 1944 में उस पर एक आत्मघाती हमला किया गया था जिसे ऑपरेशन वाल्कयरी के नाम से जाना जाता है। 

इसमें हिटलर को मारने के लिए विरोधियों ने उसकी मेज के नीचे ब्रिफकेश में बम फिट कर दिया था। बम में हुए विस्फोट में हिटलर की जान तो बच गई लेकिन उसके कान के दोनों पर्दे फट गए। ओहलर ने किताब में हिटलर के डॉक्टर के हवाले से बताया है कि 1944 में मैं काफी डर गया था क्योंकि हिटलर ने इसके बाद एक भी दिन सामान्य रूप से नहीं बिताया था। जबकि इस वाक्ये से पहले वह लोगों से काफी मिलनसार हुआ करता ‌था। लेकिन इस घटना के बाद उन्हें इकोडोल
के हजारों इंजेक्‍शन एक साथ दिए गए। 

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