Manipur: आईएएस विनीत जोशी को मणिपुर का मुख्य सचिव बनाया, हिंसा के बीच राज्य सरकार ने की थी अपील
मणिपुर इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है, यही वजह है कि मणिपुर सरकार अपने कैडर के अधिकारियों को वापस बुला रही है।
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अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट (ACC) ने आईएएस विनीत जोशी को वापस मणिपुर कैडर में भेजने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि मणिपुर सरकार की अपील पर यह फैसला किया गया है। आईएएस विनीत जोशी फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव का पद संभाल रहे थे। बता दें कि मणिपुर इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है, यही वजह है कि मणिपुर सरकार अपने कैडर के अधिकारियों को वापस बुला रही है।
The Appointments Committee of the Cabinet (ACC) has approved the repatriation of Vineet Joshi, Additional Secretary, Department of Higher Education, Ministry of Education to his parent cadre on the request of the Government of Manipur. pic.twitter.com/rfR1E7YlO4
— ANI (@ANI) May 7, 2023विज्ञापन
विनीत जोशी 1992 बैच के मणिपुर कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। जोशी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के डायरेक्टर जनरल भी रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि मणिपुर में मैती समुदाय को जनजातीय वर्ग में आरक्षण देने के मुद्दे पर हिंसा हो रही है। इस हिंसा में अभी तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालात पर काबू पाने के लिए राज्य में सेना की तैनाती की गई है और दंगाईयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपने कैडर के आईएएस अधिकारियों को उनके मूल कैडर में बुलाने का फैसला किया है।
कार्मिक मंत्रालय के 6 मई के आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मणिपुर सरकार के अनुरोध पर जोशी को उनके मूल कैडर में वापस भेजने की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (कार्मिक प्रभाग) के एक आदेश के अनुसार कि मणिपुर के राज्यपाल तत्काल प्रभाव से डॉ विनीत जोशी को मुख्य सचिव नियुक्त करते हुए प्रसन्न हैं।"
अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में 3 मई को 10 पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद पूर्वोत्तर राज्य में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई। अब तक, 23,000 लोगों को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों से बचाया गया है और उन्हें सैन्य छावनियों में ले जाया गया है।